अल-अहकाफ · 21/35
अनुवाद उच्चारण — अल-अहकाफ
۞ وَاذْكُرْ أَخَا عَادٍ إِذْ أَنذَرَ قَوْمَهُ بِالْأَحْقَافِ وَقَدْ خَلَتِ النُّذُرُ مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ ۝٢١
Wazkur akhaa `Aad, iz anzara qawmahoo bil Ahqaafi wa qad khalatin nuzuru mim baini yadaihi wa min khalfiheee allaa ta`budooo illal laaha inneee akhaafu `alaikum `azaaba Yawmin `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम आद को भाई (हूद) को याद करो जब उन्होंने अपनी क़ौम को (सरज़मीन) अहक़ाफ में डराया और उनके पहले और उनके बाद भी बहुत से डराने वाले पैग़म्बर गुज़र चुके थे (और हूद ने अपनी क़ौम से कहा) कि ख़ुदा के सिवा किसी की इबादत न करो क्योंकि तुम्हारे बारे में एक बड़े सख्त दिन के अज़ाब से डरता हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अख़ा आदिन: आद क़ौम के भाई, यानी हज़रत हूद अलैहिस्सलाम, जो उन्हीं के क़बीले से ताल्लुक़ रखते थे।
  • अहक़ाफ़: रेतीले टीले, जो दक्षिणी अरब में स्थित थे और आद क़ौम की बस्तियाँ वहीं थीं।
  • ख़लतिन नुज़ुर: पहले भी डराने वाले पैग़म्बर गुज़र चुके थे।
  • अज़ाबे यौमिन अज़ीम: उस महान दिन की यातना, यानी क़ियामत का दिन।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप उस समय को याद करें जब हज़रत हूद अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम 'आद' को डराया। वे उनके भाई थे, यानी उन्हीं के क़बीले से थे, लेकिन दीन में वे अल्लाह के पैग़म्बर थे। उन्होंने अपनी क़ौम को उस वक़्त नसीहत की जब वे 'अहक़ाफ़' (रेतीले टीलों) में रहते थे। यह जगह दक्षिणी अरब में थी, जहाँ आद क़ौम की बस्तियाँ थीं।

हज़रत हूद अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को अल्लाह के अज़ाब से डराया। उनसे पहले भी कई पैग़म्बर गुज़र चुके थे, जिन्होंने अपनी-अपनी क़ौमों को अल्लाह की इबादत की तरफ़ बुलाया था। हूद अलैहिस्सलाम ने भी वही पैग़ाम दिया जो हर पैग़म्बर का पैग़ाम था: "अल्लाह के सिवा किसी की इबादत मत करो।" उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "मुझे तुम्हारे लिए एक बड़े दिन के अज़ाब का डर है, यानी क़ियामत के दिन का, जब अल्लाह के सिवा कोई बचाने वाला नहीं होगा।"

यह पैग़ाम सिर्फ़ आद क़ौम के लिए नहीं था, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करता है। अल्लाह तआला ने हमें पैदा किया, हमें रिज़्क़ दिया, और हमें रहमतों से नवाज़ा। तो क्या हमें उसी की इबादत नहीं करनी चाहिए? हज़रत हूद अलैहिस्सलाम की दावत साफ़ और सीधी थी: सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करो, उसके साथ किसी को शरीक मत करो। यही तौहीद का पैग़ाम है, जो हर पैग़म्बर का असली पैग़ाम रहा है।

आज भी हमें इसी पैग़ाम पर अमल करना है। अल्लाह की इबादत में किसी को शरीक करना सबसे बड़ा गुनाह है, और अल्लाह उसे माफ़ नहीं करता। लेकिन जो लोग तौबा कर लें और सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करें, उनके लिए अल्लाह की रहमत और जन्नत है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।



📜 आयत 19-23 — अल-अहकाफ

19وَلِكُلٍّ دَرَجَاتٌ مِّمَّا عَمِلُوا ۖ وَلِيُوَفِّيَهُمْ أَعْمَالَهُمْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और लोगों ने जैसे काम किये होंगे उसी के मुताबिक सबके दर्जे होंगे और ये इसलिए कि ख़ुदा उनके आमाल का उनको पूरा पूरा बदला दे और उन पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएं
20وَيَوْمَ يُعْرَضُ الَّذِينَ كَفَرُوا عَلَى النَّارِ أَذْهَبْتُمْ طَيِّبَاتِكُمْ فِي حَيَاتِكُمُ الدُّنْيَا وَاسْتَمْتَعْتُم بِهَا فَالْيَوْمَ تُجْزَوْنَ عَذَابَ الْهُونِ بِمَا كُنتُمْ تَسْتَكْبِرُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَبِمَا كُنتُمْ تَفْسُقُونَ
और जिस दिन कुफ्फार जहन्नुम के सामने लाएँ जाएँगे (तो उनसे कहा जाएगा कि) तुमने अपनी दुनिया की ज़िन्दगी में अपने मज़े उड़ा चुके और उसमें ख़ूब चैन कर चुके तो आज तुम पर ज़िल्लत का अज़ाब किया जाएगा इसलिए कि तुम अपनी ज़मीन में अकड़ा करते थे और इसलिए कि तुम बदकारियां करते थे
21۞ وَاذْكُرْ أَخَا عَادٍ إِذْ أَنذَرَ قَوْمَهُ بِالْأَحْقَافِ وَقَدْ خَلَتِ النُّذُرُ مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
और (ऐ रसूल) तुम आद को भाई (हूद) को याद करो जब उन्होंने अपनी क़ौम को (सरज़मीन) अहक़ाफ में डराया और उनके पहले और उनके बाद भी बहुत से डराने वाले पैग़म्बर गुज़र चुके थे (और हूद ने अपनी क़ौम से कहा) कि ख़ुदा के सिवा किसी की इबादत न करो क्योंकि तुम्हारे बारे में एक बड़े सख्त दिन के अज़ाब से डरता हूँ
22قَالُوا أَجِئْتَنَا لِتَأْفِكَنَا عَنْ آلِهَتِنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
वह बोले क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि हमको हमारे माबूदों से फेर दो तो अगर तुम सच्चे हो तो जिस अज़ाब की तुम हमें धमकी देते हो ले आओ
23قَالَ إِنَّمَا الْعِلْمُ عِندَ اللَّهِ وَأُبَلِّغُكُم مَّا أُرْسِلْتُ بِهِ وَلَٰكِنِّي أَرَاكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ
हूद ने कहा (इसका) इल्म तो बस ख़ुदा के पास है और (मैं जो एहकाम देकर भेजा गया हूँ) वह तुम्हें पहुँचाए देता हूँ मगर मैं तुमको देखता हूँ कि तुम जाहिल लोग हो
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अनुवाद — अल-अहकाफ 21

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Tuesday, August 18, 2026

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