Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَوْرَثَكُمْ: उसने तुम्हें वारिस बनाया, यानी उनकी चीज़ों का मालिक बना दिया।
- أَرْضَهُمْ: उनकी ज़मीनें (खेत, बाग़ात)।
- دِيَارَهُمْ: उनके घर और बस्तियाँ।
- أَمْوَالَهُمْ: उनके माल, जैसे हथियार, जानवर, सोना-चाँदी आदि।
- لَمْ تَطَئُوهَا: जिसे तुमने अभी तक (पैरों से) नहीं रौंदा, यानी जिस पर तुमने क़ब्ज़ा नहीं किया।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ और मोमिनीन पर यह बड़ा एहसान फ़रमाया कि उन दुश्मनों (बनी क़ुरैज़ा) को हलाक करने के बाद उनकी सारी ज़मीनें, घर, खेत, बाग़ात, हथियार, जानवर और हर क़िस्म का माल तुम्हें वारिसाना (विरासत) के तौर पर अता कर दिया। यह सिर्फ़ उनकी मिल्कियत नहीं थी, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से मोमिनीन के लिए एक इनाम और इज़्ज़त थी, क्योंकि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का साथ दिया और जिहाद में अपनी जानें खतरे में डालीं।
इसके अलावा, अल्लाह ने उन्हें एक और ज़मीन का वादा दिया जिसे उन्होंने अभी तक नहीं देखा था और न ही उस पर क़दम रखा था — यह ख़ैबर की ज़मीन थी, और आगे चलकर क़यामत तक जितनी भी ज़मीनें मुसलमान फ़तह करेंगे, वह सब इसी वादे में शामिल है। यह एक ग़ैबी ख़बर और मोमिनीन के लिए खुशख़बरी थी कि अल्लाह उन्हें दुनिया में ग़लबा (प्रभुत्व) अता करेगा।
और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखता है — वह जिसे चाहता है इज़्ज़त देता है, जिसे चाहता है ज़लील करता है, और उसकी ताक़त के आगे कोई चीज़ मुश्किल नहीं। यह आयत मोमिनीन के दिलों में अल्लाह पर भरोसा और उसकी मदद की उम्मीद पैदा करती है, और सिखाती है कि जब तुम अल्लाह के दीन की नुसरत करोगे, तो अल्लाह तुम्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी अता करेगा।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने सच्चे बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। जब मुसलमान अल्लाह के रास्ते में मुश्किलों का सामना करते हैं, तो अल्लाह उन्हें उसका बदला देता है और उनके दुश्मनों की ज़मीन, माल और इज़्ज़त उन्हें सौंप देता है। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह पर भरोसा रखें, उसके दीन पर साबित क़दम रहें, और यक़ीन रखें कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी — चाहे वह देर से ही क्यों न आए। अल्लाह की क़ुदरत की कोई हद नहीं, और वह हर मुश्किल को आसान करने पर पूरी तरह क़ादिर है।
📜 आयत 25-29 — सूरा अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 27
सूरा अल-अहज़ाब आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कुछ को क़ैदी (और गुलाम) बनाने और तुम ही…सूरा आयत 27/73 — सूरा अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अहज़ाब सुनें, सूरा अल-अहज़ाब अनुवाद, सूरा अल-अहज़ाब mp3, सूरा अल-अहज़ाब pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अहज़ाब
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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