मुहम्मद · 35/38
अनुवाद उच्चारण — सूरा मुहम्मद
فَلَا تَهِنُوا وَتَدْعُوا إِلَى السَّلْمِ وَأَنتُمُ الْأَعْلَوْنَ وَاللَّهُ مَعَكُمْ وَلَن يَتِرَكُمْ أَعْمَالَكُمْ ۝٣٥
Falaa tahinoo wa tad`ooo ilas salmi wa antumul a`lawna wallaahu ma`akum wa lany yatirakum a`maalakum
📖 हिंदी अर्थ
और (दुशमनों को)े सुलह की दावत न दो तुम ग़ालिब हो ही और ख़ुदा तो तुम्हारे साथ है और हरगिज़ तुम्हारे आमाल (के सवाब को कम न करेगा)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَهِنُوا = कमजोर मत पड़ो, हिम्मत मत हारो
  • السَّلْم = सुलह, शांति, समझौता
  • الأَعْلَوْنَ = तुम ही ऊपर हो, तुम्हीं ग़ालिब हो
  • يَتِرَكُمْ = तुम्हें कम कर दे, तुम्हारा हक़ मार दे, तुम्हें नुक़्सान पहुँचाए

तफ़सीर:

ऐ ईमान वालों! जिहाद के मैदान में कभी कमज़ोरी और बुज़दिली मत दिखाओ, और न ही दुश्मन से मिलकर सुलह की पहल ख़ुद करो, जबकि तुम्हारा रुतबा उनसे बुलंद है और तुम्हारा दबदबा उन पर क़ायम है। यह बात साफ़ समझ लो कि अल्लाह तुम्हारे साथ है — उसकी मदद, नुसरत और ताइद तुम्हारे शामिल-ए-हाल है। यही वजह है कि तुम्हें किसी से डरने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि जिस क़ौम के साथ अल्लाह हो, उसकी कभी हार नहीं होती।

अल्लाह तआला ने तुम्हें यह बड़ी ख़ुशख़बरी दी है कि तुम ग़ालिब रहोगे और दुश्मन पर फ़तह पाओगे। लेकिन याद रखो, यह फ़तह उन्हीं को मिलती है जो साबित-क़दम रहते हैं, जो अपने ईमान पर डटे रहते हैं और जिहाद से पीछे नहीं हटते। जो लोग अल्लाह की राह में जान और माल खर्च करते हैं, अल्लाह उनके अमल को कभी ज़ाइया नहीं करता — न उनकी नेकियों में कमी आती है, न उनका अज्र घटता है। बल्कि अल्लाह अपने फ़ज़ल और करम से उन्हें और भी ज़्यादा देता है।

यह आयत मुसलमानों के लिए एक प्यारा पैग़ाम है कि जब तक तुम अल्लाह से जुड़े रहोगे, अल्लाह तुम्हारे साथ रहेगा। कमज़ोरी और डर के बजाय अल्लाह पर भरोसा रखो, क्योंकि अल्लाह वादा कर चुका है कि वह अपने बंदों के अच्छे कामों को कभी बेकार नहीं जाने देगा। यही ईमान की ताक़त है — जब दिल में यक़ीन हो कि अल्लाह हमारे साथ है, तो दुनिया की कोई ताक़त हमें नहीं हरा सकती।



📜 आयत 33-37 — सूरा मुहम्मद

33۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ وَلَا تُبْطِلُوا أَعْمَالَكُمْ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा का हुक्म मानों और रसूल की फरमाँबरदारी करो और अपने आमाल को ज़ाया न करो
34إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ مَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَن يَغْفِرَ اللَّهُ لَهُمْ
बेशक जो लोग काफ़िर हो गए और लोगों को ख़ुदा की राह से रोका, फिर काफिर ही मर गए तो ख़ुदा उनको हरगिज़ नहीं बख्शेगा तो तुम हिम्मत न हारो
35فَلَا تَهِنُوا وَتَدْعُوا إِلَى السَّلْمِ وَأَنتُمُ الْأَعْلَوْنَ وَاللَّهُ مَعَكُمْ وَلَن يَتِرَكُمْ أَعْمَالَكُمْ
और (दुशमनों को)े सुलह की दावत न दो तुम ग़ालिब हो ही और ख़ुदा तो तुम्हारे साथ है और हरगिज़ तुम्हारे आमाल (के सवाब को कम न करेगा)
36إِنَّمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا لَعِبٌ وَلَهْوٌ ۚ وَإِن تُؤْمِنُوا وَتَتَّقُوا يُؤْتِكُمْ أُجُورَكُمْ وَلَا يَسْأَلْكُمْ أَمْوَالَكُمْ
दुनियावी ज़िन्दगी तो बस खेल तमाशा है और अगर तुम (ख़ुदा पर) ईमान रखोगे और परहेज़गारी करोगे तो वह तुमको तुम्हारे अज्र इनायत फरमाएगा और तुमसे तुम्हारे माल नहीं तलब करेगा
37إِن يَسْأَلْكُمُوهَا فَيُحْفِكُمْ تَبْخَلُوا وَيُخْرِجْ أَضْغَانَكُمْ
और अगर वह तुमसे माल तलब करे और तुमसे चिमट कर माँगे भी तो तुम (ज़रूर) बुख्ल करने लगो
मुहम्मदकुरान सूची
38आयत
मदनीअवतरण स्थान
35आयत

अनुवाद — मुहम्मद 35

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Wednesday, September 30, 2026

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