अल-जासिया · 4/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
وَفِي خَلْقِكُمْ وَمَا يَبُثُّ مِن دَابَّةٍ آيَاتٌ لِّقَوْمٍ يُوقِنُونَ ۝٤
Wa fee khalaqikum wa maa yabussu min daaabbatin Aayaatul liqawminy-yooqinoon
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हारी पैदाइश में (भी) और जिन जानवरों को वह (ज़मीन पर) फैलाता रहता है (उनमें भी) यक़ीन करने वालों के वास्ते बहुत सी निशानियाँ हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَلْقِكُمْ: तुम्हारी पैदाइश (तुम्हारा अस्तित्व में आना)।
  • يَبُثُّ: फैलाना, फैलाना (जमीन पर फैलाना)।
  • دَابَّةٍ: चलने-फिरने वाला जानवर (हर वो जीव जो ज़मीन पर चलता है)।
  • آيَاتٌ: निशानियाँ, सबूत, दलीलें।
  • يُوقِنُونَ: यक़ीन रखने वाले (पक्का विश्वास करने वाले)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! अल्लाह तआला ने तुम्हारी अपनी पैदाइश में और उन तमाम जानवरों में जिन्हें उसने ज़मीन पर फैलाया है, अपनी क़ुदरत और वहदानियत (एक होने) की बड़ी निशानियाँ रखी हैं। ज़रा सोचो, तुम नुत्फ़े (बूंद) से पैदा हुए, फिर ख़ून के जमे हुए टुकड़े (अलक़ा) से, फिर गोश्त के टुकड़े (मुज़्ग़ा) से, और फिर अल्लाह ने तुम्हें इंसान बनाकर ज़मीन पर चलने-फिरने की ताक़त दी। यही हाल उन तमाम जानवरों का है जो ज़मीन पर चलते हैं, चाहे वो छोटे हों या बड़े, चाहे वो ज़मीन पर रेंगते हों या चलते हों। ये सब अल्लाह की क़ुदरत के ज़िंदा सबूत हैं।

ये निशानियाँ उन लोगों के लिए हैं जो यक़ीन रखते हैं। यक़ीन रखने वाला इंसान इन मख़लूक़ात (प्राणियों) को देखकर समझ जाता है कि इन्हें पैदा करने वाला कोई और नहीं बल्कि अल्लाह ही है। जो इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका दिल अल्लाह की महानता से भर जाता है और उसका ईमान मज़बूत हो जाता है। वो जान लेता है कि जिस अल्लाह ने इतनी बारीकी और हिकमत से इंसान और जानवरों को पैदा किया है, वही अल्लाह मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! जब तुम अपने शरीर की बनावट को देखो, अपनी आँखों को देखो, अपने दिल की धड़कन को महसूस करो, तो ये सब अल्लाह की तरफ़ से तुम्हारे लिए इशारे हैं। ये सब तुम्हें अपने रब की तरफ़ बुला रहे हैं। ज़मीन पर चलने वाला हर जानवर, चाहे वो एक छोटी सी चींटी हो या एक बड़ा हाथी, वो अल्लाह की क़ुदरत का गवाह है। इन निशानियों को देखकर अपने दिल में अल्लाह की मुहब्बत पैदा करो, उसके आगे सर झुकाओ, और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारो। यक़ीन रखो कि जो अल्लाह इतनी बड़ी कायनात (ब्रह्मांड) का मालिक है, वही तुम्हारी हर ज़रूरत को पूरा करने वाला है। उसकी रहमत से कभी निराश न हो, और उसके दीन (इस्लाम) को मज़बूती से थामे रहो। यही तुम्हारी कामयाबी की कुंजी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 2-6 — अल-जासिया

2تَنزِيلُ الْكِتَابِ مِنَ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ
ये किताब (क़ुरान) ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुईहै जो ग़ालिब और दाना है
3إِنَّ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ لَآيَاتٍ لِّلْمُؤْمِنِينَ
बेशक आसमान और ज़मीन में ईमान वालों के लिए (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
4وَفِي خَلْقِكُمْ وَمَا يَبُثُّ مِن دَابَّةٍ آيَاتٌ لِّقَوْمٍ يُوقِنُونَ
और तुम्हारी पैदाइश में (भी) और जिन जानवरों को वह (ज़मीन पर) फैलाता रहता है (उनमें भी) यक़ीन करने वालों के वास्ते बहुत सी निशानियाँ हैं
5وَاخْتِلَافِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَمَا أَنزَلَ اللَّهُ مِنَ السَّمَاءِ مِن رِّزْقٍ فَأَحْيَا بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا وَتَصْرِيفِ الرِّيَاحِ آيَاتٌ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और रात दिन के आने जाने में और ख़ुदा ने आसमान से जो (ज़रिया) रिज़क (पानी) नाज़िल फरमाया फिर उससे ज़मीन को उसके मर जाने के बाद ज़िन्दा किया (उसमें) और हवाओं फेर बदल में अक्लमन्द लोगों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
6تِلْكَ آيَاتُ اللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّ ۖ فَبِأَيِّ حَدِيثٍ بَعْدَ اللَّهِ وَآيَاتِهِ يُؤْمِنُونَ
ये ख़ुदा की आयतें हैं जिनको हम ठीक (ठीक) तुम्हारे सामने पढ़ते हैं तो ख़ुदा और उसकी आयतों के बाद कौन सी बात होगी
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीRevelation
4आयत

अनुवाद — अल-जासिया 4

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Tuesday, August 18, 2026

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