अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لا يَسْخَرْ: मज़ाक न उड़ाए, उपहास न करे
- قَوْمٌ: लोगों का समूह (पुरुष)
- عَسَى: संभावना है, आशा है
- تَلْمِزُوا: एक-दूसरे को बुरा-भला न कहो, ऐब न निकालो
- تَنَابَزُوا بِالْأَلْقَابِ: एक-दूसरे को बुरे नामों से न पुकारो
- بِئْسَ الِاسْمُ: कितना बुरा नाम है
- الفُسُوقُ: अवज्ञा, पाप, गुनाह
- الظَّالِمُونَ: अत्याचारी, जो अपनी ही आत्मा पर ज़ुल्म करते हैं
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान लाने वालों! अल्लाह तआला तुम्हें एक बहुत ही अहम और प्यारी नसीहत दे रहा है। कोई मर्द किसी दूसरे मर्द का मज़ाक न उड़ाए, और न ही कोई औरत किसी दूसरी औरत का उपहास करे। क्योंकि हो सकता है कि जिसे तुम हँसी का पात्र बना रहे हो, वह अल्लाह के यहाँ तुमसे बेहतर हो। अल्लाह के नज़दीक इज़्ज़त का पैमाना दुनियावी रूप-रंग, माल-दौलत या नस्ल नहीं, बल्कि तक़वा और अच्छे आचरण हैं। तुम किसी को कमज़ोर, ग़रीब या साधारण देखकर उसका मज़ाक उड़ाते हो, लेकिन शायद वही अल्लाह का नेक बंदा हो और तुमसे कहीं बढ़कर हो।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: अपने भाइयों को बुरा-भला न कहो, उनके ऐब न तलाशो और न ही उन्हें बुरे नामों या उपनामों से पुकारो। जैसे किसी को उसके किसी गुनाह या कमज़ोरी की वजह से बुरे लफ़्ज़ों से याद करना। यह बहुत बुरी बात है कि ईमान लाने के बाद, जब तुम मुसलमान कहलाए, तो तुम्हारी पहचान फ़िस्क़ (गुनाह) से हो — यानी लोग तुम्हें मज़ाक उड़ाने वाला, ऐब निकालने वाला या बुरे नामों से पुकारने वाला जानें। यह ईमान के बिल्कुल ख़िलाफ़ है।
और जो शख्स इन कामों से तौबा नहीं करता, वह अपनी ही रूह पर ज़ुल्म करता है — क्योंकि वह अपने आपको अल्लाह की नाराज़गी और अज़ाब में डालता है। इसलिए ऐ मोमिनों! अपनी ज़बानों को क़ाबू में रखो, दूसरों की इज़्ज़त को अपनी इज़्ज़त समझो, और याद रखो कि अल्लाह के यहाँ सबसे प्यारा वही है जो सबसे ज़्यादा परहेज़गार और अच्छे अख़लाक़ वाला हो।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में मुसलमानों के आपसी रिश्ते भाईचारे, मुहब्बत और इज़्ज़त पर क़ायम हैं। जो शख्स इन आदाब को अपनाता है, वह अल्लाह की मुहब्बत और रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलता है। और जो इनसे बचता है, उसके लिए अल्लाह ने तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है — तौबा करो, अल्लाह बख़्शने वाला और रहम करने वाला है।
📜 आयत 9-13 — अल-हुजुरात
अनुवाद — अल-हुजुरात 11
सूरा अल-हुजुरात आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों (तुम किसी क़ौम का) कोई मर्द ( दूसरी…सूरा आयत 11/18 — अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हुजुरात सुनें, अल-हुजुरात अनुवाद, अल-हुजुरात mp3, अल-हुजुरात pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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