अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَعْبُدُ: मैं इबादत करता हूँ।
- مُخْلِصًا: अपने दीन (इबादत) को सिर्फ अल्लाह के लिए खालिस करके।
- دِينِي: मेरी इबादत, मेरी भक्ति और मेरा आज्ञापालन।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप कह दीजिए कि मैं अल्लाह ही की इबादत करता हूँ, अपने दीन को सिर्फ उसी के लिए खालिस करके। मैं उसके साथ किसी को साझी नहीं बनाता, न किसी मूर्ति की पूजा करता हूँ और न किसी और की। मेरी नमाज़, मेरी क़ुर्बानी, मेरी दुआ और मेरी सारी इबादतें सिर्फ अल्लाह के लिए हैं। यह घोषणा है कि मैंने अपना पूरा जीवन अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित कर दिया है।
यह आयत हमें सिखाती है कि इबादत में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ "इख़लास" (निष्ठा) है। अल्लाह उसी इबादत को क़ुबूल करता है जो सिर्फ उसी के लिए हो, बिना किसी दिखावे या सांसारिक लाभ के। जब कोई बंदा अपनी इबादत को सिर्फ अल्लाह के लिए खालिस कर लेता है, तो उसे अल्लाह की तरफ से ऐसा इनाम मिलता है जिसका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।
इस आयत में मुशरिकों के लिए एक चेतावनी भी है कि जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों की इबादत करते हैं, वे अपना नुक़सान कर रहे हैं। वे दुनिया में भटक गए और आख़िरत में भी उन्हें सिर्फ़ पछतावा ही हाथ लगेगा। लेकिन जो लोग अपने दीन को अल्लाह के लिए खालिस कर लेंगे, उनके लिए अल्लाह के पास बेहतरीन बदला है — जन्नत के ऐसे बाग़ जिनमें नदियाँ बहती हैं, और अल्लाह की रज़ा जो सबसे बड़ी नेमत है।
ऐ अल्लाह के बंदो! हमें भी यही तालीम दी गई है कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल को अल्लाह के लिए खालिस करें। चाहे हम काम करें, पढ़ें, कमाएँ या आराम करें — हर काम में हमारी नीयत अल्लाह की रज़ा होनी चाहिए। यही सच्ची कामयाबी है। जब दिल अल्लाह से जुड़ जाता है, तो इंसान को सुकून मिलता है, उसकी मुश्किलें आसान होती हैं, और उसे ऐसी ताक़त मिलती है जो दुनिया की किसी ताक़त से नहीं मिल सकती।
📜 आयत 12-16 — अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 14
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं अपनी इबादत को…सूरा आयत 14/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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