अल-अंबिया · 34/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَمَا جَعَلْنَا لِبَشَرٍ مِّن قَبْلِكَ الْخُلْدَ ۖ أَفَإِن مِّتَّ فَهُمُ الْخَالِدُونَ ۝٣٤
Wa maa ja`alnaa libasharim min qablikal khuld; afaimmitta fahumul khaalidoon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले भी किसी फ़र्दे बशर को सदा की ज़िन्दगी नहीं दी तो क्या अगर तुम मर जाओगे तो ये लोग हमेशा जिया ही करेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْخُلْدَ: हमेशा रहना, दुनिया में कभी न मरना।
  • أَفَإِن مِّتَّ: तो क्या अगर आपकी मृत्यु हो जाए।
  • الْخَالِدُونَ: हमेशा रहने वाले, कभी न मरने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अल्लाह तआला ने आपको दिलासा देते हुए और इस बात की सच्चाई बयान करते हुए फ़रमाया कि हमने आपसे पहले किसी भी इंसान को दुनिया में हमेशा रहने की ज़िंदगी नहीं दी। हर इंसान को मौत का स्वाद चखना है, चाहे वह नबी हो या आम इंसान। यह दुनिया फ़ानी है, यहाँ कोई भी हमेशा नहीं रह सकता।

फिर अल्लाह तआला ने उन लोगों पर तंज़ किया जो आपकी मौत की आशा रखते हैं और सोचते हैं कि अगर आप मर गए तो हम आज़ाद हो जाएँगे और हमेशा दुनिया में रहेंगे। अल्लाह फ़रमाता है: क्या अगर आपकी मौत हो जाए तो क्या ये लोग हमेशा रहने वाले हैं? हरगिज़ नहीं! ये भी मरेंगे, इनकी भी मौत आएगी। यह सोचना बिल्कुल ग़लत और बेबुनियाद है।

इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि मौत हर इंसान के लिए तय है। नबी भी इस क़ानून से बाहर नहीं हैं। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अच्छे कामों में गुज़ारना चाहिए और आख़िरत के लिए तैयारी करनी चाहिए। यह भी सबूत है कि हज़रत ख़िज़र अलैहिस्सलाम भी फ़ौत हो चुके हैं, क्योंकि वह भी बशर (इंसान) थे।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि दुनिया की ज़िंदगी पर भरोसा न करें, बल्कि उस ज़िंदगी की तैयारी करें जो कभी ख़त्म नहीं होगी। अल्लाह तआला ने हमें इस दुनिया में इसलिए भेजा है ताकि हम उसकी इबादत करें और उसकी राह में भलाई के काम करें। जो लोग नबी की मौत की आशा रखते हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि मौत तो सबको आनी है, लेकिन अल्लाह का दीन और उसका कलाम हमेशा रहेगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की राह पर चलें और उसके रसूल की सुन्नत को अपनाएँ, ताकि आख़िरत में कामयाब हों।



📜 आयत 32-36 — अल-अंबिया

32وَجَعَلْنَا السَّمَاءَ سَقْفًا مَّحْفُوظًا ۖ وَهُمْ عَنْ آيَاتِهَا مُعْرِضُونَ
और हम ही ने आसमान को छत बनाया जो हर तरह महफूज़ है और ये लोग उसकी आसमानी निशानियों से मुँह फेर रहे हैं
33وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ كُلٌّ فِي فَلَكٍ يَسْبَحُونَ
और वही वह (क़ादिरे मुत्तलिक़) है जिसने रात और दिन और आफ़ताब और माहताब को पैदा किया कि सब के सब एक (एक) आसमान में पैर कर चक्मर लगा रहे हैं
34وَمَا جَعَلْنَا لِبَشَرٍ مِّن قَبْلِكَ الْخُلْدَ ۖ أَفَإِن مِّتَّ فَهُمُ الْخَالِدُونَ
और (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले भी किसी फ़र्दे बशर को सदा की ज़िन्दगी नहीं दी तो क्या अगर तुम मर जाओगे तो ये लोग हमेशा जिया ही करेंगे
35كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ ۗ وَنَبْلُوكُم بِالشَّرِّ وَالْخَيْرِ فِتْنَةً ۖ وَإِلَيْنَا تُرْجَعُونَ
(हर शख्स एक न एक दिन) मौत का मज़ा चखने वाला है और हम तुम्हें मुसीबत व राहत में इम्तिहान की ग़रज़ से आज़माते हैं और (आख़िकार) हमारी ही तरफ लौटाए जाओगे
36وَإِذَا رَآكَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِن يَتَّخِذُونَكَ إِلَّا هُزُوًا أَهَٰذَا الَّذِي يَذْكُرُ آلِهَتَكُمْ وَهُم بِذِكْرِ الرَّحْمَٰنِ هُمْ كَافِرُونَ
और (ऐ रसूल) जब तुम्हें कुफ्फ़ार देखते हैं तो बस तुमसे मसखरापन करते हैं कि क्या यही हज़रत हैं जो तुम्हारे माबूदों को (बुरी तरह) याद करते हैं हालाँकि ये लोग खुद खुदा की याद से इन्कार करते हैं (तो इनकी बेवकूफ़ी पर हँसना चाहिए)
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अनुवाद — अल-अंबिया 34

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Tuesday, August 18, 2026

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