अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِسِيمَاهُمْ (उनके चिह्नों से): अर्थात उनकी पहचान के निशानों से।
- لَحْنِ الْقَوْلِ (बात के लहजे/भाव से): अर्थात बात के अंदाज़ और उसके संकेत से, जो उनके दिल की बात को प्रकट करता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अगर हम चाहते तो आपको इन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) को उनके चेहरों और उनकी शक्लों से पहचाना देते, और आप उन्हें उनके निशानों से पहचान लेते। लेकिन अल्लाह ने अपनी हिकमत से उन्हें छिपाए रखा, ताकि लोगों का इम्तिहान हो। हालाँकि, आप उन्हें उनकी बातों के लहजे और अंदाज़ से ज़रूर पहचान लेंगे। जब वे आपसे बात करते हैं या आपके बारे में बातें करते हैं, तो उनकी बातों में उनकी नफ़रत, दुश्मनी और बुरे इरादों के संकेत साफ़ झलकते हैं। उनके कथनों की बनावट और उनके अंदाज़ से उनके दिलों की ख़राबी प्रकट हो जाती है।
और अल्लाह तआला तुम सबके आमाल (कर्मों) को भली-भाँति जानता है—चाहे वे अच्छे हों या बुरे, छिपे हों या खुले। वह हर एक को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का ज्ञान असीम है—वह हर दिल के राज़ जानता है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को साफ़ रखें, अपनी ज़ुबान को सच्चा रखें, और अपने आमाल को नेक बनाएँ। क्योंकि मुनाफ़िक़ी (कपट) की पहचान भले ही दुनिया में छिपी रहे, लेकिन अल्लाह की नज़र में सब कुछ वाज़ेह (स्पष्ट) है। एक मोमिन की पहचान उसकी सच्चाई और उसके अच्छे अख़लाक़ से होती है। आइए, हम अपनी ज़ुबान को सच्चाई का आईना बनाएँ और अपने दिलों को नेकियों से रोशन करें, ताकि हम अल्लाह के यहाँ कामयाब हों। याद रखें, अल्लाह हर छोटे-बड़े अमल का हिसाब लेगा और अपनी रहमत से नेक लोगों को जन्नत से नवाज़ेगा।
📜 आयत 28-32 — मुहम्मद
अनुवाद — मुहम्मद 30
सूरा मुहम्मद आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो हम चाहते तो हम तुम्हें इन लोगों को दिखा…सूरा आयत 30/38 — मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मुहम्मद सुनें, मुहम्मद अनुवाद, मुहम्मद mp3, मुहम्मद pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








