अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَلَا تُطِعِ الْكَافِرِينَ – काफिरों की बात मत मानो, उनके दबाव में मत आओ।
- وَجَاهِدْهُم – और उनके साथ जिहाद करो (संघर्ष करो)।
- بِهِ – इस (कुरआन) के साथ।
- جِهَادًا كَبِيرًا – बहुत बड़ा जिहाद, अत्यंत कठिन और महान संघर्ष।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फरमाते हैं कि काफिरों की बात मत मानो, चाहे वे तुम्हें कितना ही लुभाएँ या डराएँ। वे तुमसे यह चाहते हैं कि तुम उनके देवताओं की बुराई न करो, उनके साथ नरमी बरतो और उनकी माँगों पर कुछ समझौता कर लो — लेकिन अल्लाह तुम्हें साफ़ हुक्म देता है कि उनकी किसी भी बात को मत मानो और उनके सामने झुको मत।
फिर अल्लाह फरमाता है: "और उनके साथ इस (कुरआन) के माध्यम से बहुत बड़ा जिहाद करो।" यानी यह कुरआन ही तुम्हारा सबसे बड़ा हथियार है — इसके ज़रिए उनके विचारों, उनकी शिर्क और बुराईयों का मुकाबला करो। यह जिहाद सिर्फ तलवार से नहीं, बल्कि सबसे पहले कुरआन की शिक्षाओं, सब्र, स्थिरता और दृढ़ता के साथ करना है। उनके अत्याचारों, तानों और सताओं पर सब्र करते हुए उन्हें सत्य की ओर बुलाते रहो — यही सबसे बड़ा जिहाद है।
यह आदेश केवल नबी ﷺ के लिए नहीं, बल्कि हर उस मुसलमान के लिए है जो दीन की खिदमत करना चाहता है। हमें भी चाहिए कि हम काफिरों और मुनाफिकों के दबाव में आकर अपने दीन में कोई समझौता न करें, बल्कि कुरआन को अपना नारा बनाएँ और उसके साथ सब्र और स्थिरता के साथ जिहाद करते रहें।
याद रखिए — यह जिहाद बड़ा है, कठिन है, लेकिन इसी में इज़्ज़त और कामयाबी है। जो लोग कुरआन को थाम लेते हैं और उसके साथ जुड़ जाते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में सरबुलंद करता है। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है और हमारे दिलों को सुकून देता है।
📜 आयत 50-54 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 52
सूरा अल-फुरकान आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तो ऐ रसूल) तुम काफिरों की इताअत न करना और…सूरा आयत 52/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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