अल-फुरकान · 53/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
۞ وَهُوَ الَّذِي مَرَجَ الْبَحْرَيْنِ هَٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ وَهَٰذَا مِلْحٌ أُجَاجٌ وَجَعَلَ بَيْنَهُمَا بَرْزَخًا وَحِجْرًا مَّحْجُورًا ۝٥٣
Wa Huwal lazee marajal bahraini haazaa `azbun furaatunw wa haazaa milhun ujaaj; wa ja`ala bainahumaa barzakhanw wa hijram mahjooraa
📖 हिंदी अर्थ
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने दरयाओं को आपस में मिला दिया (और बावजूद कि) ये खालिस मज़ेदार मीठा है और ये बिल्कुल खारी कड़वा (मगर दोनों को मिलाया) और दोनों के दरमियान एक आड़ और मज़बूत ओट बना दी है (कि गड़बड़ न हो)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَرَجَ: मिलाया, छोड़ा, बहने दिया।
  • عَذْبٌ فُرَاتٌ: अत्यंत मीठा और प्यास बुझाने वाला।
  • مِلْحٌ أُجَاجٌ: अत्यंत खारा और कड़वा।
  • بَرْزَخًا: आड़, रुकावट, सीमा।
  • حِجْرًا مَحْجُورًا: सख्त रोक और पक्की सुरक्षा।

तफसीर:

अल्लाह तआला अपनी कुदरत के अज़ीम नमूनों में से एक नमूना बयान कर रहा है। वही वह ज़ात है जिसने दो समुद्रों को आपस में मिलाया और उन्हें एक दूसरे के सामने बहने दिया — एक है मीठा और प्यास बुझाने वाला, दूसरा है खारा और कड़वा। ये दोनों समुद्र एक ही जगह मिलते हैं, लेकिन अल्लाह ने अपनी कुदरत से उनके बीच एक ऐसा पर्दा और मज़बूत रुकावट बना दी है जो उन्हें आपस में मिलने से रोकती है। न मीठा पानी खारे में मिलकर खारा होता है, न खारा पानी मीठे में मिलकर उसे खराब करता है। यह अल्लाह की अपार शक्ति का चमत्कार है कि वह दो विपरीत चीज़ों को एक साथ रखता है, फिर भी उनके बीच एक अदृश्य दीवार क़ायम रहती है।

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जिस अल्लाह ने समुद्रों के बीच ऐसा अद्भुत बंधन और सीमा बनाई है, वही अल्लाह हमारे जीवन के हर मामले में हिकमत और निज़ाम रखता है। जिस तरह उसने पानी के दो भिन्न प्रकारों को एक साथ रखकर भी अलग रखा है, उसी तरह वह हक़ और बातिल, नेकी और गुनाह के बीच भी फ़र्क़ रखता है और अपने बंदों को सही रास्ता दिखाता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की हर मख़लूक़ में एक गहरी हिकमत छिपी है। जब हम समुद्रों के इस निज़ाम को देखते हैं, तो हमारा ईमान और मज़बूत होता है कि यह कारख़ाना अपने आप नहीं बना, बल्कि एक क़ादिर-ए-मुतलक़ (सर्वशक्तिमान) ने इसे बनाया है। यही अल्लाह उस दिन भी हमें ज़िंदा करेगा और हमारे अच्छे-बुरे आमाल का हिसाब लेगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की नेअमतों पर शुक्र करें, उसकी कुदरत पर ग़ौर करें और अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्मों के मुताबिक़ ढालें। यही कामयाबी की राह है और यही अल्लाह की रहमत का तक़ाज़ा है।



📜 आयत 51-55 — सूरा अल-फुरकान

51وَلَوْ شِئْنَا لَبَعَثْنَا فِي كُلِّ قَرْيَةٍ نَّذِيرًا
और अगर हम चाहते तो हर बस्ती में ज़रुर एक (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाला पैग़म्बर भेजते
52فَلَا تُطِعِ الْكَافِرِينَ وَجَاهِدْهُم بِهِ جِهَادًا كَبِيرًا
(तो ऐ रसूल) तुम काफिरों की इताअत न करना और उनसे कुरान के (दलाएल) से खूब लड़ों
53۞ وَهُوَ الَّذِي مَرَجَ الْبَحْرَيْنِ هَٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ وَهَٰذَا مِلْحٌ أُجَاجٌ وَجَعَلَ بَيْنَهُمَا بَرْزَخًا وَحِجْرًا مَّحْجُورًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने दरयाओं को आपस में मिला दिया (और बावजूद कि) ये खालिस मज़ेदार मीठा है और ये बिल्कुल खारी कड़वा (मगर दोनों को मिलाया) और दोनों के दरमियान एक आड़ और मज़बूत ओट बना दी है (कि गड़बड़ न हो)
54وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ مِنَ الْمَاءِ بَشَرًا فَجَعَلَهُ نَسَبًا وَصِهْرًا ۗ وَكَانَ رَبُّكَ قَدِيرًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने पानी (मनी) से आदमी को पैदा किया फिर उसको ख़ानदान और सुसराल वाला बनाया और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार हर चीज़ पर क़ादिर है
55وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُهُمْ وَلَا يَضُرُّهُمْ ۗ وَكَانَ الْكَافِرُ عَلَىٰ رَبِّهِ ظَهِيرًا
और लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) ख़ुदा को छोड़कर उस चीज़ की परसतिश करते हैं जो न उन्हें नफा ही दे सकती है और न नुक़सान ही पहुँचा सकती है और काफिर (अबूजहल) तो हर वक्त अपने परवरदिगार की मुख़ालेफत पर ज़ोर लगाए हुए है
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
53आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 53

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Thursday, October 1, 2026

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