अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْحَقّ (अल-हक़्क़): सत्य, जिसका अस्तित्व स्वयं में स्थिर हो और जो कभी समाप्त न हो।
- الْبَاطِل (अल-बातिल): असत्य, झूठ, जिसका कोई वास्तविक आधार न हो और जो मिथ्या हो।
- الْعَلِيّ (अल-अली): सर्वोच्च, जो अपनी ज़ात, अपनी क़ुदरत और अपने दबदबे में सबसे ऊपर हो।
- الْكَبِير (अल-कबीर): महान, जो हर चीज़ से बड़ा हो और जिसके समक्ष सब कुछ छोटा हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन महान सत्यों को स्पष्ट करती है जो ब्रह्मांड की हर रचना में झलकते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह सब कुछ — यानी जो नियम, व्यवस्था और प्रबंधन तुम देख रहे हो — इसलिए है ताकि तुम जान लो कि अल्लाह ही सच्चा सत्य है। वह अपनी ज़ात (अस्तित्व), अपने गुणों और अपने कार्यों में पूर्ण सत्य है। उसके सिवा जो कुछ भी है, वह मिथ्या और असत्य है। जिन्हें लोग अल्लाह के सिवा पुकारते हैं — चाहे वे मूर्तियाँ हों, देवता हों या कोई और — वे सब बातिल हैं, उनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं जो पूजा के योग्य हो। वे न कुछ दे सकते हैं, न कुछ छीन सकते हैं, न किसी की सहायता कर सकते हैं।
फिर अल्लाह तआला अपनी दो महान विशेषताओं का वर्णन करता है: वह अल-अली (सर्वोच्च) है — अपनी ज़ात में, अपनी क़ुदरत में और अपने दबदबे में वह सभी मख़लूक़ात (प्राणियों) से ऊपर है। उसके समक्ष हर चीज़ झुकी हुई है, हर चीज़ उसकी अधीनता स्वीकार करती है। और वह अल-कबीर (महान) है — हर चीज़ से बड़ा, जिसके सामने सारी कायनात छोटी है। उसकी महानता का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता, और उसकी बड़ाई का कोई अंत नहीं। वह इससे पाक है कि उसका कोई साझीदार हो, क्योंकि जो सच्चा सत्य है और सर्वोच्च महान है, उसके लिए कोई शरीक (साझीदार) होना असंभव है।
इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी शिक्षा है — कि हम केवल अल्लाह की इबादत करें, उसी से मदद माँगें, और उसी पर भरोसा रखें। जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह ही सत्य है और उसके सिवा सब कुछ मिथ्या है, तो हमारा दिल किसी और की ओर नहीं झुकेगा। हमारी नमाज़, हमारी दुआ, हमारी उम्मीदें — सब कुछ उसी की तरफ़ हो जाएँगी। यही वह चीज़ है जो हमें सच्ची शांति और सुकून देती है। जो व्यक्ति अल्लाह को पहचान लेता है, उसका जीवन उद्देश्यपूर्ण हो जाता है, और वह हर मुश्किल में यह जानकर सब्र करता है कि अल्लाह सबसे बड़ा है, सबसे ऊपर है, और वही हर चीज़ पर क़ादिर है।
📜 आयत 28-32 — लुकमान
अनुवाद — लुकमान 30
सूरा लुकमान आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये (सब बातें) इस सबब से हैं कि ख़ुदा ही…सूरा आयत 30/34 — लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: लुकमान सुनें, लुकमान अनुवाद, लुकमान mp3, लुकमान pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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