मुहम्मद · 30/38
अनुवाद उच्चारण — सूरा मुहम्मद
وَلَوْ نَشَاءُ لَأَرَيْنَاكَهُمْ فَلَعَرَفْتَهُم بِسِيمَاهُمْ ۚ وَلَتَعْرِفَنَّهُمْ فِي لَحْنِ الْقَوْلِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ أَعْمَالَكُمْ ۝٣٠
Wa law nashaaa`u la-arainaakahum fala `araftahum bi seemaahum; wa lata`rifan nahum fee lahnil qawl; wallaahu ya`lamu a`maalakum
📖 हिंदी अर्थ
तो हम चाहते तो हम तुम्हें इन लोगों को दिखा देते तो तुम उनकी पेशानी ही से उनको पहचान लेते अगर तुम उन्हें उनके अन्दाज़े गुफ्तगू ही से ज़रूर पहचान लोगे और ख़ुदा तो तुम्हारे आमाल से वाक़िफ है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِسِيمَاهُمْ (उनके चिह्नों से): अर्थात उनकी पहचान के निशानों से।
  • لَحْنِ الْقَوْلِ (बात के लहजे/भाव से): अर्थात बात के अंदाज़ और उसके संकेत से, जो उनके दिल की बात को प्रकट करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अगर हम चाहते तो आपको इन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) को उनके चेहरों और उनकी शक्लों से पहचाना देते, और आप उन्हें उनके निशानों से पहचान लेते। लेकिन अल्लाह ने अपनी हिकमत से उन्हें छिपाए रखा, ताकि लोगों का इम्तिहान हो। हालाँकि, आप उन्हें उनकी बातों के लहजे और अंदाज़ से ज़रूर पहचान लेंगे। जब वे आपसे बात करते हैं या आपके बारे में बातें करते हैं, तो उनकी बातों में उनकी नफ़रत, दुश्मनी और बुरे इरादों के संकेत साफ़ झलकते हैं। उनके कथनों की बनावट और उनके अंदाज़ से उनके दिलों की ख़राबी प्रकट हो जाती है।

और अल्लाह तआला तुम सबके आमाल (कर्मों) को भली-भाँति जानता है—चाहे वे अच्छे हों या बुरे, छिपे हों या खुले। वह हर एक को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का ज्ञान असीम है—वह हर दिल के राज़ जानता है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को साफ़ रखें, अपनी ज़ुबान को सच्चा रखें, और अपने आमाल को नेक बनाएँ। क्योंकि मुनाफ़िक़ी (कपट) की पहचान भले ही दुनिया में छिपी रहे, लेकिन अल्लाह की नज़र में सब कुछ वाज़ेह (स्पष्ट) है। एक मोमिन की पहचान उसकी सच्चाई और उसके अच्छे अख़लाक़ से होती है। आइए, हम अपनी ज़ुबान को सच्चाई का आईना बनाएँ और अपने दिलों को नेकियों से रोशन करें, ताकि हम अल्लाह के यहाँ कामयाब हों। याद रखें, अल्लाह हर छोटे-बड़े अमल का हिसाब लेगा और अपनी रहमत से नेक लोगों को जन्नत से नवाज़ेगा।



📜 आयत 28-32 — सूरा मुहम्मद

28ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اتَّبَعُوا مَا أَسْخَطَ اللَّهَ وَكَرِهُوا رِضْوَانَهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَالَهُمْ
ये इस सबब से कि जिस चीज़ों से ख़ुदा नाख़ुश है उसकी तो ये लोग पैरवी करते हैं और जिसमें ख़ुदा की ख़ुशी है उससे बेज़ार हैं तो ख़ुदा ने भी उनकी कारस्तानियों को अकारत कर दिया
29أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ أَن لَّن يُخْرِجَ اللَّهُ أَضْغَانَهُمْ
क्या वह लोग जिनके दिलों में (नेफ़ाक़ का) मर्ज़ है ये ख्याल करते हैं कि ख़ुदा दिल के कीनों को भी न ज़ाहिर करेगा
30وَلَوْ نَشَاءُ لَأَرَيْنَاكَهُمْ فَلَعَرَفْتَهُم بِسِيمَاهُمْ ۚ وَلَتَعْرِفَنَّهُمْ فِي لَحْنِ الْقَوْلِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ أَعْمَالَكُمْ
तो हम चाहते तो हम तुम्हें इन लोगों को दिखा देते तो तुम उनकी पेशानी ही से उनको पहचान लेते अगर तुम उन्हें उनके अन्दाज़े गुफ्तगू ही से ज़रूर पहचान लोगे और ख़ुदा तो तुम्हारे आमाल से वाक़िफ है
31وَلَنَبْلُوَنَّكُمْ حَتَّىٰ نَعْلَمَ الْمُجَاهِدِينَ مِنكُمْ وَالصَّابِرِينَ وَنَبْلُوَ أَخْبَارَكُمْ
और हम तुम लोगों को ज़रूर आज़माएँगे ताकि तुममें जो लोग जेहाद करने वाले और (तकलीफ़) झेलने वाले हैं उनको देख लें और तुम्हारे हालात जाँच लें
32إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَشَاقُّوا الرَّسُولَ مِن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَىٰ لَن يَضُرُّوا اللَّهَ شَيْئًا وَسَيُحْبِطُ أَعْمَالَهُمْ
बेशक जिन लोगों पर (दीन की) सीधी राह साफ़ ज़ाहिर हो गयी उसके बाद इन्कार कर बैठे और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोका और पैग़म्बर की मुख़ालेफ़त की तो ख़ुदा का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेंगे और वह उनका सब किया कराया अक़ारत कर देगा
मुहम्मदकुरान सूची
38आयत
मदनीअवतरण स्थान
30आयत

अनुवाद — मुहम्मद 30

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Thursday, October 1, 2026

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