अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَبَعَثْنَا: हम भेजते
- نَذِيرًا: डराने वाला (जो अल्लाह के अज़ाब से सावधान करे)
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए फ़रमाता है कि अगर हम चाहते तो हर बस्ती में एक अलग नबी भेज देते, जो उस बस्ती के लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराता और उन्हें सीधे रास्ते की दावत देता। लेकिन अल्लाह ने ऐसा नहीं किया, बल्कि उसने आप ﷺ को पूरी दुनिया की तरफ रसूल बनाकर भेजा। यह आप ﷺ की बड़ी फज़ीलत है और आपकी ज़िम्मेदारी भी बहुत बड़ी है।
अल्लाह ने आप ﷺ को सभी इंसानों की हिदायत के लिए चुना, ताकि आप पूरी दुनिया को क़ुरआन का पैग़ाम पहुँचाएँ। यह आपके लिए एक बड़ा शरफ़ है, लेकिन साथ ही एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी। इसलिए अल्लाह आपको हिदायत देता है कि काफ़िरों की बातों में न आएँ और न ही उनके दबाव में आकर पैग़ाम पहुँचाने में कोई कमी करें। बल्कि पूरी ताक़त और लगन से क़ुरआन के ज़रिए उनसे जिहाद करें — यानी उनके बातिल ख़्यालात और झूठे नज़रियों के मुक़ाबले में क़ुरआन की हक़ीक़त को पेश करें, और यह जिहाद ऐसा हो जिसमें कोई कसर बाक़ी न रहे।
इस आयत में एक और नुक्ता है कि अल्लाह ने आप ﷺ को पूरी दुनिया का रसूल बनाकर आपका दर्जा बुलंद किया और आपके अज्र को बहुत बड़ा किया। अगर हर बस्ती में अलग नबी होता तो आपकी ज़िम्मेदारी सिर्फ एक बस्ती तक सीमित होती, लेकिन अल्लाह ने आपको सबका रसूल बनाकर आपको सबसे अफज़ल बना दिया।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जब अल्लाह किसी को कोई ज़िम्मेदारी देता है, तो उसे पूरे हौसले और लगन से उसे अंजाम देना चाहिए। और जो लोग अल्लाह के दीन की खिदमत करते हैं, अल्लाह उनके दर्जे बुलंद करता है और उनके अज्र में इज़ाफा करता है। हमें भी चाहिए कि अपनी जगह से दीन की दावत का काम करें, चाहे हमारी गुंजाइश कितनी ही क्यों न हो — क्योंकि अल्लाह के दीन की खिदमत का हर काम बहुत बड़ा है और अल्लाह के यहाँ उसका अज्र ज़रूर मिलेगा।
📜 आयत 49-53 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 51
सूरा अल-फुरकान आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर हम चाहते तो हर बस्ती में ज़रुर एक…सूरा आयत 51/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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