अल-फुरकान · 51/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
وَلَوْ شِئْنَا لَبَعَثْنَا فِي كُلِّ قَرْيَةٍ نَّذِيرًا ۝٥١
Wa law shi`naa laba`asnaa fee kulli qar yatin nazeeraa
📖 हिंदी अर्थ
और अगर हम चाहते तो हर बस्ती में ज़रुर एक (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाला पैग़म्बर भेजते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَبَعَثْنَا: हम भेजते
  • نَذِيرًا: डराने वाला (जो अल्लाह के अज़ाब से सावधान करे)

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए फ़रमाता है कि अगर हम चाहते तो हर बस्ती में एक अलग नबी भेज देते, जो उस बस्ती के लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराता और उन्हें सीधे रास्ते की दावत देता। लेकिन अल्लाह ने ऐसा नहीं किया, बल्कि उसने आप ﷺ को पूरी दुनिया की तरफ रसूल बनाकर भेजा। यह आप ﷺ की बड़ी फज़ीलत है और आपकी ज़िम्मेदारी भी बहुत बड़ी है।

अल्लाह ने आप ﷺ को सभी इंसानों की हिदायत के लिए चुना, ताकि आप पूरी दुनिया को क़ुरआन का पैग़ाम पहुँचाएँ। यह आपके लिए एक बड़ा शरफ़ है, लेकिन साथ ही एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी। इसलिए अल्लाह आपको हिदायत देता है कि काफ़िरों की बातों में न आएँ और न ही उनके दबाव में आकर पैग़ाम पहुँचाने में कोई कमी करें। बल्कि पूरी ताक़त और लगन से क़ुरआन के ज़रिए उनसे जिहाद करें — यानी उनके बातिल ख़्यालात और झूठे नज़रियों के मुक़ाबले में क़ुरआन की हक़ीक़त को पेश करें, और यह जिहाद ऐसा हो जिसमें कोई कसर बाक़ी न रहे।

इस आयत में एक और नुक्ता है कि अल्लाह ने आप ﷺ को पूरी दुनिया का रसूल बनाकर आपका दर्जा बुलंद किया और आपके अज्र को बहुत बड़ा किया। अगर हर बस्ती में अलग नबी होता तो आपकी ज़िम्मेदारी सिर्फ एक बस्ती तक सीमित होती, लेकिन अल्लाह ने आपको सबका रसूल बनाकर आपको सबसे अफज़ल बना दिया।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जब अल्लाह किसी को कोई ज़िम्मेदारी देता है, तो उसे पूरे हौसले और लगन से उसे अंजाम देना चाहिए। और जो लोग अल्लाह के दीन की खिदमत करते हैं, अल्लाह उनके दर्जे बुलंद करता है और उनके अज्र में इज़ाफा करता है। हमें भी चाहिए कि अपनी जगह से दीन की दावत का काम करें, चाहे हमारी गुंजाइश कितनी ही क्यों न हो — क्योंकि अल्लाह के दीन की खिदमत का हर काम बहुत बड़ा है और अल्लाह के यहाँ उसका अज्र ज़रूर मिलेगा।



📜 आयत 49-53 — अल-फुरकान

49لِّنُحْيِيَ بِهِ بَلْدَةً مَّيْتًا وَنُسْقِيَهُ مِمَّا خَلَقْنَا أَنْعَامًا وَأَنَاسِيَّ كَثِيرًا
ताकि हम उसके ज़रिए से मुर्दा (वीरान) शहर को ज़िन्दा (आबाद) कर दें और अपनी मख़लूकात में से चौपायों और बहुत से आदमियों को उससे सेराब करें
50وَلَقَدْ صَرَّفْنَاهُ بَيْنَهُمْ لِيَذَّكَّرُوا فَأَبَىٰ أَكْثَرُ النَّاسِ إِلَّا كُفُورًا
और हमने पानी को उनके दरमियान (तरह तरह से) तक़सीम किया ताकि लोग नसीहत हासिल करें मगर अक्सर लोगों ने नाशुक्री के सिवा कुछ न माना
51وَلَوْ شِئْنَا لَبَعَثْنَا فِي كُلِّ قَرْيَةٍ نَّذِيرًا
और अगर हम चाहते तो हर बस्ती में ज़रुर एक (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाला पैग़म्बर भेजते
52فَلَا تُطِعِ الْكَافِرِينَ وَجَاهِدْهُم بِهِ جِهَادًا كَبِيرًا
(तो ऐ रसूल) तुम काफिरों की इताअत न करना और उनसे कुरान के (दलाएल) से खूब लड़ों
53۞ وَهُوَ الَّذِي مَرَجَ الْبَحْرَيْنِ هَٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ وَهَٰذَا مِلْحٌ أُجَاجٌ وَجَعَلَ بَيْنَهُمَا بَرْزَخًا وَحِجْرًا مَّحْجُورًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने दरयाओं को आपस में मिला दिया (और बावजूद कि) ये खालिस मज़ेदार मीठा है और ये बिल्कुल खारी कड़वा (मगर दोनों को मिलाया) और दोनों के दरमियान एक आड़ और मज़बूत ओट बना दी है (कि गड़बड़ न हो)
अल-फुरकानकुरान सूची
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अनुवाद — अल-फुरकान 51

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Tuesday, August 18, 2026

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