अल-क़सस · 50/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
فَإِن لَّمْ يَسْتَجِيبُوا لَكَ فَاعْلَمْ أَنَّمَا يَتَّبِعُونَ أَهْوَاءَهُمْ ۚ وَمَنْ أَضَلُّ مِمَّنِ اتَّبَعَ هَوَاهُ بِغَيْرِ هُدًى مِّنَ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ ۝٥٠
Fa il lam yastajeeboo laka fa`lam annamaa yattabi`oona ahwaaa`ahum; w aman adallu mimmanit taba`a hawaahu bighari hudam minal laah; innal laaha laa yahdil qawmaz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
कि मै भी उस पर चलँ फिर अगर ये लोग (इस पर भी) न मानें तो समझ लो कि ये लोग बस अपनी हवा व हवस की पैरवी करते है और जो शख्स ख़ुदा की हिदायत को छोड़ कर अपनी हवा व हवस की पैरवी करते है उससे ज्यादा गुमराह कौन होगा बेशक ख़ुदा सरकश लोगों को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَجِيبُوا – वे उत्तर दें, वे स्वीकार करें
  • أَهْوَاءَهُمْ – अपनी इच्छाओं और मनमानी की ख्वाहिशों को
  • هُدًى – मार्गदर्शन, सीधा रास्ता
  • الظَّالِمِينَ – अत्याचारी, जो अपनी सीमाओं का उल्लंघन करते हैं

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अगर ये लोग आपकी बात का जवाब न दें और आपके द्वारा पेश किए गए सच्चे धर्म को कबूल न करें, और न ही वे कोई ऐसी किताब ला सकें जो तौरात और क़ुरआन से बेहतर हो, तो आप यक़ीन कर लीजिए कि उनका इनकार किसी दलील या सबूत पर आधारित नहीं है। उनके पास कोई तर्क नहीं, बल्कि वे सिर्फ अपनी नफ़्सियानी ख्वाहिशों और मनमानी इच्छाओं के पीछे चल रहे हैं। उन्होंने हक़ को इसलिए नहीं ठुकराया कि उन्हें कोई शुबहा (संदेह) है, बल्कि इसलिए ठुकराया कि उनकी इच्छाएँ और अहंकार उन्हें सच्चाई कबूल करने से रोक रहा है।

और उस शख्स से बड़ा गुमराह और कौन होगा जो अल्लाह की तरफ से आए मार्गदर्शन को छोड़कर सिर्फ अपनी इच्छाओं का पीछा करे? कोई भी इंसान उससे ज्यादा गुमराह नहीं हो सकता जो अल्लाह के हुदा (मार्गदर्शन) को छोड़कर अपनी नफ्स की पैरवी करे। क्योंकि इंसान की इच्छाएँ उसे अंधा बना देती हैं, वह हक़ और बातिल में फर्क नहीं कर पाता। वह अपनी ख्वाहिश को ही अपना देवता बना लेता है और उसी के पीछे भागता है।

यक़ीनन अल्लाह तआला उन ज़ालिमों को हिदायत नहीं देता जो अपनी ज़िद और सरकशी की वजह से हक़ को दबाने की कोशिश करते हैं। जो लोग अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं और अपनी हदों से आगे बढ़ जाते हैं, उनके दिलों पर मुहर लग जाती है और वे सीधे रास्ते को कभी नहीं पा सकते।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है कि इंसान की सबसे बड़ी दुश्मन उसकी अपनी नफ्स और उसकी ख्वाहिशें हैं। जब इंसान अपनी इच्छाओं को अल्लाह की हिदायत पर तरजीह देता है, तो वह गुमराही के सबसे गहरे गड्ढे में गिर जाता है। लेकिन जो शख्स अल्लाह की किताब और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत को अपना रहनुमा बनाता है, उसकी ज़िंदगी में बरकत आती है, उसका दिल सुकून पाता है और उसे दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई नसीब होती है।

आओ हम अपनी ख्वाहिशों को अल्लाह की रज़ा के ताबे करें, क्योंकि यही कामयाबी की कुंजी है। अल्लाह हमें हक़ की पैरवी करने और अपनी नफ्स की गुलामी से बचने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।



📜 आयत 48-52 — अल-क़सस

48فَلَمَّا جَاءَهُمُ الْحَقُّ مِنْ عِندِنَا قَالُوا لَوْلَا أُوتِيَ مِثْلَ مَا أُوتِيَ مُوسَىٰ ۚ أَوَلَمْ يَكْفُرُوا بِمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ مِن قَبْلُ ۖ قَالُوا سِحْرَانِ تَظَاهَرَا وَقَالُوا إِنَّا بِكُلٍّ كَافِرُونَ
मगर फिर जब हमारी बारगाह से (दीन) हक़ उनके पास पहुँचा तो कहने लगे जैसे (मौजिज़े) मूसा को अता हुए थे वैसे ही इस रसूल (मोहम्मद) को क्यों नही दिए गए क्या जो मौजिज़े इससे पहले मूसा को अता हुए थे उनसे इन लोगों ने इन्कार न किया था कुफ्फ़ार तो ये भी कह गुज़रे कि ये दोनों के दोनों (तौरैत व कुरान) जादू हैं कि बाहम एक दूसरे के मददगार हो गए हैं
49قُلْ فَأْتُوا بِكِتَابٍ مِّنْ عِندِ اللَّهِ هُوَ أَهْدَىٰ مِنْهُمَا أَتَّبِعْهُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और ये भी कह चुके कि हम एब के मुन्किर हैं (ऐ रसूल) तुम (इन लोगों से) कह दो कि अगर सच्चे हो तो ख़ुदा की तरफ से एक ऐसी किताब जो इन दोनों से हिदायत में बेहतर हो ले आओ
50فَإِن لَّمْ يَسْتَجِيبُوا لَكَ فَاعْلَمْ أَنَّمَا يَتَّبِعُونَ أَهْوَاءَهُمْ ۚ وَمَنْ أَضَلُّ مِمَّنِ اتَّبَعَ هَوَاهُ بِغَيْرِ هُدًى مِّنَ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
कि मै भी उस पर चलँ फिर अगर ये लोग (इस पर भी) न मानें तो समझ लो कि ये लोग बस अपनी हवा व हवस की पैरवी करते है और जो शख्स ख़ुदा की हिदायत को छोड़ कर अपनी हवा व हवस की पैरवी करते है उससे ज्यादा गुमराह कौन होगा बेशक ख़ुदा सरकश लोगों को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
51۞ وَلَقَدْ وَصَّلْنَا لَهُمُ الْقَوْلَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और हम यक़ीनन लगातार (अपने एहकाम भेजकर) उनकी नसीहत करते रहे ताकि वह लोग नसीहत हासिल करें
52الَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ مِن قَبْلِهِ هُم بِهِ يُؤْمِنُونَ
जिन लोगों को हमने इससे पहले किताब अता की है वह उस (क़ुरान) पर ईमान लाते हैं
अल-क़ससकुरान सूची
88आयत
मक्कीRevelation
50आयत

अनुवाद — अल-क़सस 50

सूरा अल-क़सस आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि मै भी उस पर चलँ फिर अगर ये लोग…

सूरा आयत 50/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए