अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- सबीलिल्लाह: अल्लाह की राह, उसकी खुशी और उसके दीन की मदद का रास्ता।
- तागूत: शैतान, बुत (मूर्तियाँ), और हर वह चीज़ या इंसान जो अल्लाह की इबादत में साझी ठहराया जाए या अल्लाह के हुक्म के खिलाफ बग़ावत करे।
- औलिया: दोस्त, मददगार, साथी।
- कैद: चाल, साज़िश, मक्र।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मोमिनों और काफ़िरों के बीच साफ़ फर्क बयान करती है। जो लोग सच्चे दिल से ईमान लाए हैं, उनका जिहाद और संघर्ष अल्लाह की राह में होता है—यानी वह अल्लाह के दीन को बुलंद करने, सच्चाई और इंसाफ़ के लिए लड़ते हैं। उनका निशाना सिर्फ अल्लाह की रज़ा होती है। इसके उलट, जिन लोगों ने कुफ्र का रास्ता अपनाया, वह तागूत की राह में लड़ते हैं—यानी शैतान, बुतों और अपनी बग़ावत भरी ख्वाहिशों के लिए। वह ज़मीन पर फसाद फैलाने और ज़ुल्म करने के लिए जंग करते हैं।
अल्लाह तआला मोमिनों को हुक्म देता है कि वह शैतान के दोस्तों (यानी काफ़िरों और मुशरिकों) से जंग करें। यह हुक्म मोमिनों के लिए बशारत (खुशखबरी) भी है—क्योंकि शैतान की चाल चाहे कितनी भी बड़ी और पेचीदा क्यों न हो, वह अल्लाह के मुकाबले में बिल्कुल कमज़ोर है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उनके लिए शैतान की साज़िशें कभी नुकसानदेह साबित नहीं हो सकतीं।
इस आयत से हमें सबक मिलता है कि हमारी नीयत और हमारा मक़सद हमेशा साफ़ होना चाहिए। अगर हम किसी काम में लगे हैं, तो वह अल्लाह की रज़ा के लिए होना चाहिए, न कि दुनिया की ख्वाहिशों या शैतानी उकसावे के लिए। और जब हम अल्लाह की राह में जिहाद करेंगे, तो अल्लाह हमारी मदद करेगा, क्योंकि शैतान की ताकत अल्लाह के मुकाबले कुछ भी नहीं। यही ईमान की ताकत है कि मोमिन को कभी काफ़िरों की तादाद या उनके हथियारों से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसे अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए—क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है और उसकी मदद के आगे शैतान की सारी चालें नाकाम हैं।
📜 आयत 74-78 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 76
सूरा अन-निसा आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (पस देखो) ईमानवाले तो ख़ुदा की राह में लड़ते हैं…सूरा आयत 76/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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