अज़-ज़ुमर · 14/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
قُلِ اللَّهَ أَعْبُدُ مُخْلِصًا لَّهُ دِينِي ۝١٤
Qulil laaha a`budu mukhlisal lahoo deenee
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं अपनी इबादत को उसी के वास्ते ख़ालिस करके खुदा ही की बन्दगी करता हूँ (अब रहे तुम) तो उसके सिवा जिसको चाहो पूजो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَعْبُدُ: मैं इबादत करता हूँ।
  • مُخْلِصًا: अपने दीन (इबादत) को सिर्फ अल्लाह के लिए खालिस करके।
  • دِينِي: मेरी इबादत, मेरी भक्ति और मेरा आज्ञापालन।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप कह दीजिए कि मैं अल्लाह ही की इबादत करता हूँ, अपने दीन को सिर्फ उसी के लिए खालिस करके। मैं उसके साथ किसी को साझी नहीं बनाता, न किसी मूर्ति की पूजा करता हूँ और न किसी और की। मेरी नमाज़, मेरी क़ुर्बानी, मेरी दुआ और मेरी सारी इबादतें सिर्फ अल्लाह के लिए हैं। यह घोषणा है कि मैंने अपना पूरा जीवन अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित कर दिया है।

यह आयत हमें सिखाती है कि इबादत में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ "इख़लास" (निष्ठा) है। अल्लाह उसी इबादत को क़ुबूल करता है जो सिर्फ उसी के लिए हो, बिना किसी दिखावे या सांसारिक लाभ के। जब कोई बंदा अपनी इबादत को सिर्फ अल्लाह के लिए खालिस कर लेता है, तो उसे अल्लाह की तरफ से ऐसा इनाम मिलता है जिसका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।

इस आयत में मुशरिकों के लिए एक चेतावनी भी है कि जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों की इबादत करते हैं, वे अपना नुक़सान कर रहे हैं। वे दुनिया में भटक गए और आख़िरत में भी उन्हें सिर्फ़ पछतावा ही हाथ लगेगा। लेकिन जो लोग अपने दीन को अल्लाह के लिए खालिस कर लेंगे, उनके लिए अल्लाह के पास बेहतरीन बदला है — जन्नत के ऐसे बाग़ जिनमें नदियाँ बहती हैं, और अल्लाह की रज़ा जो सबसे बड़ी नेमत है।

ऐ अल्लाह के बंदो! हमें भी यही तालीम दी गई है कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल को अल्लाह के लिए खालिस करें। चाहे हम काम करें, पढ़ें, कमाएँ या आराम करें — हर काम में हमारी नीयत अल्लाह की रज़ा होनी चाहिए। यही सच्ची कामयाबी है। जब दिल अल्लाह से जुड़ जाता है, तो इंसान को सुकून मिलता है, उसकी मुश्किलें आसान होती हैं, और उसे ऐसी ताक़त मिलती है जो दुनिया की किसी ताक़त से नहीं मिल सकती।

🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — अज़-ज़ुमर

12وَأُمِرْتُ لِأَنْ أَكُونَ أَوَّلَ الْمُسْلِمِينَ
और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मैं सबसे पहल मुसलमान हूँ
13قُلْ إِنِّي أَخَافُ إِنْ عَصَيْتُ رَبِّي عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर मैं अपने परवरदिगार की नाफरमानी करूँ तो मैं एक बड़ी (सख्त) दिन (क़यामत) के अज़ाब से डरता हूँ
14قُلِ اللَّهَ أَعْبُدُ مُخْلِصًا لَّهُ دِينِي
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं अपनी इबादत को उसी के वास्ते ख़ालिस करके खुदा ही की बन्दगी करता हूँ (अब रहे तुम) तो उसके सिवा जिसको चाहो पूजो
15فَاعْبُدُوا مَا شِئْتُم مِّن دُونِهِ ۗ قُلْ إِنَّ الْخَاسِرِينَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَأَهْلِيهِمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ أَلَا ذَٰلِكَ هُوَ الْخُسْرَانُ الْمُبِينُ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि फिल हक़ीक़त घाटे में वही लोग हैं जिन्होंने अपना और अपने लड़के वालों का क़यामत के दिन घाटा किया आगाह रहो कि सरीही (खुल्लम खुल्ला) घाटा यही है कि उनके लिए उनके ऊपर से आग ही के ओढ़ने होगें
16لَهُم مِّن فَوْقِهِمْ ظُلَلٌ مِّنَ النَّارِ وَمِن تَحْتِهِمْ ظُلَلٌ ۚ ذَٰلِكَ يُخَوِّفُ اللَّهُ بِهِ عِبَادَهُ ۚ يَا عِبَادِ فَاتَّقُونِ
और उनके नीचे भी (आग ही के) बिछौने ये वह अज़ाब है जिससे खुदा अपने बन्दों को डराता है तो ऐ मेरे बन्दों मुझी से डरते रहो
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
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अनुवाद — अज़-ज़ुमर 14

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Tuesday, August 18, 2026

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