अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مِن دُونِهِ: उसके अलावा, अल्लाह को छोड़कर।
- الْخَاسِرِينَ: बड़ा नुक़सान उठाने वाले।
- خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ: अपने आपको नुक़सान में डाला, यानी अपने ऊपर ज़ुल्म किया।
- الْخُسْرَانُ الْمُبِينُ: स्पष्ट और ज़ाहिर नुक़सान, जिसमें कोई संदेह न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! आप कह दीजिए कि मैं तो अकेले अल्लाह की इबादत करता हूँ, उसकी इबादत को ख़ालिस करके, बिना किसी साझीदार के। और तुम मुशरिकों, तुम जिसे चाहो उसकी इबादत करो—चाहे वे मूर्तियाँ हों, बुत हों, या अल्लाह की सृष्टि में से कोई और चीज़। यह बात एक तरफ़ से धमकी और चेतावनी है, और दूसरी तरफ़ नबी के दिल को तसल्ली देने के लिए है कि उनका रास्ता साफ़ है और मुशरिकों का अंजाम बुरा है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: कह दीजिए कि असली नुक़सान उठाने वाले वे लोग हैं जिन्होंने क़ियामत के दिन अपने आपको और अपने अहल-ओ-अयाल को नुक़सान में डाला। यानी उन्होंने दुनिया में कुफ़्र और शिर्क का रास्ता अपनाया, जिसकी वजह से वे जहन्नम में जाएँगे और जन्नत की उन नेमतों से महरूम रहेंगे जो उनके लिए तैयार थीं। वे अपने अहल-ओ-अयाल से भी जुदा हो जाएँगे—या तो वे जन्नत में चले जाएँगे और ये जहन्नम में होंगे, या सब जहन्नम में होंगे, लेकिन एक-दूसरे से बिछड़ जाएँगे, और यही सबसे बड़ी जुदाई है।
सुन लो! यही वह साफ़ और ज़ाहिर नुक़सान है, जिसमें कोई शक नहीं। यह नुक़सान दुनिया के किसी भी नुक़सान से बड़ा है, क्योंकि दुनिया का नुक़सान माल-दौलत या रिश्तों का होता है, लेकिन यहाँ ख़ुद अपनी जान और अपने हमेशा के साथियों का नुक़सान है।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस रास्ते पर चल रहे हैं। क्या हम उस अल्लाह की इबादत करते हैं जिसने हमें पैदा किया, हमें रिज़्क़ दिया, और हमें इस्लाम जैसी प्यारी नेमत अता की? या हम दुनिया की चीज़ों, अपनी ख्वाहिशों, या किसी और को अपनी ज़िंदगी का केंद्र बना चुके हैं?
याद रखिए! असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की इबादत को ख़ालिस करे और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चले। और असली नुक़सान उसका है जो इस दुनिया में अल्लाह से मुँह मोड़े। आज हमें मौक़ा मिला है—तौबा का, सुधार का, और अल्लाह की रहमत की तरफ लौटने का। यह मौक़ा क़ियामत के दिन नहीं मिलेगा। आइए, हम अपने ईमान को मज़बूत करें, अपनी इबादत को ख़ालिस करें, और उस दिन की शर्मिंदगी से बचें जब हाथ मलने के सिवा कुछ न होगा। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 13-17 — अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 15
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि फिल हक़ीक़त घाटे में…सूरा आयत 15/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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