Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَأَمَّا – जहाँ तक, रही बात
- آمَنُوا – ईमान लाए
- الصَّالِحَاتِ – अच्छे कर्म, नेक कार्य
- فَيُدْخِلُهُمْ – तो वह उन्हें दाखिल करेगा
- رَحْمَتِهِ – अपनी रहमत (दया) में, यानी जन्नत में
- الْفَوْزُ الْمُبِينُ – स्पष्ट सफलता, खुली कामयाबी
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में क़यामत के दिन के उस मंज़र का ज़िक्र कर रहे हैं जब हर इंसान अपने किए का बदला पाएगा। फ़रमाता है कि जिन लोगों ने दुनिया में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाया, और अपने ईमान को सिर्फ़ ज़ुबान तक सीमित नहीं रखा बल्कि उसे अच्छे कर्मों से साबित किया — यानी अल्लाह के हुक्मों की पालना की, उसकी मनाही से बचे, और भलाई के कामों में जुटे रहे — तो उनका रब अपनी असीम रहमत से उन्हें अपनी जन्नत में दाखिल करेगा। यह दाखिला उनकी अपनी काबिलियत या अमल के बदले में नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत से होगा, क्योंकि अल्लाह की रहमत उसके इंसाफ़ से बड़ी है।
यही वह कामयाबी है जो हर कामयाबी से ऊपर है — यह वह फ़तह है जो साफ़ और ज़ाहिर है, जिसमें कोई शक नहीं, और जिसके बाद कोई नाकामी, कोई ग़म, कोई अफ़सोस नहीं। दुनिया की कोई भी सफलता — चाहे वह दौलत हो, शोहरत हो, या सत्ता — इस फ़ौज़ के मुक़ाबले में कुछ भी नहीं। क्योंकि दुनिया की हर कामयाबी फ़ानी है और उसमें कोई न कोई कमी है, लेकिन जन्नत की कामयाबी हमेशा रहने वाली है और उसमें हर तरह की ख़ुशी और इत्मिनान शामिल है।
इस आयत में अल्लाह तआला ने ईमान और अच्छे कर्मों को एक साथ जोड़ा है, क्योंकि सिर्फ़ ईमान बग़ैर अच्छे कर्मों के अधूरा है और सिर्फ़ अच्छे कर्म बग़ैर ईमान के क़बूल नहीं। यह वही रास्ता है जो हमें उस महान कामयाबी तक पहुँचाता है।
यह आयत हर उस इंसान के लिए ख़ुशख़बरी है जो अल्लाह पर ईमान रखता है और नेक काम करता है। अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है — वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी रहमत की तरफ़ दौड़ें। यह वादा उन सबके लिए है जो अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें। तो आओ, हम सब इस रहमत के हक़दार बनने की कोशिश करें, अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने अमल को सुधारें, ताकि उस दिन हम भी उन लोगों में शामिल हों जिन्हें यह स्पष्ट सफलता मिलेगी।
📜 आयत 28-32 — सूरा अल-जासिया
अनुवाद — अल-जासिया 30
सूरा अल-जासिया आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे)…सूरा आयत 30/37 — सूरा अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जासिया सुनें, सूरा अल-जासिया अनुवाद, सूरा अल-जासिया mp3, सूरा अल-जासिया pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-जासिया
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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