अल-हुजुरात · 17/18
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हुजुरात
يَمُنُّونَ عَلَيْكَ أَنْ أَسْلَمُوا ۖ قُل لَّا تَمُنُّوا عَلَيَّ إِسْلَامَكُم ۖ بَلِ اللَّهُ يَمُنُّ عَلَيْكُمْ أَنْ هَدَاكُمْ لِلْإِيمَانِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝١٧
Yamunnoona `alaika an aslamoo qul laa tamunnoo `alaiya Islaamakum balillaahu yamunnu `alaikum an hadaakum lil eemaani in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम पर ये लोग (इसलाम लाने का) एहसान जताते हैं तुम (साफ़) कह दो कि तुम अपने इसलाम का मुझ पर एहसान न जताओ (बल्कि) अगर तुम (दावाए ईमान में) सच्चे हो तो समझो कि, ख़ुदा ने तुम पर एहसान किया कि उसने तुमको ईमान का रास्ता दिखाया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَمُنُّونَ – एहसान जताते हैं
  • أَنْ أَسْلَمُوا – इस बात पर कि उन्होंने इस्लाम क़बूल किया
  • لَا تَمُنُّوا – एहसान मत जताओ
  • هَدَاكُمْ – उसने तुम्हें मार्गदर्शन दिया / हिदायत दी
  • صَادِقِينَ – सच्चे / सच्चे दावे वाले

तफ़सीर:

यह आयत उन अरब के देहाती क़बीलों (अ'राब) के बारे में उतरी, जो नबी ﷺ के पास आकर इस्लाम क़बूल करते थे और फिर अपने इस्लाम को एक बड़ा एहसान समझकर आप ﷺ पर जताते थे। वे कहते थे: "हमने आपका साथ दिया, हमने आपकी मदद की, हमने इस्लाम क़बूल किया।" वे समझते थे कि इस्लाम लाकर उन्होंने आप ﷺ पर कोई बड़ा उपकार किया है।

अल्लाह ने इस आयत में उनकी इस सोच का खंडन किया और अपने नबी ﷺ को सिखाया कि आप उन्हें जवाब दें कि अपने इस्लाम का मुझ पर एहसान मत जताओ। यह एहसान मुझ पर नहीं, बल्कि खुद तुम्हारे ऊपर है। इस्लाम क़बूल करके तुमने अपना भला किया है, मेरा नहीं। इसका फ़ायदा तुम्हें ही मिलेगा — दुनिया में सच्ची हिदायत और आख़िरत में जन्नत।

असल में एहसान जताने का हक़ अल्लाह को है, क्योंकि उसी ने तुम्हें यह तौफ़ीक़ दी कि तुम ईमान लाए। अगर तुम सच्चे मुसलमान हो और सच्चे दिल से ईमान लाए हो, तो यह अल्लाह का एहसान है कि उसने तुम्हें हिदायत दी। यह तुम्हारा कोई बड़ा काम नहीं है जिस पर तुम नाज़ करो।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ देती है — कि किसी भी नेक काम को करके उसे दूसरों पर एहसान नहीं समझना चाहिए। जब हम इस्लाम पर चलते हैं, तो यह हमारा अल्लाह पर एहसान नहीं है, बल्कि अल्लाह का हम पर एहसान है कि उसने हमें सीधा रास्ता दिखाया। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह के शुक्रगुज़ार रहना चाहिए और अपनी नेकियों पर घमंड नहीं करना चाहिए।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इस्लाम एक नेमत है, एक बड़ी दौलत है। जिसे अल्लाह ने यह नेमत दी है, उसे चाहिए कि वह इस पर अल्लाह का शुक्र अदा करे और दूसरों पर एहसान जताने की बजाय उन्हें भी इस नेमत की तरफ़ बुलाए। इस्लाम की सच्चाई यह है कि हम अल्लाह के सामने अपनी कमज़ोरी और उसकी मेहरबानी को पहचानें — और यही विनम्रता हमें अल्लाह के और करीब लाती है।



📜 आयत 15-18 — सूरा अल-हुजुरात

15إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ ثُمَّ لَمْ يَرْتَابُوا وَجَاهَدُوا بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الصَّادِقُونَ
(सच्चे मोमिन) तो बस वही हैं जो ख़ुदा और उसके रसूल पर ईमान लाए फिर उन्होंने उसमें किसी तरह का शक़ शुबह न किया और अपने माल से और अपनी जानों से ख़ुदा की राह में जेहाद किया यही लोग (दावाए ईमान में) सच्चे हैं
16قُلْ أَتُعَلِّمُونَ اللَّهَ بِدِينِكُمْ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَاللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
(ऐ रसूल इनसे) पूछो तो कि क्या तुम ख़ुदा को अपनी दीदारी जताते हो और ख़ुदा तो जो कुछ आसमानों मे है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) जानता है और ख़ुदा हर चीज़ से ख़बरदार है
17يَمُنُّونَ عَلَيْكَ أَنْ أَسْلَمُوا ۖ قُل لَّا تَمُنُّوا عَلَيَّ إِسْلَامَكُم ۖ بَلِ اللَّهُ يَمُنُّ عَلَيْكُمْ أَنْ هَدَاكُمْ لِلْإِيمَانِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(ऐ रसूल) तुम पर ये लोग (इसलाम लाने का) एहसान जताते हैं तुम (साफ़) कह दो कि तुम अपने इसलाम का मुझ पर एहसान न जताओ (बल्कि) अगर तुम (दावाए ईमान में) सच्चे हो तो समझो कि, ख़ुदा ने तुम पर एहसान किया कि उसने तुमको ईमान का रास्ता दिखाया
18إِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ غَيْبَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
बेशक ख़ुदा तो सारे आसमानों और ज़मीन की छिपी हुई बातों को जानता है और जो तुम करते हो ख़ुदा उसे देख रहा है
अल-हुजुरातकुरान सूची
18आयत
मदनीअवतरण स्थान
17आयत

अनुवाद — अल-हुजुरात 17

सूरा अल-हुजुरात आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम पर ये लोग (इसलाम लाने का) एहसान…

सूरा आयत 17/18 — सूरा अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हुजुरात सुनें, सूरा अल-हुजुरात अनुवाद, सूरा अल-हुजुरात mp3, सूरा अल-हुजुरात pdf. आयत 15–18. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए