Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अख़ाफ़ु (أَخَافُ): मैं डरता हूँ।
- असैतु (عَصَيْتُ): मैंने नाफ़रमानी की / अवज्ञा की।
- अज़ाब (عَذَابَ): यातना / दंड।
- यौमिन अज़ीम (يَوْمٍ عَظِيمٍ): महान दिन, यानी क़ियामत का दिन।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप लोगों से कह दीजिए कि मैं अपने रब की नाफ़रमानी से डरता हूँ। अगर मैंने उसके हुक्म की ख़िलाफ़वरज़ी की, उसकी इबादत में किसी को शरीक किया, या उसके बताए हुए रास्ते से हटकर चला, तो मुझे उस महान दिन — यानी क़ियामत के दिन — की सख्त से सख्त यातना का डर है। वह दिन इतना भयानक और हौलनाक होगा कि उसकी हीबत से आसमान टूट पड़ेंगे, पहाड़ रेत की तरह उड़ जाएँगे, और हर इंसान सिर्फ अपने कर्मों के सामने खड़ा होगा।
यह बात नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उस वक्त फ़रमाई जब उन्हें अपने बाप-दादा के दीन (शिर्क) की तरफ बुलाया गया। उन्होंने साफ़ कह दिया कि मैं तो सिर्फ अल्लाह की इबादत करता हूँ और उसी से डरता हूँ। अगर मैं उसकी नाफ़रमानी करूँ, तो मुझे उस दिन के अज़ाब से खौफ़ है, जिस दिन की सज़ा से बचने की ताकत किसी में नहीं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के नबी को भी अपने रब का डर था, तो हम कौन होते हैं जो बेख़ौफ़ होकर गुनाह करें? यह डर बुरा नहीं है, बल्कि यही डर इंसान को नेकी की तरफ ले जाता है। जिस दिल में अल्लाह का खौफ़ होता है, वह दिल गुनाहों से दूर रहता है और नेकियों की तरफ दौड़ता है। यही वह डर है जो इंसान को जन्नत की राह दिखाता है और जहन्नम की आग से बचाता है।
प्यारे भाइयों और बहनों! हमें भी अपने नबी की इस सीख को अपनाना चाहिए। हमें चाहिए कि हम अल्लाह से डरें, उसकी नाफ़रमानी से बचें, और उस दिन के अज़ाब से पनाह माँगें। यह डर हमें सच्ची इबादत की तरफ ले जाएगा, और जो शख्स अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसे हर मुसीबत से निकालने का रास्ता देता है और उसे ऐसी जगह से रिज़्क़ देता है जिसका उसे ख़याल भी नहीं होता। तो आइए, हम अपने दिलों में अल्लाह का खौफ़ पैदा करें, क्योंकि यही खौफ़ हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 11-15 — सूरा अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 13
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर मैं अपने परवरदिगार…सूरा आयत 13/75 — सूरा अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुमर सुनें, सूरा अज़-ज़ुमर अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुमर mp3, सूरा अज़-ज़ुमर pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुमर
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


