अल-हज · 31/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
حُنَفَاءَ لِلَّهِ غَيْرَ مُشْرِكِينَ بِهِ ۚ وَمَن يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَكَأَنَّمَا خَرَّ مِنَ السَّمَاءِ فَتَخْطَفُهُ الطَّيْرُ أَوْ تَهْوِي بِهِ الرِّيحُ فِي مَكَانٍ سَحِيقٍ ۝٣١
Hunafaaa`a lillaahi ghaira mushrikeena bih; wa mai yushrik billaahi faka annamaa kharra minas samaaa`i fatakh tafuhut tairu aw tahwee bihir reehu bee makaanin saheeq
📖 हिंदी अर्थ
निरे खरे अल्लाह के होकर (रहो) उसका किसी को शरीक न बनाओ और जिस शख्स ने (किसी को) खुदा का शरीक बनाया तो गोया कि वह आसमान से गिर पड़ा फिर उसको (या तो दरमियान ही से) कोई (मुरदा ख्ववार) चिड़िया उचक ले गई या उसे हवा के झोंके ने बहुत दूर जा फेंका

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حُنَفَاءَ (हुनफ़ा): एकेश्वरवादी, सीधे रास्ते पर चलने वाले, सभी झूठे धर्मों से विमुख होकर केवल अल्लाह की ओर झुकने वाले।
  • خَرَّ (ख़र्रा): गिरना, सजदे में गिरना नहीं, बल्कि ऊपर से नीचे गिरना।
  • تَخْطَفُهُ (तख़्तफ़ुहु): झपटकर ले जाना, नोच-नोच कर टुकड़े कर देना।
  • تَهْوِي (तह्वी): गिराना, ले जाना, झोंका देना।
  • سَحِيقٍ (सहीक़): बहुत दूर, विनाशकारी स्थान, जहाँ से निकलने की कोई उम्मीद न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने बंदों को सीधे रास्ते की ओर बुलाते हुए फ़रमाता है कि तुम सब उसी की ओर एकाग्र होकर मुड़ो, उसी के लिए अपने दीन को ख़ालिस करो, और उसके साथ किसी को शरीक न ठहराओ। यही असली हनाफ़ियत (एकेश्वरवाद) है — यानी हर बात में, हर इबादत में, हर दुआ में सिर्फ़ अल्लाह को याद करना, उसी से डरना, उसी से उम्मीद रखना। जो शख्स इस सच्चे ईमान से हटकर शिर्क करता है, उसकी मिसाल बहुत ही स्पष्ट और डरावनी है — जैसे कोई इंसान आसमान की ऊँचाई से गिरे, तो या तो उसे हवा में उड़ते हुए शिकारी पक्षी झपटकर नोच-नोच कर टुकड़े-टुकड़े कर दें, या फिर तेज़ आँधी उसे उठाकर किसी ऐसी दूर और वीरान जगह पर फेंक दे जहाँ से उसके बचने की कोई संभावना ही न हो।

यानी शिर्क इंसान की ईमान की बुलंदी को मिट्टी में मिला देता है। जो इंसान ईमान की ऊँचाई पर होता है, वह शिर्क करते ही उस ऊँचाई से गिर जाता है — उसकी रूह को शैतानी वासनाएँ और बुरे ख़यालात नोच-नोच कर खा जाते हैं, और उसका दिल इतनी दूर जा गिरता है कि हिदायत की कोई किरण उसे फिर नहीं मिलती।

यह तशबीह (उदाहरण) हमें सिखाती है कि शिर्क सिर्फ एक गुनाह नहीं, बल्कि इंसान की आत्मा का पूरा विनाश है। इसलिए ऐ बंदे! अपने दिल को हर उस चीज़ से पाक रख जो अल्लाह के सिवा किसी और को पूजने, डरने या उम्मीद करने की तरफ ले जाए। अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं के लिए है जो उसकी तरफ पूरी तरह मुड़ जाएँ, और उसकी मुहब्बत को अपने दिलों में सबसे ऊपर रखें। याद रखो, जो शख्स अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराता है, वह अपने ही हाथों अपनी नजात (मुक्ति) को खो देता है — लेकिन जो उसकी तरफ सच्चे दिल से लौटता है, अल्लाह उसे अपनी रहमत के साये में ले लेता है और उसे कभी न खत्म होने वाली कामयाबी से नवाज़ता है।



📜 आयत 29-33 — अल-हज

29ثُمَّ لْيَقْضُوا تَفَثَهُمْ وَلْيُوفُوا نُذُورَهُمْ وَلْيَطَّوَّفُوا بِالْبَيْتِ الْعَتِيقِ
फिर लोगों को चाहिए कि अपनी-अपनी (बदन की) कसाफ़त दूर करें और अपनी नज़रें पूरी करें और क़दीम (इबादत) ख़ानए काबा का तवाफ करें यही हुक्म है
30ذَٰلِكَ وَمَن يُعَظِّمْ حُرُمَاتِ اللَّهِ فَهُوَ خَيْرٌ لَّهُ عِندَ رَبِّهِ ۗ وَأُحِلَّتْ لَكُمُ الْأَنْعَامُ إِلَّا مَا يُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ ۖ فَاجْتَنِبُوا الرِّجْسَ مِنَ الْأَوْثَانِ وَاجْتَنِبُوا قَوْلَ الزُّورِ
और इसके अलावा जो शख्स खुदा की हुरमत वाली चीज़ों की ताज़ीम करेगा तो ये उसके पवरदिगार के यहाँ उसके हक़ में बेहतर है और उन जानवरों के अलावा जो तुमसे बयान किए जाँएगे कुल चारपाए तुम्हारे वास्ते हलाल किए गए तो तुम नापाक बुतों से बचे रहो और लग़ो बातें गाने वग़ैरह से बचे रहो
31حُنَفَاءَ لِلَّهِ غَيْرَ مُشْرِكِينَ بِهِ ۚ وَمَن يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَكَأَنَّمَا خَرَّ مِنَ السَّمَاءِ فَتَخْطَفُهُ الطَّيْرُ أَوْ تَهْوِي بِهِ الرِّيحُ فِي مَكَانٍ سَحِيقٍ
निरे खरे अल्लाह के होकर (रहो) उसका किसी को शरीक न बनाओ और जिस शख्स ने (किसी को) खुदा का शरीक बनाया तो गोया कि वह आसमान से गिर पड़ा फिर उसको (या तो दरमियान ही से) कोई (मुरदा ख्ववार) चिड़िया उचक ले गई या उसे हवा के झोंके ने बहुत दूर जा फेंका
32ذَٰلِكَ وَمَن يُعَظِّمْ شَعَائِرَ اللَّهِ فَإِنَّهَا مِن تَقْوَى الْقُلُوبِ
ये (याद रखो) और जिस शख्स ने खुदा की निशानियों की ताज़ीम की तो कुछ शक नहीं कि ये भी दिलों की परहेज़गारी से हासिल होती है
33لَكُمْ فِيهَا مَنَافِعُ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ثُمَّ مَحِلُّهَا إِلَى الْبَيْتِ الْعَتِيقِ
और इन चार पायों में एक मुअय्युन मुद्दत तक तुम्हार लिये बहुत से फायदें हैं फिर उनके ज़िबाह होने की जगह क़दीम (इबादत) ख़ानए काबा है
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
31आयत

अनुवाद — अल-हज 31

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Tuesday, August 18, 2026

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