Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَسْتَجِيبُوا – वे उत्तर दें, वे स्वीकार करें
- أَهْوَاءَهُمْ – अपनी इच्छाओं और मनमानी की ख्वाहिशों को
- هُدًى – मार्गदर्शन, सीधा रास्ता
- الظَّالِمِينَ – अत्याचारी, जो अपनी सीमाओं का उल्लंघन करते हैं
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अगर ये लोग आपकी बात का जवाब न दें और आपके द्वारा पेश किए गए सच्चे धर्म को कबूल न करें, और न ही वे कोई ऐसी किताब ला सकें जो तौरात और क़ुरआन से बेहतर हो, तो आप यक़ीन कर लीजिए कि उनका इनकार किसी दलील या सबूत पर आधारित नहीं है। उनके पास कोई तर्क नहीं, बल्कि वे सिर्फ अपनी नफ़्सियानी ख्वाहिशों और मनमानी इच्छाओं के पीछे चल रहे हैं। उन्होंने हक़ को इसलिए नहीं ठुकराया कि उन्हें कोई शुबहा (संदेह) है, बल्कि इसलिए ठुकराया कि उनकी इच्छाएँ और अहंकार उन्हें सच्चाई कबूल करने से रोक रहा है।
और उस शख्स से बड़ा गुमराह और कौन होगा जो अल्लाह की तरफ से आए मार्गदर्शन को छोड़कर सिर्फ अपनी इच्छाओं का पीछा करे? कोई भी इंसान उससे ज्यादा गुमराह नहीं हो सकता जो अल्लाह के हुदा (मार्गदर्शन) को छोड़कर अपनी नफ्स की पैरवी करे। क्योंकि इंसान की इच्छाएँ उसे अंधा बना देती हैं, वह हक़ और बातिल में फर्क नहीं कर पाता। वह अपनी ख्वाहिश को ही अपना देवता बना लेता है और उसी के पीछे भागता है।
यक़ीनन अल्लाह तआला उन ज़ालिमों को हिदायत नहीं देता जो अपनी ज़िद और सरकशी की वजह से हक़ को दबाने की कोशिश करते हैं। जो लोग अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं और अपनी हदों से आगे बढ़ जाते हैं, उनके दिलों पर मुहर लग जाती है और वे सीधे रास्ते को कभी नहीं पा सकते।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है कि इंसान की सबसे बड़ी दुश्मन उसकी अपनी नफ्स और उसकी ख्वाहिशें हैं। जब इंसान अपनी इच्छाओं को अल्लाह की हिदायत पर तरजीह देता है, तो वह गुमराही के सबसे गहरे गड्ढे में गिर जाता है। लेकिन जो शख्स अल्लाह की किताब और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत को अपना रहनुमा बनाता है, उसकी ज़िंदगी में बरकत आती है, उसका दिल सुकून पाता है और उसे दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई नसीब होती है।
आओ हम अपनी ख्वाहिशों को अल्लाह की रज़ा के ताबे करें, क्योंकि यही कामयाबी की कुंजी है। अल्लाह हमें हक़ की पैरवी करने और अपनी नफ्स की गुलामी से बचने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।
📜 आयत 48-52 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 50
सूरा अल-क़सस आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि मै भी उस पर चलँ फिर अगर ये लोग…सूरा आयत 50/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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