अल-अहज़ाब · 26/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
وَأَنزَلَ الَّذِينَ ظَاهَرُوهُم مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ مِن صَيَاصِيهِمْ وَقَذَفَ فِي قُلُوبِهِمُ الرُّعْبَ فَرِيقًا تَقْتُلُونَ وَتَأْسِرُونَ فَرِيقًا ۝٢٦
Wa anzalal lazeena zaaha roohum min Ahlil Kitaabi min sa yaaseehim wa qazafa fee quloobihimm mur ru`ba freeqan taqtuloona wa taasiroona fareeqaaa
📖 हिंदी अर्थ
और अहले किताब में से जिन लोगों (बनी कुरैज़ा) ने उन (कुफ्फार) की मदद की थी खुदा उनको उनके क़िलों से (बेदख़ल करके) नीचे उतार लाया और उनके दिलों में (तुम्हारा) ऐसा रोब बैठा दिया कि तुम उनके कुछ लोगों को क़त्ल करने लगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظَاهَرُوهُم (ज़ाहरूहुम): उनकी मदद की, उनका साथ दिया।
  • صَيَاصِيهِمْ (सयासीहिम): उनके किले, दुर्ग और मज़बूत क़िलेबंदियाँ।
  • قَذَفَ (क़ज़फ़): डाल दिया, फेंक दिया।
  • الرُّعْبَ (रु'ब): भय, खौफ़, दहशत।
  • تَأْسِرُونَ (ता'सिरून): क़ैद करते हो, बंदी बनाते हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ और मोमिनीन पर की गई अपनी महान कृपा का ज़िक्र करते हुए बताया कि जब अहज़ाब (क़ुरैश, ग़तफ़ान और उनके साथी) मदीना पर चढ़ाई करने आए, तो मदीना के यहूदियों में से बनी क़ुरैज़ा ने उनका साथ दिया और मुसलमानों के ख़िलाफ़ उनकी मदद की। यह उस वक़्त की बात है जब मुसलमान खंदक़ (खाई) में घिरे हुए थे और दुश्मनों ने उन्हें चारों तरफ से घेर रखा था।

अल्लाह तआला ने अपनी क़ुदरत से बनी क़ुरैज़ा के उन गद्दारों को उनके मज़बूत किलों से नीचे उतार दिया, जिनकी दीवारें और बुर्ज उन्हें बड़े से बड़े दुश्मन से बचा सकते थे। अल्लाह ने उनके दिलों में ऐसा खौफ़ और दहशत डाल दिया कि उनकी सारी ताक़त और हिम्मत जवाब दे गई। वे अपने किलों में रहते हुए भी इतने भयभीत हो गए कि उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए कोई रास्ता नहीं देखा और मुसलमानों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

फिर अल्लाह ने मोमिनीन को उन पर पूरी तरह से ग़ालिब कर दिया। उनमें से एक गिरोह (जंग में हिस्सा लेने वाले पुरुष) को तुमने क़त्ल किया, और दूसरे गिरोह (औरतों और बच्चों) को तुमने क़ैद कर लिया। यह अल्लाह की तरफ से मुसलमानों के लिए एक बड़ी फ़तह और नुसरत थी, जो उनके सब्र और अल्लाह पर भरोसे की बदौलत मिली।


दावती पहलू (प्रेरक पहलू):

यह आयत मोमिनीन के लिए एक जीती-जागती निशानी है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की मदद कैसे करता है। जब मुसलमानों की तादाद कम थी, हथियार कम थे, और दुश्मन चारों तरफ से घेरे हुए थे, तब अल्लाह ने अपनी ग़ैबी मदद से उन्हें फ़तह अता की। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम चाहे कितनी भी मुश्किल हालात में हों, अगर हम अल्लाह पर भरोसा रखें और उसके दीन की मदद करें, तो अल्लाह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह ऐसे रास्तों से मदद भेजता है जिनका हमें अंदाज़ा भी नहीं होता। यही इस्लाम की ताक़त है — कि फ़तह अल्लाह ही के हाथ में है, और वह अपने मोमिन बंदों को कभी ज़लील नहीं करता।

🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — अल-अहज़ाब

24لِّيَجْزِيَ اللَّهُ الصَّادِقِينَ بِصِدْقِهِمْ وَيُعَذِّبَ الْمُنَافِقِينَ إِن شَاءَ أَوْ يَتُوبَ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ غَفُورًا رَّحِيمًا
ये इम्तेहान इसलिए था ताकि खुद सच्चे (ईमानदारों) को उनकी सच्चाई की जज़ाए ख़ैर दे और अगर चाहे तो मुनाफेक़ीन की सज़ा करे या (अगर वह लागे तौबा करें तो) खुदा उनकी तौबा कुबूल फरमाए इसमें शक नहीं कि खुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
25وَرَدَّ اللَّهُ الَّذِينَ كَفَرُوا بِغَيْظِهِمْ لَمْ يَنَالُوا خَيْرًا ۚ وَكَفَى اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ الْقِتَالَ ۚ وَكَانَ اللَّهُ قَوِيًّا عَزِيزًا
और खुदा ने (अपनी कुदरत से) क़ाफिरों को मदीने से फेर दिया (और वह लोग) अपनी झुंझलाहट में (फिर गए) और इन्हें कुछ फायदे भी न हुआ और खुदा ने (अपनी मेहरबानी से) मोमिनीन को लड़ने की नौबत न आने दी और खुदा तो (बड़ा) ज़बरदस्त (और) ग़ालिब हैं
26وَأَنزَلَ الَّذِينَ ظَاهَرُوهُم مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ مِن صَيَاصِيهِمْ وَقَذَفَ فِي قُلُوبِهِمُ الرُّعْبَ فَرِيقًا تَقْتُلُونَ وَتَأْسِرُونَ فَرِيقًا
और अहले किताब में से जिन लोगों (बनी कुरैज़ा) ने उन (कुफ्फार) की मदद की थी खुदा उनको उनके क़िलों से (बेदख़ल करके) नीचे उतार लाया और उनके दिलों में (तुम्हारा) ऐसा रोब बैठा दिया कि तुम उनके कुछ लोगों को क़त्ल करने लगे
27وَأَوْرَثَكُمْ أَرْضَهُمْ وَدِيَارَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ وَأَرْضًا لَّمْ تَطَئُوهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا
और कुछ को क़ैदी (और गुलाम) बनाने और तुम ही लोगों को उनकी ज़मीन और उनके घर और उनके माल और उस ज़मीन (खैबर) का खुदा ने मालिक बना दिया जिसमें तुमने क़दम तक नहीं रखा था और खुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर वतवाना है
28يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ إِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا فَتَعَالَيْنَ أُمَتِّعْكُنَّ وَأُسَرِّحْكُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا
ऐ रसूल अपनी बीवियों से कह दो कि अगर तुम (फक़त) दुनियावी ज़िन्दगी और उसकी आराइश व ज़ीनत की ख्वाहॉ हो तो उधर आओ मैं तुम लोगों को कुछ साज़ो सामान दे दूँ और उनवाने शाइस्ता से रूख़सत कर दूँ
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 26

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Tuesday, August 18, 2026

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