अल-अहकाफ · 22/35
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहकाफ
قَالُوا أَجِئْتَنَا لِتَأْفِكَنَا عَنْ آلِهَتِنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ ۝٢٢
Qaaloo aji`tanaa litaa fikanaa `an aalihatinaa faatinaa bimaa ta`idunaaa in kunta minas saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
वह बोले क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि हमको हमारे माबूदों से फेर दो तो अगर तुम सच्चे हो तो जिस अज़ाब की तुम हमें धमकी देते हो ले आओ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِتَأْفِكَنَا — हमें हमारे देवताओं की पूजा से रोकने और बहकाने के लिए।
  • فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا — तो हम पर वह अज़ाब (यातना) ला दो जिसकी तू हमें धमकी देता है।
  • الصَّادِقِينَ — सच्चे लोगों में से।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नबी हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम 'आद' को अल्लाह की इबादत की ओर बुलाया और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, तो उनकी क़ौम ने अहंकार और जिद्द के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा: "क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हमें हमारे देवताओं की पूजा से बहका दे और हमें उनसे दूर कर दे? यह कभी नहीं हो सकता! अगर तू सच्चा है और तू सचमुच अल्लाह का नबी है, तो जिस अज़ाब की तू हमें धमकी देता है, उसे हमारे ऊपर ला डाल। हम तेरी बातों पर तब तक ईमान नहीं लाएँगे जब तक तू अपनी धमकी को सच न दिखा दे।"

यह क़ौम की ओर से एक चुनौती थी, जो उनके घमंड, सत्य से मुँह मोड़ने और नबी का मज़ाक उड़ाने पर आधारित थी। उन्होंने यह नहीं सोचा कि अल्लाह का अज़ाब कब और कैसे आएगा — वह तो तब आता है जब अल्लाह चाहता है, और जब आता है तो किसी को रोकने की ताक़त नहीं होती। उनकी यह बात उनकी नादानी और सज़ा को जल्दी माँगने की सनक थी, जैसा पहले की क़ौमों ने भी किया था।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है: इंसान को चाहिए कि वह हक़ (सत्य) को सुनते ही उसे क़बूल कर ले, और अल्लाह के नबियों की दावत को ठुकराने और उनका मज़ाक उड़ाने से बचे। अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त है, और जब वह आ जाता है, तो कोई पनाह नहीं दे सकता। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की रहमत और माफ़ी की ओर जल्दी करें, और उसकी नाफ़रमानी से बचें, क्योंकि अल्लाह बड़ा दयालु है, लेकिन उसकी पकड़ भी बहुत सख्त है जब वह पकड़ता है।



📜 आयत 20-24 — सूरा अल-अहकाफ

20وَيَوْمَ يُعْرَضُ الَّذِينَ كَفَرُوا عَلَى النَّارِ أَذْهَبْتُمْ طَيِّبَاتِكُمْ فِي حَيَاتِكُمُ الدُّنْيَا وَاسْتَمْتَعْتُم بِهَا فَالْيَوْمَ تُجْزَوْنَ عَذَابَ الْهُونِ بِمَا كُنتُمْ تَسْتَكْبِرُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَبِمَا كُنتُمْ تَفْسُقُونَ
और जिस दिन कुफ्फार जहन्नुम के सामने लाएँ जाएँगे (तो उनसे कहा जाएगा कि) तुमने अपनी दुनिया की ज़िन्दगी में अपने मज़े उड़ा चुके और उसमें ख़ूब चैन कर चुके तो आज तुम पर ज़िल्लत का अज़ाब किया जाएगा इसलिए कि तुम अपनी ज़मीन में अकड़ा करते थे और इसलिए कि तुम बदकारियां करते थे
21۞ وَاذْكُرْ أَخَا عَادٍ إِذْ أَنذَرَ قَوْمَهُ بِالْأَحْقَافِ وَقَدْ خَلَتِ النُّذُرُ مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
और (ऐ रसूल) तुम आद को भाई (हूद) को याद करो जब उन्होंने अपनी क़ौम को (सरज़मीन) अहक़ाफ में डराया और उनके पहले और उनके बाद भी बहुत से डराने वाले पैग़म्बर गुज़र चुके थे (और हूद ने अपनी क़ौम से कहा) कि ख़ुदा के सिवा किसी की इबादत न करो क्योंकि तुम्हारे बारे में एक बड़े सख्त दिन के अज़ाब से डरता हूँ
22قَالُوا أَجِئْتَنَا لِتَأْفِكَنَا عَنْ آلِهَتِنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
वह बोले क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि हमको हमारे माबूदों से फेर दो तो अगर तुम सच्चे हो तो जिस अज़ाब की तुम हमें धमकी देते हो ले आओ
23قَالَ إِنَّمَا الْعِلْمُ عِندَ اللَّهِ وَأُبَلِّغُكُم مَّا أُرْسِلْتُ بِهِ وَلَٰكِنِّي أَرَاكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ
हूद ने कहा (इसका) इल्म तो बस ख़ुदा के पास है और (मैं जो एहकाम देकर भेजा गया हूँ) वह तुम्हें पहुँचाए देता हूँ मगर मैं तुमको देखता हूँ कि तुम जाहिल लोग हो
24فَلَمَّا رَأَوْهُ عَارِضًا مُّسْتَقْبِلَ أَوْدِيَتِهِمْ قَالُوا هَٰذَا عَارِضٌ مُّمْطِرُنَا ۚ بَلْ هُوَ مَا اسْتَعْجَلْتُم بِهِ ۖ رِيحٌ فِيهَا عَذَابٌ أَلِيمٌ
तो जब उन लोगों ने इस (अज़ाब) को देखा कि वबाल की तरह उनके मैदानों की तरफ उम्ड़ा आ रहा है तो कहने लगे ये तो बादल है जो हम पर बरस कर रहेगा (नहीं) बल्कि ये वह (अज़ाब) जिसकी तुम जल्दी मचा रहे थे (ये) वह ऑंधी है जिसमें दर्दनाक (अज़ाब) है
अल-अहकाफकुरान सूची
35आयत
मक्कीअवतरण स्थान
22आयत

अनुवाद — अल-अहकाफ 22

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Wednesday, September 30, 2026

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