अन-निसा · 74/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
۞ فَلْيُقَاتِلْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ الَّذِينَ يَشْرُونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا بِالْآخِرَةِ ۚ وَمَن يُقَاتِلْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَيُقْتَلْ أَوْ يَغْلِبْ فَسَوْفَ نُؤْتِيهِ أَجْرًا عَظِيمًا ۝٧٤
Falyuqaatil fee sabeelil laahil lazeena yashroonal hayaatad dunyaa bil Aakhirah; wa many-uqaatil fee sabeelil laahi fa yuqtal aw yaghlib fasawfa nu`teehi ajran `azeemaa
📖 हिंदी अर्थ
पस जो लोग दुनिया की ज़िन्दगी (जान तक) आख़ेरत के वास्ते दे डालने को मौजूद हैं उनको ख़ुदा की राह में जेहाद करना चाहिए और जिसने ख़ुदा की राह में जेहाद किया फिर शहीद हुआ तो गोया ग़ालिब आया तो (बहरहाल) हम तो अनक़रीब ही उसको बड़ा अज्र अता फ़रमायेंगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَشْرُونَ: बेचते हैं (यहाँ अर्थ है: दुनिया की ज़िंदगी को आख़िरत के बदले बेच देना, यानी दुनिया को छोड़कर आख़िरत को खरीद लेना)।
  • فَيُقْتَلْ: शहीद कर दिया जाए।
  • أَوْ يَغْلِبْ: या दुश्मन पर विजय प्राप्त कर ले।
  • أَجْرًا عَظِيمًا: बहुत बड़ा इनाम (यानी जन्नत और अल्लाह की रज़ा)।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों को जिहाद का हुक्म देते हुए फ़रमाता है कि जो लोग दुनिया की फ़ानी ज़िंदगी को आख़िरत की हमेशा रहने वाली ज़िंदगी के बदले बेच देते हैं—यानी जिनकी निगाहें सिर्फ़ दुनिया की चमक-दमक पर नहीं होतीं, बल्कि वे अल्लाह की रज़ा और जन्नत के सच्चे दीवाने होते हैं—उन्हें चाहिए कि अल्लाह के रास्ते में लड़ें, ताकि अल्लाह का कलिमा (शब्द) बुलंद हो और दीन की मदद हो। यह आयत उन मुनाफ़िक़ों को भी नसीहत करती है जो जिहाद से पीछे हटते थे, और साथ ही सच्चे मोमिनों की तारीफ़ भी करती है जो दुनिया को आख़िरत पर तरजीह नहीं देते।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: जो कोई अल्लाह के रास्ते में ख़ालिस नीयत से जिहाद करे, फिर चाहे वह शहीद कर दिया जाए या दुश्मन पर ग़ालिब आ जाए—दोनों ही सूरतों में उसे अल्लाह की तरफ़ से बहुत बड़ा अज्र मिलेगा। यानी शहादत हो या फ़तह, मोमिन के लिए दोनों ही कामयाबी हैं। शहीद को जन्नत का मुक़ाम मिलता है और ग़ालिब आने वाले को इज़्ज़त, सरबुलंदी और अल्लाह की मदद नसीब होती है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि मोमिन की ज़िंदगी का निशाना सिर्फ़ दुनिया की कामयाबी नहीं होती, बल्कि वह आख़िरत की कामयाबी को सबसे बड़ी कामयाबी समझता है। जब एक इंसान अल्लाह के रास्ते में अपनी जान, माल और वक़्त लगाता है, तो अल्लाह उसे कभी नाकाम नहीं करता—या तो उसे दुनिया में फ़तह देता है, या शहादत की बुलंदी अता करता है। यही वह सच्ची तिजारत है जिसमें मोमिन कभी घाटे में नहीं रहता। अल्लाह का वादा है कि जो उसके रास्ते में जिहाद करेगा, उसे अज्र-ए-अज़ीम (बहुत बड़ा इनाम) मिलेगा—और अल्लाह का वादा कभी नहीं बदलता। तो आओ, हम भी अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की राह में लगाने की हिम्मत करें, क्योंकि यही सबसे बड़ी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 72-76 — अन-निसा

72وَإِنَّ مِنكُمْ لَمَن لَّيُبَطِّئَنَّ فَإِنْ أَصَابَتْكُم مُّصِيبَةٌ قَالَ قَدْ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيَّ إِذْ لَمْ أَكُن مَّعَهُمْ شَهِيدًا
और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो (जेहाद से) ज़रूर पीछे रहेंगे फिर अगर इत्तेफ़ाक़न तुमपर कोई मुसीबत आ पड़ी तो कहने लगे ख़ुदा ने हमपर बड़ा फ़ज़ल किया कि उनमें (मुसलमानों) के साथ मौजूद न हुआ
73وَلَئِنْ أَصَابَكُمْ فَضْلٌ مِّنَ اللَّهِ لَيَقُولَنَّ كَأَن لَّمْ تَكُن بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُ مَوَدَّةٌ يَا لَيْتَنِي كُنتُ مَعَهُمْ فَأَفُوزَ فَوْزًا عَظِيمًا
और अगर तुमपर ख़ुदा ने फ़ज़ल किया (और दुश्मन पर ग़ालिब आए) तो इस तरह अजनबी बनके कि गोया तुममें उसमें कभी मोहब्बत ही न थी यूं कहने लगा कि ऐ काश उनके साथ होता तो मैं भी बड़ी कामयाबी हासिल करता
74۞ فَلْيُقَاتِلْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ الَّذِينَ يَشْرُونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا بِالْآخِرَةِ ۚ وَمَن يُقَاتِلْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَيُقْتَلْ أَوْ يَغْلِبْ فَسَوْفَ نُؤْتِيهِ أَجْرًا عَظِيمًا
पस जो लोग दुनिया की ज़िन्दगी (जान तक) आख़ेरत के वास्ते दे डालने को मौजूद हैं उनको ख़ुदा की राह में जेहाद करना चाहिए और जिसने ख़ुदा की राह में जेहाद किया फिर शहीद हुआ तो गोया ग़ालिब आया तो (बहरहाल) हम तो अनक़रीब ही उसको बड़ा अज्र अता फ़रमायेंगे
75وَمَا لَكُمْ لَا تُقَاتِلُونَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالْمُسْتَضْعَفِينَ مِنَ الرِّجَالِ وَالنِّسَاءِ وَالْوِلْدَانِ الَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا أَخْرِجْنَا مِنْ هَٰذِهِ الْقَرْيَةِ الظَّالِمِ أَهْلُهَا وَاجْعَل لَّنَا مِن لَّدُنكَ وَلِيًّا وَاجْعَل لَّنَا مِن لَّدُنكَ نَصِيرًا
(और मुसलमानों) तुमको क्या हो गया है कि ख़ुदा की राह में उन कमज़ोर और बेबस मर्दो और औरतों और बच्चों (को कुफ्फ़ार के पंजे से छुड़ाने) के वास्ते जेहाद नहीं करते जो (हालते मजबूरी में) ख़ुदा से दुआएं मॉग रहे हैं कि ऐ हमारे पालने वाले किसी तरह इस बस्ती (मक्का) से जिसके बाशिन्दे बड़े ज़ालिम हैं हमें निकाल और अपनी तरफ़ से किसी को हमारा सरपरस्त बना और तू ख़ुद ही किसी को अपनी तरफ़ से हमारा मददगार बना
76الَّذِينَ آمَنُوا يُقَاتِلُونَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا يُقَاتِلُونَ فِي سَبِيلِ الطَّاغُوتِ فَقَاتِلُوا أَوْلِيَاءَ الشَّيْطَانِ ۖ إِنَّ كَيْدَ الشَّيْطَانِ كَانَ ضَعِيفًا
(पस देखो) ईमानवाले तो ख़ुदा की राह में लड़ते हैं और कुफ्फ़ार शैतान की राह में लड़ते मरते हैं पस (मुसलमानों) तुम शैतान के हवा ख़ाहों से लड़ो और (कुछ परवाह न करो) क्योंकि शैतान का दाओ तो बहुत ही बोदा है
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अनुवाद — अन-निसा 74

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Tuesday, August 18, 2026

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