फुस्सिलत · 39/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
وَمِنْ آيَاتِهِ أَنَّكَ تَرَى الْأَرْضَ خَاشِعَةً فَإِذَا أَنزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْ ۚ إِنَّ الَّذِي أَحْيَاهَا لَمُحْيِي الْمَوْتَىٰ ۚ إِنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۝٣٩
Wa min Aayaatiheee annaka taral arda khaashi`atan fa izaaa anzalna `alaihal maaa`ah tazzat wa rabat; innal lazeee ahyaahaa lamuhiyil mawtaa; innahoo `alaa kulli shai-in Qadeer
📖 हिंदी अर्थ
उसकी क़ुदरत की निशानियों में से एक ये भी है कि तुम ज़मीन को ख़़ुश्क और बेआब ओ गयाह देखते हो फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने लगती है और फूल जाती है जिस ख़ुदा ने (मुर्दा) ज़मीन को ज़िन्दा किया वह यक़ीनन मुर्दों को भी जिलाएगा बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَاشِعَةً: सूखी, बंजर, बिना किसी वनस्पति के।
  • اهْتَزَّتْ: हिल उठी, उसमें हलचल पैदा हो गई (अर्थात उसमें वनस्पति उगने लगी)।
  • وَرَبَتْ: फूल गई, ऊपर उठ गई (अर्थात उसमें उर्वरता और वृद्धि हुई)।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी एकता और कुदरत (शक्ति) की निशानियाँ बयान करते हुए फ़रमाता है कि उसकी शक्ति और वहदानियत की महान निशानियों में से एक यह है कि तुम देखते हो कि धरती सूखी, बंजर और बेजान पड़ी है, उसमें कोई हरियाली नहीं होती। फिर जब हम उस पर बारिश का पानी उतारते हैं, तो वह हिलने-डुलने लगती है, उसमें जान आ जाती है, और वह फूलकर उभर आती है, और उसमें तरह-तरह की वनस्पतियाँ उग आती हैं।

यह एक ज़बरदस्त सबक़ है! जिस अल्लाह ने इस बंजर और मुर्दा धरती को पानी बरसाकर ज़िंदा कर दिया, वही अल्लाह मुर्दों को भी ज़िंदा करने पर पूरी तरह क़ादिर है। जिस तरह वह सूखी हुई धरती को ज़िंदा कर देता है, उसी तरह वह क़यामत के दिन सभी इंसानों को उनकी क़ब्रों से उठाकर हिसाब-किताब के लिए ज़िंदा करेगा।

वह अल्लाह जिसकी कुदरत (शक्ति) हर चीज़ पर हावी है, उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। जिसने यह विशाल ब्रह्मांड बनाया, जिसने ज़मीन और आसमान को पैदा किया, जिसने पानी से ज़िंदगी पैदा की, उसके लिए मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करना बिल्कुल आसान है।

यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि मौत के बाद ज़िंदगी ज़रूर आएगी। जिस तरह बारिश के बाद धरती हरी-भरी हो जाती है, उसी तरह क़यामत के दिन सभी इंसान ज़िंदा होकर अपने रब के सामने पेश होंगे। यह हमारे लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि यह दुनिया ही सब कुछ नहीं, बल्कि इसके बाद एक बेहतर और हमेशा की ज़िंदगी है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि जब हम सूखी धरती पर हरियाली देखते हैं, तो हमें अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करना चाहिए और यक़ीन करना चाहिए कि जो अल्लाह इस पर क़ादिर है, वह हमें भी ज़िंदा करके उठाएगा। यह हमारे दिल में अल्लाह की महानता, उसकी रहमत और उसकी ताक़त का एहसास पैदा करता है और हमें उसकी इबादत की तरफ़ खींचता है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमें इन निशानियों पर ग़ौर करने की तौफ़ीक़ दे और हमें सच्चे दिल से अपना बंदा बनाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — फुस्सिलत

37وَمِنْ آيَاتِهِ اللَّيْلُ وَالنَّهَارُ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُ ۚ لَا تَسْجُدُوا لِلشَّمْسِ وَلَا لِلْقَمَرِ وَاسْجُدُوا لِلَّهِ الَّذِي خَلَقَهُنَّ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ
और उसकी (कुदरत की) निशानियों में से रात और दिन और सूरज और चाँद हैं तो तुम लोग न सूरज को सजदा करो और न चाँद को, और अगर तुम ख़ुदा ही की इबादत करनी मंज़ूर रहे तो बस उसी को सजदा करो जिसने इन चीज़ों को पैदा किया है
38فَإِنِ اسْتَكْبَرُوا فَالَّذِينَ عِندَ رَبِّكَ يُسَبِّحُونَ لَهُ بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَهُمْ لَا يَسْأَمُونَ ۩
पस अगर ये लोग सरकशी करें तो (ख़ुदा को भी उनकी परवाह नहीं) वो लोग (फ़रिश्ते) तुम्हारे परवरदिगार की बारगाह में हैं वह रात दिन उसकी तसबीह करते रहते हैं और वह लोग उकताते भी नहीं
39وَمِنْ آيَاتِهِ أَنَّكَ تَرَى الْأَرْضَ خَاشِعَةً فَإِذَا أَنزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْ ۚ إِنَّ الَّذِي أَحْيَاهَا لَمُحْيِي الْمَوْتَىٰ ۚ إِنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
उसकी क़ुदरत की निशानियों में से एक ये भी है कि तुम ज़मीन को ख़़ुश्क और बेआब ओ गयाह देखते हो फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने लगती है और फूल जाती है जिस ख़ुदा ने (मुर्दा) ज़मीन को ज़िन्दा किया वह यक़ीनन मुर्दों को भी जिलाएगा बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है
40إِنَّ الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي آيَاتِنَا لَا يَخْفَوْنَ عَلَيْنَا ۗ أَفَمَن يُلْقَىٰ فِي النَّارِ خَيْرٌ أَم مَّن يَأْتِي آمِنًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ اعْمَلُوا مَا شِئْتُمْ ۖ إِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
जो लोग हमारी आयतों में हेर फेर पैदा करते हैं वह हरगिज़ हमसे पोशीदा नहीं हैं भला जो शख्स दोज़ख़ में डाला जाएगा वह बेहतर है या वह शख्स जो क़यामत के दिन बेख़ौफ व ख़तर आएगा (ख़ैर) जो चाहो सो करो (मगर) जो कुछ तुम करते हो वह (ख़ुदा) उसको देख रहा है
41إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِالذِّكْرِ لَمَّا جَاءَهُمْ ۖ وَإِنَّهُ لَكِتَابٌ عَزِيزٌ
जिन लोगों ने नसीहत को जब वह उनके पास आयी न माना (वह अपना नतीजा देख लेंगे) और ये क़ुरान तो यक़ीनी एक आली मरतबा किताब है
फुस्सिलतकुरान सूची
54आयत
मक्कीRevelation
39आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 39

सूरा फुस्सिलत आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसकी क़ुदरत की निशानियों में से एक ये भी है…

सूरा आयत 39/54 — फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फुस्सिलत सुनें, फुस्सिलत अनुवाद, फुस्सिलत mp3, फुस्सिलत pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए