अल-फतह · 2/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फतह
لِّيَغْفِرَ لَكَ اللَّهُ مَا تَقَدَّمَ مِن ذَنبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ وَيُتِمَّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكَ وَيَهْدِيَكَ صِرَاطًا مُّسْتَقِيمًا ۝٢
Liyaghfira lakal laahu maa taqaddama min zambika wa maa ta akhkhara wa yutimma ni`matahoo `alaika wa yahdiyaka siraatam mustaqeema
📖 हिंदी अर्थ
ताकि ख़ुदा तुम्हारी उम्मत के अगले और पिछले गुनाह माफ़ कर दे और तुम पर अपनी नेअमत पूरी करे और तुम्हें सीधी राह पर साबित क़दम रखे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِيَغْفِرَ لَكَ – ताकि वह तुम्हें क्षमा कर दे
  • مَا تَقَدَّمَ مِن ذَنبِكَ – तुम्हारे पिछले गुनाह
  • وَمَا تَأَخَّرَ – और आगे आने वाले (गुनाह)
  • وَيُتِمَّ نِعْمَتَهُ – और वह अपनी नेमत (कृपा) पूरी कर दे
  • صِرَاطًا مُّسْتَقِيمًا – सीधा रास्ता

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को यह खुशखबरी दी कि यह फ़तह (विजय) जो उन्हें अता की गई है, वह महज़ एक साधारण काम नहीं था, बल्कि इसके पीछे अल्लाह की बड़ी रहमतें और कृपाएँ छिपी हुई थीं। अल्लाह ने यह फ़तह इसलिए अता की ताकि वह अपने नबी ﷺ के अतीत और भविष्य के सभी छोटे-बड़े गुनाहों को माफ़ कर दे। यह अल्लाह की विशेष मुहब्बत और करम है कि उसने अपने नबी ﷺ को इस मकाम पर पहुँचाया कि उनकी हर छोटी-बड़ी कमी को माफ़ कर दिया जाए, और यह उनके इस फ़तह के दौरान की गई इबादतों, जिहाद और मुश्किलों को सहने की वजह से हुआ।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह अपनी नेमत तुम पर पूरी कर देगा, यानी तुम्हारे दीन को ग़ालिब करेगा, तुम्हारे दुश्मनों पर तुम्हें फ़तह देगा, और तुम्हारा नाम पूरी दुनिया में बुलंद करेगा। यह अल्लाह की तरफ से एक बड़ी नेमत है कि उसने इस उम्मत को ऐसा नबी दिया जिसके ज़रिए इस्लाम का नूर पूरी दुनिया में फैला।

और फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और वह तुम्हें सीधा रास्ता दिखाएगा" – यानी तुम्हें इस्लाम के सीधे रास्ते पर साबित-क़दम रखेगा, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं, कोई कमी नहीं। यह रास्ता वही रास्ता है जो अल्लाह ने अपने नबियों के लिए चुना है, और यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जब हम अल्लाह के दीन के लिए काम करते हैं, उसकी राह में मुश्किलें सहते हैं, तो अल्लाह हमें न सिर्फ़ दुनिया में इज़्ज़त देता है बल्कि हमारे गुनाहों को भी माफ़ कर देता है। यह अल्लाह का वादा है कि जो उसकी राह में निकलता है, वह उसे कभी नाकाम नहीं करता। हमें चाहिए कि हम अपने नबी ﷺ के इस रास्ते पर चलें, उनकी सुन्नत को अपनाएँ, और अल्लाह से दुआ करें कि हमें भी सीधे रास्ते पर साबित रखे। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 1-4 — सूरा अल-फतह

1إِنَّا فَتَحْنَا لَكَ فَتْحًا مُّبِينًا
(ऐ रसूल) ये हुबैदिया की सुलह नहीं बल्कि हमने हक़ीक़तन तुमको खुल्लम खुल्ला फतेह अता की
2لِّيَغْفِرَ لَكَ اللَّهُ مَا تَقَدَّمَ مِن ذَنبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ وَيُتِمَّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكَ وَيَهْدِيَكَ صِرَاطًا مُّسْتَقِيمًا
ताकि ख़ुदा तुम्हारी उम्मत के अगले और पिछले गुनाह माफ़ कर दे और तुम पर अपनी नेअमत पूरी करे और तुम्हें सीधी राह पर साबित क़दम रखे
3وَيَنصُرَكَ اللَّهُ نَصْرًا عَزِيزًا
और ख़ुदा तुम्हारी ज़बरदस्त मदद करे
4هُوَ الَّذِي أَنزَلَ السَّكِينَةَ فِي قُلُوبِ الْمُؤْمِنِينَ لِيَزْدَادُوا إِيمَانًا مَّعَ إِيمَانِهِمْ ۗ وَلِلَّهِ جُنُودُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا
वह (वही) ख़ुदा तो है जिसने मोमिनीन के दिलों में तसल्ली नाज़िल फरमाई ताकि अपने (पहले) ईमान के साथ और ईमान को बढ़ाएँ और सारे आसमान व ज़मीन के लशकर तो ख़ुदा ही के हैं और ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार हकीम है
अल-फतहकुरान सूची
29आयत
मदनीRevelation
2आयत

अनुवाद — अल-फतह 2

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Monday, September 7, 2026

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