साद · 8/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
أَأُنزِلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ مِن بَيْنِنَا ۚ بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ مِّن ذِكْرِي ۖ بَل لَّمَّا يَذُوقُوا عَذَابِ ۝٨
A-unzila `alaihiz zikru mim baininaa; bal hum fee shakkim min Zikree bal lammaa yazooqoo `azaab
📖 हिंदी अर्थ
क्या हम सब लोगों में बस (मोहम्मद ही क़ाबिल था कि) उस पर कुरान नाज़िल हुआ, नहीं बात ये है कि इनके (सिरे से) मेरे कलाम ही में शक है कि मेरा है या नहीं बल्कि असल ये है कि इन लोगों ने अभी तक अज़ाब के मज़े नहीं चखे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अज़-ज़िक्र: यहाँ अर्थ है क़ुरआन।
  • मिन बैनिना: हमारे बीच से, अर्थात हममें से किसी एक पर।
  • शक्क: संदेह, भ्रम।
  • लम्मा यज़ूक़ू: अभी चखा नहीं, अर्थात अभी अनुभव नहीं किया।

तफ़सीर:

ये आयत उस समय के क़ुरैश के सरदारों की उस बात का उत्तर है, जब उन्होंने अल्लाह के रसूल ﷺ पर ईमान लाने से इनकार करते हुए कहा था: "क्या हमारे बीच से उसी पर क़ुरआन उतारा गया?" उनका यह कहना अहंकार और घमंड पर आधारित था, क्योंकि वे स्वयं को धन, प्रतिष्ठा और क़बीले की हैसियत में बड़ा मानते थे। उन्हें यह अजीब लगा कि मुहम्मद ﷺ जैसे व्यक्ति को नबुव्वत कैसे मिल सकती है, जबकि वे स्वयं को इसके अधिक योग्य समझते थे।

अल्लाह तआला ने उनके इस अहंकारपूर्ण प्रश्न का उत्तर देते हुए फ़रमाया: "बल्कि वे मेरे ज़िक्र (क़ुरआन) से संदेह में हैं।" अर्थात उनका यह कहना वास्तव में संदेह और इनकार पर आधारित है, न कि किसी तर्क या ज्ञान पर। उन्होंने सत्य को जानने की कोशिश ही नहीं की, बल्कि पूर्वाग्रह और घमंड के कारण उसे ठुकरा दिया।

फिर अल्लाह ने उनकी उस हालत का असली कारण बताया: "बल्कि उन्होंने अभी अल्लाह का अज़ाब (दंड) चखा ही नहीं।" यानी अगर वे अल्लाह की पकड़ और उसके अज़ाब का अनुभव कर लेते, तो कभी ऐसी बातें न करते। उन्हें मोहलत (ढील) मिली हुई है, इसलिए वे घमंड में हैं। जब अज़ाब आ जाएगा, तो उनका संदेह दूर हो जाएगा, लेकिन तब ईमान लाना उनके किसी काम न आएगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपनी रहमत और हिदायत जिसे चाहता है देता है, और यह उसकी मर्ज़ी पर निर्भर है, न कि किसी की दौलत या रुतबे पर। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के फ़ैसले पर संतुष्ट रहें और उसके रसूल ﷺ की लाई हुई हिदायत को बिना किसी संदेह के क़बूल करें। यह भी याद रखें कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है—वह ढील देता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं। जो लोग सत्य को ठुकराते हैं और घमंड करते हैं, उनके लिए अज़ाब का इंतज़ार है। इसलिए हमें अल्लाह की रहमत के द्वार पर सजदा करना चाहिए और उसकी हिदायत के लिए आभारी होना चाहिए, क्योंकि यही सबसे बड़ी नेमत है।



📜 आयत 6-10 — सूरा साद

6وَانطَلَقَ الْمَلَأُ مِنْهُمْ أَنِ امْشُوا وَاصْبِرُوا عَلَىٰ آلِهَتِكُمْ ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ يُرَادُ
और उनमें से चन्द रवादार लोग (मजलिस व अज़ा से) ये (कह कर) चल खड़े हुए कि (यहाँ से) चल दो और अपने माबूदों की इबादत पर जमे रहो यक़ीनन इसमें (उसकी) कुछ ज़ाती ग़रज़ है
7مَا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِي الْمِلَّةِ الْآخِرَةِ إِنْ هَٰذَا إِلَّا اخْتِلَاقٌ
हम लोगों ने तो ये बात पिछले दीन में कभी सुनी भी नहीं हो न हो ये उसकी मन गढ़ंत है
8أَأُنزِلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ مِن بَيْنِنَا ۚ بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ مِّن ذِكْرِي ۖ بَل لَّمَّا يَذُوقُوا عَذَابِ
क्या हम सब लोगों में बस (मोहम्मद ही क़ाबिल था कि) उस पर कुरान नाज़िल हुआ, नहीं बात ये है कि इनके (सिरे से) मेरे कलाम ही में शक है कि मेरा है या नहीं बल्कि असल ये है कि इन लोगों ने अभी तक अज़ाब के मज़े नहीं चखे
9أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَحْمَةِ رَبِّكَ الْعَزِيزِ الْوَهَّابِ
(इस वजह से ये शरारत है) (ऐ रसूल) तुम्हारे ज़बरदस्त फ़य्याज़ परवरदिगार के रहमत के ख़ज़ाने इनके पास हैं
10أَمْ لَهُم مُّلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ فَلْيَرْتَقُوا فِي الْأَسْبَابِ
या सारे आसमान व ज़मीन और उन दोनों के दरमियान की सलतनत इन्हीं की ख़ास है तब इनको चाहिए कि रास्ते या सीढियाँ लगाकर (आसमान पर) चढ़ जाएँ और इन्तेज़ाम करें
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — साद 8

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Monday, September 28, 2026

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