अल-जासिया · 29/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
هَٰذَا كِتَابُنَا يَنطِقُ عَلَيْكُم بِالْحَقِّ ۚ إِنَّا كُنَّا نَسْتَنسِخُ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٢٩
Haazaa kitaabunaa yantiqu `alaikum bilhaqq; innaa kunnaa nastansikhu maa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
ये हमारी किताब (जिसमें आमाल लिखे हैं) तुम्हारे मुक़ाबले में ठीक ठीक बोल रही है जो कुछ भी तुम करते थे हम लिखवाते जाते थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَنطِقُ عَلَيْكُم بِالْحَقِّ – अर्थात यह किताब तुम्हारे विरुद्ध सत्य बोलेगी, तुम्हारे सभी कर्मों की गवाही देगी।
  • نَسْتَنسِخُ – अर्थात हम लिखवाते थे, अर्थात हमारे आदेश से फ़रिश्ते तुम्हारे कर्मों को लिखते थे।

तफ़सीर:

यह वह दृश्य है जब अल्लाह तआला अपने बंदों के सामने उनका पूरा रिकॉर्ड पेश करेगा। फ़रमाता है: "यह है हमारी किताब, जो तुम्हारे विरुद्ध सत्य के साथ बोलती है।" यह वह दिवान (रजिस्टर) है जिसमें अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्तों ने तुम्हारे हर अच्छे और बुरे कर्म को लिखा था। यह किताब न तो कोई छोटा कर्म छोड़ती है और न ही कोई बड़ा, बल्कि हर एक चीज़ को उसके पूरे विवरण के साथ दर्ज करती है। यह किताब तुम्हारे विरुद्ध साक्षी बनेगी, और यह साक्षी इतनी स्पष्ट और पुख्ता होगी कि कोई इनकार नहीं कर सकेगा।

अल्लाह तआला फ़रमाता है: "हम ही थे जो फ़रिश्तों से लिखवाते थे जो कुछ तुम करते थे।" यानी हमने तुम्हारे कर्मों को लिखने का प्रबंध किया था, ताकि क़ियामत के दिन तुम्हारे ऊपर कोई ज़ुल्म न हो और हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिले। यह अल्लाह की बेइंतिहा रहमत और अद्ल का प्रमाण है कि उसने हर छोटी-बड़ी बात को दर्ज करवा दिया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला की निगरानी हमारे हर कर्म पर है। हमारे हर अच्छे कर्म का हिसाब होगा और हर बुरे कर्म का भी। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी को सँवारें, अच्छे कर्म करें और बुराई से बचें। जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि हमारा हर कर्म लिखा जा रहा है, तो हमारा दिल अल्लाह की इबादत की ओर झुकेगा और हम उसके हुक्मों पर चलने की कोशिश करेंगे। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल कामिल है — कोई अच्छा कर्म ज़ाया नहीं होगा और कोई बुरा कर्म बिना सज़ा के नहीं रहेगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार बनाएँ, ताकि उस दिन हमारी किताब हमारे दाहिने हाथ में दी जाए और हम जन्नत की नेअमतों से नवाज़े जाएँ।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अल-जासिया

27وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يَوْمَئِذٍ يَخْسَرُ الْمُبْطِلُونَ
और सारे आसमान व ज़मीन की बादशाहत ख़ास ख़ुदा की है और जिस रोज़ क़यामत बरपा होगी उस रोज़ अहले बातिल बड़े घाटे में रहेंगे
28وَتَرَىٰ كُلَّ أُمَّةٍ جَاثِيَةً ۚ كُلُّ أُمَّةٍ تُدْعَىٰ إِلَىٰ كِتَابِهَا الْيَوْمَ تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम हर उम्मत को देखोगे कि (फैसले की मुन्तज़िर अदब से) घूटनों के बल बैठी होगी और हर उम्मत अपने नामाए आमाल की तरफ बुलाइ जाएगी जो कुछ तुम लोग करते थे आज तुमको उसका बदला दिया जाएगा
29هَٰذَا كِتَابُنَا يَنطِقُ عَلَيْكُم بِالْحَقِّ ۚ إِنَّا كُنَّا نَسْتَنسِخُ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
ये हमारी किताब (जिसमें आमाल लिखे हैं) तुम्हारे मुक़ाबले में ठीक ठीक बोल रही है जो कुछ भी तुम करते थे हम लिखवाते जाते थे
30فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُدْخِلُهُمْ رَبُّهُمْ فِي رَحْمَتِهِ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْمُبِينُ
ग़रज़ जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किये तो उनको उनका परवरदिगार अपनी रहमत (से बेहिश्त) में दाख़िल करेगा यही तो सरीही कामयाबी है
31وَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا أَفَلَمْ تَكُنْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَاسْتَكْبَرْتُمْ وَكُنتُمْ قَوْمًا مُّجْرِمِينَ
और जिन्होंने कुफ्र एख्तेयार किया (उनसे कहा जाएगा) तो क्या तुम्हारे सामने हमारी आयतें नहीं पढ़ी जाती थीं (ज़रूर) तो तुमने तकब्बुर किया और तुम लोग तो गुनेहगार हो गए
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीRevelation
29आयत

अनुवाद — अल-जासिया 29

सूरा अल-जासिया आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये हमारी किताब (जिसमें आमाल लिखे हैं) तुम्हारे मुक़ाबले में…

सूरा आयत 29/37 — अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जासिया सुनें, अल-जासिया अनुवाद, अल-जासिया mp3, अल-जासिया pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए