Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَتُعَلِّمُونَ — क्या तुम सिखाते/बताते हो?
- بِدِينِكُمْ — अपने धर्म (ईमान) के बारे में।
- يَعْلَمُ — वह जानता है।
- عَلِيمٌ — सब कुछ जानने वाला।
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इन देहाती अरबों से कहिए जो अपने ईमान का दावा करते हैं और कसमें खाते हैं कि हम सच्चे मोमिन हैं: “क्या तुम अल्लाह को अपने दीन की ख़बर देते हो? क्या तुम उसे बताना चाहते हो कि हमारे दिलों में ईमान है?” यह कितनी अजीब बात है! क्या अल्लाह को तुम्हारे बताने की ज़रूरत है? वह तो वह सब कुछ जानता है जो आसमानों में है और जो ज़मीन में है। उसके इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है — न तुम्हारे दिलों के राज़ छिपे हैं, न तुम्हारे अमल, न तुम्हारी नीयतें। वह हर चीज़ का पूरा ज्ञान रखता है।
यह आयत उन लोगों के बारे में उतरी जो सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान का दावा करते थे, लेकिन उनके दिलों में सच्चा ईमान नहीं था। वे नबी ﷺ के पास आकर कसमें खाते थे कि हम सच्चे मोमिन हैं, जबकि अल्लाह उनके दिलों का हाल खूब जानता था।
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि ईमान का दावा करना आसान है, लेकिन असली चीज़ दिल की पवित्रता और अल्लाह की रज़ा है। अल्लाह को किसी के बताने की ज़रूरत नहीं — वह तो हर दिल की गहराई तक देखता है। हमें चाहिए कि अपने ईमान को सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि अच्छे अमल और सच्ची नीयत से साबित करें। अल्लाह से कोई चीज़ छिपी नहीं है, इसलिए हमें उसके सामने सच्चे और ख़ालिस बनना चाहिए। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है — कि हम अल्लाह को अपने दिलों की सच्चाई दिखाएँ, न कि सिर्फ़ ज़ुबान से दावे करें। अल्लाह तआला अपने बंदों के दिलों का हाल जानता है और उसी के पास हर चीज़ का इल्म है।
📜 आयत 14-18 — सूरा अल-हुजुरात
अनुवाद — अल-हुजुरात 16
सूरा अल-हुजुरात आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल इनसे) पूछो तो कि क्या तुम ख़ुदा को…सूरा आयत 16/18 — सूरा अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हुजुरात सुनें, सूरा अल-हुजुरात अनुवाद, सूरा अल-हुजुरात mp3, सूरा अल-हुजुरात pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हुजुरात
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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