Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَغُضُّونَ – अपनी आवाज़ें नीची रखते हैं, धीमी करते हैं।
- أَصْوَاتَهُمْ – अपनी आवाज़ों को।
- امْتَحَنَ – परखा, आज़माया, खरा किया।
- لِلتَّقْوَى – परहेज़गारी के लिए, ईमानदारी और ख़ुदा से डरने के लिए।
तफ़सीर:
यह आयत उन मोमिनों की तारीफ़ कर रही है जो अल्लाह के रसूल ﷺ की बारगाह में पूरे अदब और एहतिराम के साथ पेश आते हैं। जब वे आप ﷺ से बात करते हैं, तो अपनी आवाज़ें नीची रखते हैं, ना चिल्लाते हैं और ना ही आप ﷺ की शान में कोई बेअदबी करते हैं। यह उनके दिल की गहरी मुहब्बत और अक़ीदत का सबूत है।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोग ही वे हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने परखकर तक़वा (परहेज़गारी) के लिए खरा और पाक कर दिया है। यानी अल्लाह ने उनके दिलों को अपनी मुहब्बत, अपने रसूल की ताज़ीम और दीन की सच्चाई से भर दिया है। उनके दिलों में जो नूर और हिदायत है, वह इसी अदब और एहतिराम की बदौलत है।
इसके बाद अल्लाह उन्हें दो बड़ी ख़ुशख़बरी देता है:
- मग़फ़िरत – उनके गुनाह माफ़ कर दिए जाएंगे, चाहे वे छोटे हों या बड़े।
- अज़ीम अज्र – उनके लिए बहुत बड़ा इनाम है, जो जन्नत है। यह इनाम उनकी इस अदब और तक़वा की बदौलत मिलेगा।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के सामने अदब और एहतिराम ही असली कसौटी है। जिसके दिल में जितना अदब होगा, उसका दिल उतना ही पाक और तक़वा से भरा होगा। आज हमारे लिए भी यही रास्ता है – रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत, उनके तरीक़े और उनके अदब को अपनाएं, तो अल्लाह हमारे दिलों को भी साफ़ करेगा और हमें भी मग़फ़िरत और अज़ीम अज्र अता करेगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि दीन में अदब और अख़लाक़ की कितनी अहमियत है। जो लोग अल्लाह के रसूल ﷺ की बारगाह में अदब से पेश आते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़ुबान, अपने अंदाज़ और अपने बर्ताव को नबी ﷺ की सुन्नत के मुताबिक़ बनाएं, ताकि हम भी उन मुबारक लोगों में शामिल हो सकें।
📜 आयत 1-5 — सूरा अल-हुजुरात
अनुवाद — अल-हुजुरात 3
सूरा अल-हुजुरात आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग रसूले ख़ुदा के सामने अपनी आवाज़ें धीमी…सूरा आयत 3/18 — सूरा अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हुजुरात सुनें, सूरा अल-हुजुरात अनुवाद, सूरा अल-हुजुरात mp3, सूरा अल-हुजुरात pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हुजुरात
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


