फुस्सिलत · 40/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
إِنَّ الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي آيَاتِنَا لَا يَخْفَوْنَ عَلَيْنَا ۗ أَفَمَن يُلْقَىٰ فِي النَّارِ خَيْرٌ أَم مَّن يَأْتِي آمِنًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ اعْمَلُوا مَا شِئْتُمْ ۖ إِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ ۝٤٠
Innal lazeena yulhidoona feee Aayaatina laa yakhfawna `alainaa` afamai yulqaa fin Naari khayrun am mai yaateee aaminai Yawmal Qiyaamah; i`maloo ma shi`tum innahoo bimaa ta`maloona Baseer
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग हमारी आयतों में हेर फेर पैदा करते हैं वह हरगिज़ हमसे पोशीदा नहीं हैं भला जो शख्स दोज़ख़ में डाला जाएगा वह बेहतर है या वह शख्स जो क़यामत के दिन बेख़ौफ व ख़तर आएगा (ख़ैर) जो चाहो सो करो (मगर) जो कुछ तुम करते हो वह (ख़ुदा) उसको देख रहा है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُلْحِدُونَ (इल्हाद करते हैं): अर्थात सत्य से हटकर झुकाव रखना, आयातों में कुटिलता अपनाना, उनका इनकार करना या उन्हें तोड़-मरोड़ कर पेश करना।
  • لَا يَخْفَوْنَ عَلَيْنَا (हमसे छिपे नहीं हैं): अर्थात उनकी कोई बात या कार्य हमसे गुप्त नहीं है, हमें उनका पूर्ण ज्ञान है।
  • يُلْقَى (डाला जाएगा): अर्थात नरक की आग में फेंका जाएगा।
  • آمِنًا (सुरक्षित/निडर): अर्थात अल्लाह के अज़ाब से सुरक्षित, बिना किसी भय के।

संपूर्ण तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह की आयतों (क़ुरआन और उसकी निशानियों) के साथ कुटिलता और इल्हाद करते हैं—अर्थात वे सत्य से भटककर उन्हें झुठलाते हैं, उनमें तोड़-मरोड़ करते हैं, या उनका मज़ाक उड़ाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोग हमसे छिपे नहीं हैं। उनकी हर चाल, हर बात, हर इरादा हमारी निगाह में है, और हम उन्हें उनके किए का पूरा बदला देंगे। यह उनके लिए एक सख्त चेतावनी है।

फिर अल्लाह तआला एक प्रश्न के रूप में सच्चाई को स्पष्ट करता है: क्या वह व्यक्ति जो अपने कुकर्मों और इल्हाद की वजह से नरक की आग में डाला जाएगा, वह बेहतर है, या वह व्यक्ति जो क़ियामत के दिन अल्लाह के अज़ाब से सुरक्षित (आमिन) आएगा—क्योंकि उसने ईमान लाया, अल्लाह की आयतों को सच माना और उन पर अमल किया? यह प्रश्न स्वयं ही उत्तर दे देता है। जिसे नरक में डाला जाए वह कभी भला नहीं हो सकता, जबकि जो सुरक्षित आए वही सच्चा कामयाब है। यह तुलना हर समझदार इंसान के लिए रास्ता साफ कर देती है।

इसके बाद अल्लाह तआला एक भयावह और गंभीर अंदाज़ में फ़रमाता है: "तुम जो चाहो करो"—यह एक धमकी और तहदीद (चेतावनी) है, अनुमति नहीं। यानी ऐ इल्हाद करने वालों! तुम अपने मनमाने काम करते रहो, लेकिन याद रखो कि अल्लाह तुम्हारे हर काम को देख रहा है। वह बसीर (सब कुछ देखने वाला) है, उससे कोई भी क्रिया छिपी नहीं है। वह तुम्हारे अच्छे और बुरे हर अमल का हिसाब लेगा और उसका पूरा बदला देगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की निगाह हम पर हर वक़्त है। हमें अपने जीवन में सीधे रास्ते पर चलना चाहिए, अल्लाह की आयतों के साथ किसी भी प्रकार की कुटिलता या मज़ाक से बचना चाहिए। जो व्यक्ति ईमान और अच्छे कर्मों के साथ क़ियामत के दिन आएगा, वही सच्ची सुरक्षा और कामयाबी पाएगा। यह आयत हमें दो रास्तों के बीच चयन करने की पूरी आज़ादी देती है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि हर चयन का परिणाम हमारे सामने होगा। आओ, हम उस रास्ते को चुनें जो हमें अल्लाह की रहमत, जन्नत और उसकी खुशी तक ले जाए, और उस रास्ते से बचें जो नरक की ओर ले जाता है। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — फुस्सिलत

38فَإِنِ اسْتَكْبَرُوا فَالَّذِينَ عِندَ رَبِّكَ يُسَبِّحُونَ لَهُ بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَهُمْ لَا يَسْأَمُونَ ۩
पस अगर ये लोग सरकशी करें तो (ख़ुदा को भी उनकी परवाह नहीं) वो लोग (फ़रिश्ते) तुम्हारे परवरदिगार की बारगाह में हैं वह रात दिन उसकी तसबीह करते रहते हैं और वह लोग उकताते भी नहीं
39وَمِنْ آيَاتِهِ أَنَّكَ تَرَى الْأَرْضَ خَاشِعَةً فَإِذَا أَنزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْ ۚ إِنَّ الَّذِي أَحْيَاهَا لَمُحْيِي الْمَوْتَىٰ ۚ إِنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
उसकी क़ुदरत की निशानियों में से एक ये भी है कि तुम ज़मीन को ख़़ुश्क और बेआब ओ गयाह देखते हो फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने लगती है और फूल जाती है जिस ख़ुदा ने (मुर्दा) ज़मीन को ज़िन्दा किया वह यक़ीनन मुर्दों को भी जिलाएगा बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है
40إِنَّ الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي آيَاتِنَا لَا يَخْفَوْنَ عَلَيْنَا ۗ أَفَمَن يُلْقَىٰ فِي النَّارِ خَيْرٌ أَم مَّن يَأْتِي آمِنًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ اعْمَلُوا مَا شِئْتُمْ ۖ إِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
जो लोग हमारी आयतों में हेर फेर पैदा करते हैं वह हरगिज़ हमसे पोशीदा नहीं हैं भला जो शख्स दोज़ख़ में डाला जाएगा वह बेहतर है या वह शख्स जो क़यामत के दिन बेख़ौफ व ख़तर आएगा (ख़ैर) जो चाहो सो करो (मगर) जो कुछ तुम करते हो वह (ख़ुदा) उसको देख रहा है
41إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِالذِّكْرِ لَمَّا جَاءَهُمْ ۖ وَإِنَّهُ لَكِتَابٌ عَزِيزٌ
जिन लोगों ने नसीहत को जब वह उनके पास आयी न माना (वह अपना नतीजा देख लेंगे) और ये क़ुरान तो यक़ीनी एक आली मरतबा किताब है
42لَّا يَأْتِيهِ الْبَاطِلُ مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَلَا مِنْ خَلْفِهِ ۖ تَنزِيلٌ مِّنْ حَكِيمٍ حَمِيدٍ
कि झूठ न तो उसके आगे फटक सकता है और न उसके पीछे से और खूबियों वाले दाना (ख़ुदा) की बारगाह से नाज़िल हुई है
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अनुवाद — फुस्सिलत 40

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Tuesday, August 18, 2026

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