Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को ख़िताब करते हुए फ़रमाया: क्या आपने उन लोगों के हाल पर नज़र नहीं डाली जिनसे पहले कहा गया था कि अपने हाथों को (जिहाद से) रोके रखो, नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो? यह बात उस वक़्त थी जब जिहाद का हुक्म नहीं आया था। फिर जब अल्लाह ने उन पर जिहाद फ़र्ज़ किया और वे मदीना हिजरत करके आए, तो उनमें से एक गिरोह ऐसा था जिस पर यह हुक्म बहुत भारी गुज़रा। वे लोगों (मक्का के मुशरिकीन) से ऐसा डरने लगे जैसा अल्लाह से डरना चाहिए, बल्कि उससे भी ज़्यादा डर उनके दिलों में पैदा हो गया। उन्होंने कहा: ऐ हमारे रब! तूने हम पर जिहाद क्यों फ़र्ज़ किया? काश तूने हमें थोड़ी सी मोहलत और दे दी होती, ताकि हम दुनिया के मज़े ले लेते। यह बात उनकी दुनिया से मुहब्बत और आराम-पसंदी की वजह से निकली।
अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को हुक्म दिया कि आप उन्हें जवाब दें: दुनिया का सामान चाहे कितना ही ज़्यादा हो, वह बहुत थोड़ा और फ़ानी है, जल्द ही ख़त्म होने वाला है। और आख़िरत की नेमतें उस शख्स के लिए बेहतर और हमेशा रहने वाली हैं जो अल्लाह से डरता है, उसके हुक्मों पर अमल करता है और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचता है। और तुमसे तुम्हारे नेक अमलों में कुछ भी कमी नहीं की जाएगी, चाहे वह कितना ही छोटा हो — यहाँ तक कि खजूर की गुठली के बीच के उस बारीक धागे के बराबर भी नहीं, जो फ़तील कहलाता है। अल्लाह तआला हर छोटे-बड़े अमल का पूरा-पूरा बदला देगा।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है कि दुनिया की ज़िंदगी चाहे कितनी ही लंबी और आरामदेह क्यों न लगे, वह आख़िरत के मुक़ाबले में बहुत थोड़ी है। अल्लाह ने जो हुक्म दिया है, उसमें हमारी भलाई ही छिपी है। जिहाद और अल्लाह की राह में कुर्बानी देना दुनिया में बड़ा मुश्किल लगता है, लेकिन इसका अज्र आख़िरत में बेहद अज़ीम है। जो शख्स अल्लाह से डरता है और उसकी राह पर चलता है, उसके लिए आख़िरत की नेमतें हमेशा रहने वाली हैं। अल्लाह किसी की मेहनत को ज़ाया नहीं करता, चाहे वह अमल कितना ही छोटा क्यों न हो। हमें चाहिए कि दुनिया की फ़ानी चीज़ों के पीछे पड़ने के बजाय आख़िरत की हमेशा रहने वाली नेमतों को तरजीह दें और अल्लाह के हुक्मों पर खुशी-खुशी अमल करें, क्योंकि उसी में हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।
📜 आयत 75-79 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 77
सूरा अन-निसा आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों (के हाल) पर नज़र…सूरा आयत 77/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
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Wednesday, September 30, 2026
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