फुस्सिलत · 41/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِالذِّكْرِ لَمَّا جَاءَهُمْ ۖ وَإِنَّهُ لَكِتَابٌ عَزِيزٌ ۝٤١
Inna Lazeena kafaroo biz Zikri lammaa jaa`ahum wa innahoo la Kitaabun `Azeez
📖 हिंदी अर्थ
जिन लोगों ने नसीहत को जब वह उनके पास आयी न माना (वह अपना नतीजा देख लेंगे) और ये क़ुरान तो यक़ीनी एक आली मरतबा किताब है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अल-ज़िक्र (الذِّكْرِ): यहाँ इससे अभिप्राय क़ुरआन करीम है।
  • अज़ीज़ (عَزِيزٌ): बहुत प्रतिष्ठित, सम्मानित, अजेय और सुरक्षित।

तफ़सीर (व्याख्या):

निश्चय ही जिन लोगों ने उस ज़िक्र (क़ुरआन) का इनकार किया और उसे झुठलाया, जब वह उनके पास आया, तो वे बड़े घाटे में रहे। उनका अंजाम विनाश और क़ियामत के दिन कठोर यातना है। यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सत्य के आ जाने के बाद भी उससे मुँह मोड़ते हैं और अपने अहंकार तथा हठधर्मिता के कारण हिदायत को अस्वीकार कर देते हैं।

और यह क़ुरआन एक ऐसी महान और प्रतिष्ठित किताब है जिसे अल्लाह ने स्वयं सम्मानित किया है। यह ऐसी सुरक्षित किताब है जिसमें कोई परिवर्तन, हेर-फेर या छेड़छाड़ नहीं हो सकती। न इसमें कुछ घटाया जा सकता है और न बढ़ाया जा सकता है। किसी भी दिशा से कोई बातिल (असत्य) इसमें दाखिल नहीं हो सकता। यह उस हकीम (पूर्ण ज्ञान वाले) और महमूद (प्रशंसित) अल्लाह की ओर से उतारी गई है, जो अपने बंदों के मामलों का सर्वोत्तम प्रबंधन करता है और जिसके लिए सभी गुणों की परिपूर्णता है।

यह किताब अल्लाह के पास बहुत ही प्रतिष्ठित और सम्मानित है। इसे कोई तब्दील करने वाला तब्दील नहीं कर सकता, न कोई बदलने वाला बदल सकता है, और न ही कोई इसे झुठलाने में सफल हो सकता है। अल्लाह ने इसे हर प्रकार की कमी से पाक रखा है और इसे अपनी विशेष सुरक्षा में रखा है।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क़ुरआन जैसी अमूल्य नेमत को ठुकराना कितना बड़ा नुकसान है। जब अल्लाह की तरफ से रहनुमाई आ जाए और इंसान फिर भी उसे न माने, तो यह उसकी अपनी बदबख्ती है। यह किताब अल्लाह की तरफ से ऐसी मज़बूत और सुरक्षित किताब है जो क़ियामत तक कायम रहेगी। इसमें कोई कमी नहीं आ सकती, न कोई इसे बदल सकता है।

आओ हम इस अज़ीम किताब को अपनी ज़िंदगी में उतारें, इसे पढ़ें, समझें और इस पर अमल करें। यही हमारी कामयाबी और नजात की कुंजी है। अल्लाह हम सबको क़ुरआन को अपनाने और उसके अनुसार जीने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 39-43 — सूरा फुस्सिलत

39وَمِنْ آيَاتِهِ أَنَّكَ تَرَى الْأَرْضَ خَاشِعَةً فَإِذَا أَنزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْ ۚ إِنَّ الَّذِي أَحْيَاهَا لَمُحْيِي الْمَوْتَىٰ ۚ إِنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
उसकी क़ुदरत की निशानियों में से एक ये भी है कि तुम ज़मीन को ख़़ुश्क और बेआब ओ गयाह देखते हो फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने लगती है और फूल जाती है जिस ख़ुदा ने (मुर्दा) ज़मीन को ज़िन्दा किया वह यक़ीनन मुर्दों को भी जिलाएगा बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है
40إِنَّ الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي آيَاتِنَا لَا يَخْفَوْنَ عَلَيْنَا ۗ أَفَمَن يُلْقَىٰ فِي النَّارِ خَيْرٌ أَم مَّن يَأْتِي آمِنًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ اعْمَلُوا مَا شِئْتُمْ ۖ إِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
जो लोग हमारी आयतों में हेर फेर पैदा करते हैं वह हरगिज़ हमसे पोशीदा नहीं हैं भला जो शख्स दोज़ख़ में डाला जाएगा वह बेहतर है या वह शख्स जो क़यामत के दिन बेख़ौफ व ख़तर आएगा (ख़ैर) जो चाहो सो करो (मगर) जो कुछ तुम करते हो वह (ख़ुदा) उसको देख रहा है
41إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِالذِّكْرِ لَمَّا جَاءَهُمْ ۖ وَإِنَّهُ لَكِتَابٌ عَزِيزٌ
जिन लोगों ने नसीहत को जब वह उनके पास आयी न माना (वह अपना नतीजा देख लेंगे) और ये क़ुरान तो यक़ीनी एक आली मरतबा किताब है
42لَّا يَأْتِيهِ الْبَاطِلُ مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَلَا مِنْ خَلْفِهِ ۖ تَنزِيلٌ مِّنْ حَكِيمٍ حَمِيدٍ
कि झूठ न तो उसके आगे फटक सकता है और न उसके पीछे से और खूबियों वाले दाना (ख़ुदा) की बारगाह से नाज़िल हुई है
43مَّا يُقَالُ لَكَ إِلَّا مَا قَدْ قِيلَ لِلرُّسُلِ مِن قَبْلِكَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍ وَذُو عِقَابٍ أَلِيمٍ
(ऐ रसूल) तुमसे से भी बस वही बातें कहीं जाती हैं जो तुमसे और रसूलों से कही जा चुकी हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार बख्शने वाला भी है और दर्दनाक अज़ाब वाला भी है
फुस्सिलतकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
41आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 41

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Monday, September 28, 2026

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