साद · 7/88
अनुवाद उच्चारण — साद
مَا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِي الْمِلَّةِ الْآخِرَةِ إِنْ هَٰذَا إِلَّا اخْتِلَاقٌ ۝٧
Maa sami`naa bihaazaa fil millatil aakhirati in haazaaa illakh tilaaq
📖 हिंदी अर्थ
हम लोगों ने तो ये बात पिछले दीन में कभी सुनी भी नहीं हो न हो ये उसकी मन गढ़ंत है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا سَمِعْنَا – हमने नहीं सुना
  • الْمِلَّةِ الْآخِرَةِ – पिछले (पहले) धर्म या अपने बाप-दादा के धर्म में
  • اخْتِلَاقٌ – झूठ, मनगढ़ंत बात, गढ़ा हुआ

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नबी करीम ﷺ ने क़ुरैश के कुफ़्फ़ार को तौहीद (एकेश्वरवाद) और आख़िरत (प्रलय के दिन) की ओर बुलाया, तो उनके सरदार और बुज़ुर्ग लोग आपस में कहने लगे: "हमने यह बात न तो अपने बाप-दादा के धर्म में सुनी और न ही ईसा अलैहिस्सलाम की मिल्लत (धर्म) में। यह तो महज़ एक झूठ और मनगढ़ंत बात है जिसे मुहम्मद ﷺ ने अपनी तरफ़ से गढ़ लिया है।"

यह कहना उनका महज़ बहाना और सच्चाई से मुँह मोड़ने की कोशिश थी। वे जानते थे कि तौहीद का पैग़ाम कोई नया नहीं, बल्कि यही वह मूल संदेश है जो हर नबी लेकर आया — हज़रत इब्राहीम, मूसा, ईसा और सभी अंबिया अलैहिमुस्सलाम का संदेश यही था। लेकिन उन्होंने जान-बूझकर सच को छिपाने के लिए यह झूठा आरोप लगाया।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सत्य के दुश्मन हर ज़माने में एक ही तरह की बातें करते हैं — वे सच को नया और गढ़ा हुआ कहकर खारिज करने की कोशिश करते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि इस्लाम का पैग़ाम कोई नया नहीं, बल्कि यही वह दीन है जो आदम अलैहिस्सलाम से लेकर आख़िरी नबी ﷺ तक सभी पर लागू रहा। क़ुरआन और तौहीद का संदेश इंसान की फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) के अनुरूप है, इसलिए यह कभी पुराना नहीं होता और न ही कभी बदलता है। यही वह सच्चा रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 5-9 — साद

5أَجَعَلَ الْآلِهَةَ إِلَٰهًا وَاحِدًا ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ عُجَابٌ
भला (देखो तो) उसने तमाम माबूदों को (मटियामेट करके बस) एक ही माबूद क़ायम रखा ये तो यक़ीनी बड़ी ताज्जुब खेज़ बात है
6وَانطَلَقَ الْمَلَأُ مِنْهُمْ أَنِ امْشُوا وَاصْبِرُوا عَلَىٰ آلِهَتِكُمْ ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ يُرَادُ
और उनमें से चन्द रवादार लोग (मजलिस व अज़ा से) ये (कह कर) चल खड़े हुए कि (यहाँ से) चल दो और अपने माबूदों की इबादत पर जमे रहो यक़ीनन इसमें (उसकी) कुछ ज़ाती ग़रज़ है
7مَا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِي الْمِلَّةِ الْآخِرَةِ إِنْ هَٰذَا إِلَّا اخْتِلَاقٌ
हम लोगों ने तो ये बात पिछले दीन में कभी सुनी भी नहीं हो न हो ये उसकी मन गढ़ंत है
8أَأُنزِلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ مِن بَيْنِنَا ۚ بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ مِّن ذِكْرِي ۖ بَل لَّمَّا يَذُوقُوا عَذَابِ
क्या हम सब लोगों में बस (मोहम्मद ही क़ाबिल था कि) उस पर कुरान नाज़िल हुआ, नहीं बात ये है कि इनके (सिरे से) मेरे कलाम ही में शक है कि मेरा है या नहीं बल्कि असल ये है कि इन लोगों ने अभी तक अज़ाब के मज़े नहीं चखे
9أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَحْمَةِ رَبِّكَ الْعَزِيزِ الْوَهَّابِ
(इस वजह से ये शरारत है) (ऐ रसूल) तुम्हारे ज़बरदस्त फ़य्याज़ परवरदिगार के रहमत के ख़ज़ाने इनके पास हैं
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अनुवाद — साद 7

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सूरा आयत 7/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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