साद · 9/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَحْمَةِ رَبِّكَ الْعَزِيزِ الْوَهَّابِ ۝٩
Am`indahum khazaaa `inu rahmati Rabbikal `Azeezil Wahhab
📖 हिंदी अर्थ
(इस वजह से ये शरारत है) (ऐ रसूल) तुम्हारे ज़बरदस्त फ़य्याज़ परवरदिगार के रहमत के ख़ज़ाने इनके पास हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अम (أَمْ): क्या, या फिर — यहाँ प्रश्नवाचक और इनकार के अर्थ में है।
  • ख़ज़ाइन (خَزَائِن): ख़ज़ाने, भंडार, कोष।
  • रहमत (رَحْمَة): दया, कृपा, अनुग्रह।
  • अल-अज़ीज़ (الْعَزِيز): वह जो सर्वशक्तिमान, अजेय और प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई हरा न सके।
  • अल-वह्हाब (الْوَهَّاب): बहुत अधिक देने वाला, जो बिना किसी लाग-लपेट के अपनी देन से नवाज़ता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों को संबोधित करती है जो अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की नबुव्वत पर आश्चर्य करते थे और कहते थे कि यह व्यक्ति नबी कैसे बन गया? क्या हम इसके लायक़ नहीं थे? अल्लाह तआला उनसे पूछता है: क्या इन मुशरिकों के पास तुम्हारे रब की रहमत के ख़ज़ाने हैं? क्या इनके पास वह शक्ति और अधिकार है कि जिसे चाहें नबुव्वत दें और जिससे चाहें छीन लें?

यह एक ऐसा प्रश्न है जो उनकी नादानी और घमंड को बेनक़ाब करता है। अल्लाह तआला स्पष्ट करता है कि नबुव्वत, रिसालत, रिज़्क़, और हर प्रकार की भलाई — ये सब अल्लाह ही के हाथ में हैं। वही अल-अज़ीज़ है, यानी उसकी शक्ति के आगे कोई नहीं ठहर सकता, और वही अल-वह्हाब है, यानी वह जिसे चाहता है अपनी दया और उपहारों से नवाज़ता है। ये ख़ज़ाने किसी इंसान के पास नहीं हैं, न ही किसी को यह अधिकार है कि वह अल्लाह की रहमत को अपनी मर्ज़ी से बाँटे।

इस आयत में एक बड़ी शिक्षा है — हमें यह समझना चाहिए कि अल्लाह की रहमत और उसके फ़ज़ल का दरवाज़ा सबके लिए खुला है, लेकिन उसका वितरण अल्लाह की मर्ज़ी पर निर्भर है। जिसे अल्लाह चाहता है, वह नबुव्वत देता है, जिसे चाहता है हिकमत और इल्म देता है, जिसे चाहता है रिज़्क़ देता है। यह सब उसकी हिकमत और मर्ज़ी से होता है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह अल-वह्हाब है — वह बहुत देने वाला है। जब वह चाहता है, तो अपने बंदों को ऐसी नेमतें देता है जिनका कोई हिसाब नहीं। लेकिन साथ ही हमें यह भी याद रखना चाहिए कि अल्लाह की रहमत और उसके फ़ज़ल का तक़ाज़ा यह है कि हम उसके हुक्मों को मानें, उसके नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पैरवी करें, और अपने अंदर इख़लास (निष्ठा) पैदा करें। जो लोग अल्लाह के दिए हुए मुक़ाम से जलते हैं या उसकी तक़सीम पर एतराज़ करते हैं, वह दरअसल अपनी नादानी से अल्लाह के इल्म और हिकमत पर सवाल उठाते हैं।

हमें चाहिए कि हम अल्लाह की रहमत के मोहताज बनें, उससे दुआ करें, और उसके फ़ज़ल की उम्मीद रखें। क्योंकि वही सबसे बड़ा देने वाला है, और उसकी रहमत का ख़ज़ाना कभी ख़त्म नहीं होता।



📜 आयत 7-11 — सूरा साद

7مَا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِي الْمِلَّةِ الْآخِرَةِ إِنْ هَٰذَا إِلَّا اخْتِلَاقٌ
हम लोगों ने तो ये बात पिछले दीन में कभी सुनी भी नहीं हो न हो ये उसकी मन गढ़ंत है
8أَأُنزِلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ مِن بَيْنِنَا ۚ بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ مِّن ذِكْرِي ۖ بَل لَّمَّا يَذُوقُوا عَذَابِ
क्या हम सब लोगों में बस (मोहम्मद ही क़ाबिल था कि) उस पर कुरान नाज़िल हुआ, नहीं बात ये है कि इनके (सिरे से) मेरे कलाम ही में शक है कि मेरा है या नहीं बल्कि असल ये है कि इन लोगों ने अभी तक अज़ाब के मज़े नहीं चखे
9أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَحْمَةِ رَبِّكَ الْعَزِيزِ الْوَهَّابِ
(इस वजह से ये शरारत है) (ऐ रसूल) तुम्हारे ज़बरदस्त फ़य्याज़ परवरदिगार के रहमत के ख़ज़ाने इनके पास हैं
10أَمْ لَهُم مُّلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ فَلْيَرْتَقُوا فِي الْأَسْبَابِ
या सारे आसमान व ज़मीन और उन दोनों के दरमियान की सलतनत इन्हीं की ख़ास है तब इनको चाहिए कि रास्ते या सीढियाँ लगाकर (आसमान पर) चढ़ जाएँ और इन्तेज़ाम करें
11جُندٌ مَّا هُنَالِكَ مَهْزُومٌ مِّنَ الْأَحْزَابِ
(ऐ रसूल उन पैग़म्बरों के साथ झगड़ने वाले) गिरोहों में से यहाँ तुम्हारे मुक़ाबले में भी एक लशकर है जो शिकस्त खाएगा
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
9आयत

अनुवाद — साद 9

सूरा साद आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (इस वजह से ये शरारत है) (ऐ रसूल) तुम्हारे ज़बरदस्त…

सूरा आयत 9/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Tuesday, September 29, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए