अल-अहज़ाब · 27/73
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहज़ाब
وَأَوْرَثَكُمْ أَرْضَهُمْ وَدِيَارَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ وَأَرْضًا لَّمْ تَطَئُوهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا ۝٢٧
Wa awrasakum ardahum wa diyaarahum wa amwaalahum wa ardal lam tata`oohaa; wa kaanal laahu `alaa kulli shai`in Qadeeraa
📖 हिंदी अर्थ
और कुछ को क़ैदी (और गुलाम) बनाने और तुम ही लोगों को उनकी ज़मीन और उनके घर और उनके माल और उस ज़मीन (खैबर) का खुदा ने मालिक बना दिया जिसमें तुमने क़दम तक नहीं रखा था और खुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर वतवाना है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوْرَثَكُمْ: उसने तुम्हें वारिस बनाया, यानी उनकी चीज़ों का मालिक बना दिया।
  • أَرْضَهُمْ: उनकी ज़मीनें (खेत, बाग़ात)।
  • دِيَارَهُمْ: उनके घर और बस्तियाँ।
  • أَمْوَالَهُمْ: उनके माल, जैसे हथियार, जानवर, सोना-चाँदी आदि।
  • لَمْ تَطَئُوهَا: जिसे तुमने अभी तक (पैरों से) नहीं रौंदा, यानी जिस पर तुमने क़ब्ज़ा नहीं किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ और मोमिनीन पर यह बड़ा एहसान फ़रमाया कि उन दुश्मनों (बनी क़ुरैज़ा) को हलाक करने के बाद उनकी सारी ज़मीनें, घर, खेत, बाग़ात, हथियार, जानवर और हर क़िस्म का माल तुम्हें वारिसाना (विरासत) के तौर पर अता कर दिया। यह सिर्फ़ उनकी मिल्कियत नहीं थी, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से मोमिनीन के लिए एक इनाम और इज़्ज़त थी, क्योंकि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का साथ दिया और जिहाद में अपनी जानें खतरे में डालीं।

इसके अलावा, अल्लाह ने उन्हें एक और ज़मीन का वादा दिया जिसे उन्होंने अभी तक नहीं देखा था और न ही उस पर क़दम रखा था — यह ख़ैबर की ज़मीन थी, और आगे चलकर क़यामत तक जितनी भी ज़मीनें मुसलमान फ़तह करेंगे, वह सब इसी वादे में शामिल है। यह एक ग़ैबी ख़बर और मोमिनीन के लिए खुशख़बरी थी कि अल्लाह उन्हें दुनिया में ग़लबा (प्रभुत्व) अता करेगा।

और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखता है — वह जिसे चाहता है इज़्ज़त देता है, जिसे चाहता है ज़लील करता है, और उसकी ताक़त के आगे कोई चीज़ मुश्किल नहीं। यह आयत मोमिनीन के दिलों में अल्लाह पर भरोसा और उसकी मदद की उम्मीद पैदा करती है, और सिखाती है कि जब तुम अल्लाह के दीन की नुसरत करोगे, तो अल्लाह तुम्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी अता करेगा।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने सच्चे बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। जब मुसलमान अल्लाह के रास्ते में मुश्किलों का सामना करते हैं, तो अल्लाह उन्हें उसका बदला देता है और उनके दुश्मनों की ज़मीन, माल और इज़्ज़त उन्हें सौंप देता है। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह पर भरोसा रखें, उसके दीन पर साबित क़दम रहें, और यक़ीन रखें कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी — चाहे वह देर से ही क्यों न आए। अल्लाह की क़ुदरत की कोई हद नहीं, और वह हर मुश्किल को आसान करने पर पूरी तरह क़ादिर है।



📜 आयत 25-29 — सूरा अल-अहज़ाब

25وَرَدَّ اللَّهُ الَّذِينَ كَفَرُوا بِغَيْظِهِمْ لَمْ يَنَالُوا خَيْرًا ۚ وَكَفَى اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ الْقِتَالَ ۚ وَكَانَ اللَّهُ قَوِيًّا عَزِيزًا
और खुदा ने (अपनी कुदरत से) क़ाफिरों को मदीने से फेर दिया (और वह लोग) अपनी झुंझलाहट में (फिर गए) और इन्हें कुछ फायदे भी न हुआ और खुदा ने (अपनी मेहरबानी से) मोमिनीन को लड़ने की नौबत न आने दी और खुदा तो (बड़ा) ज़बरदस्त (और) ग़ालिब हैं
26وَأَنزَلَ الَّذِينَ ظَاهَرُوهُم مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ مِن صَيَاصِيهِمْ وَقَذَفَ فِي قُلُوبِهِمُ الرُّعْبَ فَرِيقًا تَقْتُلُونَ وَتَأْسِرُونَ فَرِيقًا
और अहले किताब में से जिन लोगों (बनी कुरैज़ा) ने उन (कुफ्फार) की मदद की थी खुदा उनको उनके क़िलों से (बेदख़ल करके) नीचे उतार लाया और उनके दिलों में (तुम्हारा) ऐसा रोब बैठा दिया कि तुम उनके कुछ लोगों को क़त्ल करने लगे
27وَأَوْرَثَكُمْ أَرْضَهُمْ وَدِيَارَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ وَأَرْضًا لَّمْ تَطَئُوهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا
और कुछ को क़ैदी (और गुलाम) बनाने और तुम ही लोगों को उनकी ज़मीन और उनके घर और उनके माल और उस ज़मीन (खैबर) का खुदा ने मालिक बना दिया जिसमें तुमने क़दम तक नहीं रखा था और खुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर वतवाना है
28يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ إِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا فَتَعَالَيْنَ أُمَتِّعْكُنَّ وَأُسَرِّحْكُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا
ऐ रसूल अपनी बीवियों से कह दो कि अगर तुम (फक़त) दुनियावी ज़िन्दगी और उसकी आराइश व ज़ीनत की ख्वाहॉ हो तो उधर आओ मैं तुम लोगों को कुछ साज़ो सामान दे दूँ और उनवाने शाइस्ता से रूख़सत कर दूँ
29وَإِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَالدَّارَ الْآخِرَةَ فَإِنَّ اللَّهَ أَعَدَّ لِلْمُحْسِنَاتِ مِنكُنَّ أَجْرًا عَظِيمًا
और अगर तुम लोग खुदा और उसके रसूल और आखेरत के घर की ख्वाहॉ हो तो (अच्छी तरह ख्याल रखो कि) तुम लोगों में से नेकोकार औरतों के लिए खुदा ने यक़ीनन् बड़ा (बड़ा) अज्र व (सवाब) मुहय्या कर रखा है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 27

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Thursday, October 1, 2026

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