Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا سَمِعْنَا – हमने नहीं सुना
- الْمِلَّةِ الْآخِرَةِ – पिछले (पहले) धर्म या अपने बाप-दादा के धर्म में
- اخْتِلَاقٌ – झूठ, मनगढ़ंत बात, गढ़ा हुआ
तफ़सीर (व्याख्या):
जब नबी करीम ﷺ ने क़ुरैश के कुफ़्फ़ार को तौहीद (एकेश्वरवाद) और आख़िरत (प्रलय के दिन) की ओर बुलाया, तो उनके सरदार और बुज़ुर्ग लोग आपस में कहने लगे: "हमने यह बात न तो अपने बाप-दादा के धर्म में सुनी और न ही ईसा अलैहिस्सलाम की मिल्लत (धर्म) में। यह तो महज़ एक झूठ और मनगढ़ंत बात है जिसे मुहम्मद ﷺ ने अपनी तरफ़ से गढ़ लिया है।"
यह कहना उनका महज़ बहाना और सच्चाई से मुँह मोड़ने की कोशिश थी। वे जानते थे कि तौहीद का पैग़ाम कोई नया नहीं, बल्कि यही वह मूल संदेश है जो हर नबी लेकर आया — हज़रत इब्राहीम, मूसा, ईसा और सभी अंबिया अलैहिमुस्सलाम का संदेश यही था। लेकिन उन्होंने जान-बूझकर सच को छिपाने के लिए यह झूठा आरोप लगाया।
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सत्य के दुश्मन हर ज़माने में एक ही तरह की बातें करते हैं — वे सच को नया और गढ़ा हुआ कहकर खारिज करने की कोशिश करते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि इस्लाम का पैग़ाम कोई नया नहीं, बल्कि यही वह दीन है जो आदम अलैहिस्सलाम से लेकर आख़िरी नबी ﷺ तक सभी पर लागू रहा। क़ुरआन और तौहीद का संदेश इंसान की फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) के अनुरूप है, इसलिए यह कभी पुराना नहीं होता और न ही कभी बदलता है। यही वह सच्चा रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 5-9 — सूरा साद
अनुवाद — साद 7
सूरा साद आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हम लोगों ने तो ये बात पिछले दीन में कभी…सूरा आयत 7/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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