Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُلْحِدُونَ (इल्हाद करते हैं): अर्थात सत्य से हटकर झुकाव रखना, आयातों में कुटिलता अपनाना, उनका इनकार करना या उन्हें तोड़-मरोड़ कर पेश करना।
- لَا يَخْفَوْنَ عَلَيْنَا (हमसे छिपे नहीं हैं): अर्थात उनकी कोई बात या कार्य हमसे गुप्त नहीं है, हमें उनका पूर्ण ज्ञान है।
- يُلْقَى (डाला जाएगा): अर्थात नरक की आग में फेंका जाएगा।
- آمِنًا (सुरक्षित/निडर): अर्थात अल्लाह के अज़ाब से सुरक्षित, बिना किसी भय के।
संपूर्ण तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह की आयतों (क़ुरआन और उसकी निशानियों) के साथ कुटिलता और इल्हाद करते हैं—अर्थात वे सत्य से भटककर उन्हें झुठलाते हैं, उनमें तोड़-मरोड़ करते हैं, या उनका मज़ाक उड़ाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोग हमसे छिपे नहीं हैं। उनकी हर चाल, हर बात, हर इरादा हमारी निगाह में है, और हम उन्हें उनके किए का पूरा बदला देंगे। यह उनके लिए एक सख्त चेतावनी है।
फिर अल्लाह तआला एक प्रश्न के रूप में सच्चाई को स्पष्ट करता है: क्या वह व्यक्ति जो अपने कुकर्मों और इल्हाद की वजह से नरक की आग में डाला जाएगा, वह बेहतर है, या वह व्यक्ति जो क़ियामत के दिन अल्लाह के अज़ाब से सुरक्षित (आमिन) आएगा—क्योंकि उसने ईमान लाया, अल्लाह की आयतों को सच माना और उन पर अमल किया? यह प्रश्न स्वयं ही उत्तर दे देता है। जिसे नरक में डाला जाए वह कभी भला नहीं हो सकता, जबकि जो सुरक्षित आए वही सच्चा कामयाब है। यह तुलना हर समझदार इंसान के लिए रास्ता साफ कर देती है।
इसके बाद अल्लाह तआला एक भयावह और गंभीर अंदाज़ में फ़रमाता है: "तुम जो चाहो करो"—यह एक धमकी और तहदीद (चेतावनी) है, अनुमति नहीं। यानी ऐ इल्हाद करने वालों! तुम अपने मनमाने काम करते रहो, लेकिन याद रखो कि अल्लाह तुम्हारे हर काम को देख रहा है। वह बसीर (सब कुछ देखने वाला) है, उससे कोई भी क्रिया छिपी नहीं है। वह तुम्हारे अच्छे और बुरे हर अमल का हिसाब लेगा और उसका पूरा बदला देगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की निगाह हम पर हर वक़्त है। हमें अपने जीवन में सीधे रास्ते पर चलना चाहिए, अल्लाह की आयतों के साथ किसी भी प्रकार की कुटिलता या मज़ाक से बचना चाहिए। जो व्यक्ति ईमान और अच्छे कर्मों के साथ क़ियामत के दिन आएगा, वही सच्ची सुरक्षा और कामयाबी पाएगा। यह आयत हमें दो रास्तों के बीच चयन करने की पूरी आज़ादी देती है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि हर चयन का परिणाम हमारे सामने होगा। आओ, हम उस रास्ते को चुनें जो हमें अल्लाह की रहमत, जन्नत और उसकी खुशी तक ले जाए, और उस रास्ते से बचें जो नरक की ओर ले जाता है। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 38-42 — सूरा फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 40
सूरा फुस्सिलत आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो लोग हमारी आयतों में हेर फेर पैदा करते हैं…सूरा आयत 40/54 — सूरा फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फुस्सिलत सुनें, सूरा फुस्सिलत अनुवाद, सूरा फुस्सिलत mp3, सूरा फुस्सिलत pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा फुस्सिलत
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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