मुहम्मद · 34/38
अनुवाद उच्चारण — मुहम्मद
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ مَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَن يَغْفِرَ اللَّهُ لَهُمْ ۝٣٤
Innal lazeena kafaroo wa saddoo `an sabeelil laahi summa maatoo wa hum kuffaarun falany yaghfirallaahu lahum
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग काफ़िर हो गए और लोगों को ख़ुदा की राह से रोका, फिर काफिर ही मर गए तो ख़ुदा उनको हरगिज़ नहीं बख्शेगा तो तुम हिम्मत न हारो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَفَرُوا: अल्लाह पर ईमान न लाना, उसकी एकता और सच्चे दीन को नकारना।
  • صَدُّوا: स्वयं को रोकना और दूसरों को अल्लाह के मार्ग से रोकना।
  • سَبِيلِ اللهِ: अल्लाह का दीन (इस्लाम) और उसके द्वारा भेजे गए मार्गदर्शन।
  • مَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ: कुफ्र की हालत में मृत्यु को प्राप्त होना, बिना तौबा किए।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया, उसकी वह़दानिय्यत (एकता) को नहीं माना, और सिर्फ़ इतना ही नहीं बल्कि दूसरे लोगों को भी अल्लाह के रास्ते से रोका। उन्होंने न केवल खुद गुमराही का रास्ता अपनाया, बल्कि दूसरों को भी हिदायत की राह से भटकाने की कोशिश की। फिर उनकी मौत इसी हालत में आई—वे कुफ्र पर ही मर गए, बिना तौबा किए, बिना अपने किए पर पछतावा किए।

ऐसे लोगों के लिए अल्लाह की मग़फिरत (क्षमा) का दरवाज़ा बंद हो जाता है। अल्लाह उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगा, क्योंकि उन्होंने हक़ को जानते हुए भी उसे ठुकराया और मरते दम तक इसी अंधेरे में रहे। यह उनके कुफ्र और सद्ध (रोकने) की सज़ा है कि उन्हें क़यामत के दिन सबके सामने रुसवा किया जाएगा और उन्हें जहन्नुम की आग में डाला जाएगा, जहाँ वे हमेशा रहेंगे।

इस आयत का एक बहुत बड़ा सबक़ यह है कि अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है, लेकिन उसकी पकड़ भी बहुत सख्त है। जो व्यक्ति कुफ्र पर मर जाए, उसके लिए कोई उम्मीद नहीं। मगर इसका उल्टा मतलब यह भी है कि जो लोग कुफ्र में थे, लेकिन मरने से पहले तौबा कर लें, अल्लाह उन्हें माफ़ कर सकता है। अल्लाह की रहमत से कभी निराश न हों—जब तक साँस चल रही है, तौबा का दरवाज़ा खुला है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें चेतावनी देती है कि हम अपने ईमान की हिफ़ाज़त करें, किसी भी ऐसे काम से बचें जो हमें कुफ्र या गुनाह की तरफ ले जाए, और दूसरों को भी अल्लाह के रास्ते से रोकने वाला काम कभी न करें। साथ ही, यह हमें यह भी सिखाती है कि जो लोग अभी तक गुमराही में हैं, उनके लिए दुआ करें और उन्हें सच्चे रास्ते की दावत दें, ताकि वे मरने से पहले तौबा कर लें और अल्लाह की रहमत से महरूम न रहें। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 32-36 — मुहम्मद

32إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَشَاقُّوا الرَّسُولَ مِن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَىٰ لَن يَضُرُّوا اللَّهَ شَيْئًا وَسَيُحْبِطُ أَعْمَالَهُمْ
बेशक जिन लोगों पर (दीन की) सीधी राह साफ़ ज़ाहिर हो गयी उसके बाद इन्कार कर बैठे और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोका और पैग़म्बर की मुख़ालेफ़त की तो ख़ुदा का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेंगे और वह उनका सब किया कराया अक़ारत कर देगा
33۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ وَلَا تُبْطِلُوا أَعْمَالَكُمْ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा का हुक्म मानों और रसूल की फरमाँबरदारी करो और अपने आमाल को ज़ाया न करो
34إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ مَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَن يَغْفِرَ اللَّهُ لَهُمْ
बेशक जो लोग काफ़िर हो गए और लोगों को ख़ुदा की राह से रोका, फिर काफिर ही मर गए तो ख़ुदा उनको हरगिज़ नहीं बख्शेगा तो तुम हिम्मत न हारो
35فَلَا تَهِنُوا وَتَدْعُوا إِلَى السَّلْمِ وَأَنتُمُ الْأَعْلَوْنَ وَاللَّهُ مَعَكُمْ وَلَن يَتِرَكُمْ أَعْمَالَكُمْ
और (दुशमनों को)े सुलह की दावत न दो तुम ग़ालिब हो ही और ख़ुदा तो तुम्हारे साथ है और हरगिज़ तुम्हारे आमाल (के सवाब को कम न करेगा)
36إِنَّمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا لَعِبٌ وَلَهْوٌ ۚ وَإِن تُؤْمِنُوا وَتَتَّقُوا يُؤْتِكُمْ أُجُورَكُمْ وَلَا يَسْأَلْكُمْ أَمْوَالَكُمْ
दुनियावी ज़िन्दगी तो बस खेल तमाशा है और अगर तुम (ख़ुदा पर) ईमान रखोगे और परहेज़गारी करोगे तो वह तुमको तुम्हारे अज्र इनायत फरमाएगा और तुमसे तुम्हारे माल नहीं तलब करेगा
मुहम्मदकुरान सूची
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अनुवाद — मुहम्मद 34

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Tuesday, August 18, 2026

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