अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَهِنُوا = कमजोर मत पड़ो, हिम्मत मत हारो
- السَّلْم = सुलह, शांति, समझौता
- الأَعْلَوْنَ = तुम ही ऊपर हो, तुम्हीं ग़ालिब हो
- يَتِرَكُمْ = तुम्हें कम कर दे, तुम्हारा हक़ मार दे, तुम्हें नुक़्सान पहुँचाए
तफ़सीर:
ऐ ईमान वालों! जिहाद के मैदान में कभी कमज़ोरी और बुज़दिली मत दिखाओ, और न ही दुश्मन से मिलकर सुलह की पहल ख़ुद करो, जबकि तुम्हारा रुतबा उनसे बुलंद है और तुम्हारा दबदबा उन पर क़ायम है। यह बात साफ़ समझ लो कि अल्लाह तुम्हारे साथ है — उसकी मदद, नुसरत और ताइद तुम्हारे शामिल-ए-हाल है। यही वजह है कि तुम्हें किसी से डरने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि जिस क़ौम के साथ अल्लाह हो, उसकी कभी हार नहीं होती।
अल्लाह तआला ने तुम्हें यह बड़ी ख़ुशख़बरी दी है कि तुम ग़ालिब रहोगे और दुश्मन पर फ़तह पाओगे। लेकिन याद रखो, यह फ़तह उन्हीं को मिलती है जो साबित-क़दम रहते हैं, जो अपने ईमान पर डटे रहते हैं और जिहाद से पीछे नहीं हटते। जो लोग अल्लाह की राह में जान और माल खर्च करते हैं, अल्लाह उनके अमल को कभी ज़ाइया नहीं करता — न उनकी नेकियों में कमी आती है, न उनका अज्र घटता है। बल्कि अल्लाह अपने फ़ज़ल और करम से उन्हें और भी ज़्यादा देता है।
यह आयत मुसलमानों के लिए एक प्यारा पैग़ाम है कि जब तक तुम अल्लाह से जुड़े रहोगे, अल्लाह तुम्हारे साथ रहेगा। कमज़ोरी और डर के बजाय अल्लाह पर भरोसा रखो, क्योंकि अल्लाह वादा कर चुका है कि वह अपने बंदों के अच्छे कामों को कभी बेकार नहीं जाने देगा। यही ईमान की ताक़त है — जब दिल में यक़ीन हो कि अल्लाह हमारे साथ है, तो दुनिया की कोई ताक़त हमें नहीं हरा सकती।
📜 आयत 33-37 — मुहम्मद
अनुवाद — मुहम्मद 35
सूरा मुहम्मद आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (दुशमनों को)े सुलह की दावत न दो तुम ग़ालिब…सूरा आयत 35/38 — मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मुहम्मद सुनें, मुहम्मद अनुवाद, मुहम्मद mp3, मुहम्मद pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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