अल-फतह · 3/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फतह
وَيَنصُرَكَ اللَّهُ نَصْرًا عَزِيزًا ۝٣
Wa yansurakal laahu nasran `azeezaa
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा तुम्हारी ज़बरदस्त मदद करे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نَصْرًا عَزِيزًا: ऐसी सहायता जो अत्यंत शक्तिशाली, प्रतिष्ठित और अजेय हो, जिसे कोई रोक न सके और जिसके साथ विजय और प्रभुत्व हो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को यह शुभ सूचना दी कि वह उन्हें ऐसी सहायता प्रदान करेगा जो अत्यंत शक्तिशाली और सम्मानित होगी। यह नस्र (सहायता) केवल दुश्मन को पीछे हटाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह ऐसी विजय होगी जिसमें दुश्मन पर पूर्ण प्रभुत्व, उनकी पराजय और इस्लाम की सर्वोच्चता शामिल होगी। इस नस्र को "अज़ीज़" कहा गया है क्योंकि यह ऐसी मज़बूत और अटल सहायता होगी जिसे कोई ताकत रोक नहीं सकेगी, और इसके साथ इस्लाम का झंडा बुलंद होगा।

यह वादा उस समय किया गया जब हुदैबियyah की संधि के बाद मुसलमानों को ज़ाहिरी तौर पर कमज़ोर महसूस किया जा रहा था, लेकिन अल्लाह ने बताया कि यही संधि एक बड़ी विजय का द्वार है। यह नस्र उन सभी कठिनाइयों, त्याग और धैर्य का फल था जो रास्ते में उठाए गए। अल्लाह का यह वादा सिर्फ़ नबी ﷺ के लिए नहीं, बल्कि हर उस मोमिन के लिए है जो अल्लाह के मार्ग में सब्र और इस्तिक़ामत (दृढ़ता) दिखाता है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी निराश नहीं होना चाहिए। भले ही हालात कितने भी कठिन हों, अल्लाह की मदद ज़रूर आती है, और वह मदद ऐसी होती है जो इज़्ज़त और कामयाबी लाती है। यह हमें यह भी सिखाता है कि सच्ची इज़्ज़त और शक्ति अल्लाह के पास है, और वही अपने बंदों को इज़्ज़त देता है। जो लोग अल्लाह के दीन की मदद करते हैं, अल्लाह उन्हें ऐसी नस्र देता है जो कभी ज़लील नहीं होती। यह आयत मोमिनों के दिलों में उम्मीद और हिम्मत पैदा करती है कि चाहे दुश्मन कितने भी ताकतवर क्यों न हों, अल्लाह की मदद सबसे बड़ी ताकत है।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-फतह

1إِنَّا فَتَحْنَا لَكَ فَتْحًا مُّبِينًا
(ऐ रसूल) ये हुबैदिया की सुलह नहीं बल्कि हमने हक़ीक़तन तुमको खुल्लम खुल्ला फतेह अता की
2لِّيَغْفِرَ لَكَ اللَّهُ مَا تَقَدَّمَ مِن ذَنبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ وَيُتِمَّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكَ وَيَهْدِيَكَ صِرَاطًا مُّسْتَقِيمًا
ताकि ख़ुदा तुम्हारी उम्मत के अगले और पिछले गुनाह माफ़ कर दे और तुम पर अपनी नेअमत पूरी करे और तुम्हें सीधी राह पर साबित क़दम रखे
3وَيَنصُرَكَ اللَّهُ نَصْرًا عَزِيزًا
और ख़ुदा तुम्हारी ज़बरदस्त मदद करे
4هُوَ الَّذِي أَنزَلَ السَّكِينَةَ فِي قُلُوبِ الْمُؤْمِنِينَ لِيَزْدَادُوا إِيمَانًا مَّعَ إِيمَانِهِمْ ۗ وَلِلَّهِ جُنُودُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا
वह (वही) ख़ुदा तो है जिसने मोमिनीन के दिलों में तसल्ली नाज़िल फरमाई ताकि अपने (पहले) ईमान के साथ और ईमान को बढ़ाएँ और सारे आसमान व ज़मीन के लशकर तो ख़ुदा ही के हैं और ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार हकीम है
5لِّيُدْخِلَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَيُكَفِّرَ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عِندَ اللَّهِ فَوْزًا عَظِيمًا
ताकि मोमिन मर्द और मोमिना औरतों को (बेहिश्त) के बाग़ों में जा पहुँचाए जिनके नीचे नहरें जारी हैं और ये वहाँ हमेशा रहेंगे और उनके गुनाहों को उनसे दूर कर दे और ये ख़ुदा के नज़दीक बड़ी कामयाबी है
अल-फतहकुरान सूची
29आयत
मदनीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-फतह 3

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सूरा आयत 3/29 — सूरा अल-फतह الفتح (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फतह सुनें, सूरा अल-फतह अनुवाद, सूरा अल-फतह mp3, सूरा अल-फतह pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.





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Monday, September 28, 2026

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