Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَضْلٌ: अल्लाह की ओर से मिलने वाली भलाई, विजय, या ग़नीमत (युद्ध-धन)।
- مَوَدَّةٌ: प्रेम, मित्रता, और आपसी संबंध।
- فَأَفُوزَ: मैं सफलता प्राप्त कर लूँ, कामयाबी हासिल कर लूँ।
- فَوْزًا عَظِيمًا: बहुत बड़ी सफलता, जो निःसंदेह रूप से महान हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के हाल का वर्णन करती है जो जिहाद और अल्लाह के रास्ते में लड़ने से पीछे रह जाते हैं। जब मुसलमानों को अल्लाह की ओर से कोई भलाई मिलती है—जैसे विजय, सुरक्षा, या ग़नीमत का धन—तो ये मुनाफ़िक़ पछतावे और ईर्ष्या के साथ कहते हैं: "काश! मैं भी उनके साथ होता, तो मुझे भी यह बड़ी सफलता मिलती।" वे यह बात ऐसे कहते हैं जैसे उनका तुमसे कोई प्रेम या संबंध ही नहीं था, हालाँकि वे तुम्हारे साथ मिलकर रहते थे और उन्हें तुम्हारी स्थिति की पूरी जानकारी थी। उनका यह पछतावा ईमान की वजह से नहीं होता, बल्कि सिर्फ़ दुनियावी माल और फ़ायदे के लिए होता है। वे सच्चे दिल से अल्लाह के रास्ते में कुर्बानी नहीं देते, बल्कि जब देखते हैं कि मुसलमानों को कामयाबी मिली है, तो उनके मुँह से यह बात निकलती है—जबकि अगर उन्हें नुक़सान पहुँचता, तो वे ख़ुश होते और कहते कि हमने अच्छा किया जो लड़ने नहीं गए।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान और अल्लाह के रास्ते में कुर्बानी की असली पहचान मुश्किलों में होती है, न कि सिर्फ़ फ़ायदे के समय। सच्चा मुसलमान वही है जो हर हाल में अल्लाह के दीन की मदद करे।
- मुनाफ़िक़ी की पहचान यह है कि वे दुनियावी माल और शोहरत के लिए काम करते हैं, जबकि मोमिन की नीयत अल्लाह की रज़ा और आख़िरत की कामयाबी होती है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के रास्ते में जिहाद और भलाई के कामों में आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि असली फ़ायदा और सफलता उसी में है। दुनिया की ग़नीमत तो मिल सकती है, लेकिन आख़िरत की सफलता उन्हीं को मिलेगी जो अल्लाह की राह में सच्चे दिल से निकलें।
- हमें अपने दिल को ईर्ष्या और पछतावे से पाक रखना चाहिए और हर हाल में अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी रहना चाहिए। मुसलमानों की कामयाबी पर ख़ुश होना चाहिए, न कि जलन और हसद करना।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों की क़द्र करनी चाहिए और उनके लिए शुक्र अदा करना चाहिए, क्योंकि यही वह चीज़ है जो इंसान को सच्ची कामयाबी की तरफ़ ले जाती है।
📜 आयत 71-75 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 73
सूरा अन-निसा आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर तुमपर ख़ुदा ने फ़ज़ल किया (और दुश्मन पर…सूरा आयत 73/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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