अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لا تَرْفَعُوا أَصْوَاتَكُمْ: अपनी आवाज़ें ऊँची न करो।
- فَوْقَ صَوْتِ النَّبِيِّ: नबी (ﷺ) की आवाज़ से ऊपर।
- وَلا تَجْهَرُوا لَهُ بِالْقَوْلِ: और उनसे बात करते समय ऊँची आवाज़ में बात न करो।
- كَجَهْرِ بَعْضِكُمْ لِبَعْضٍ: जिस तरह तुम आपस में एक-दूसरे से ऊँची आवाज़ में बात करते हो।
- أَن تَحْبَطَ أَعْمَالُكُمْ: (इसलिए) कि तुम्हारे (नेक) काम बेकार न हो जाएँ।
- وَأَنتُمْ لَا تَشْعُرُونَ: और तुम्हें (इसका) पता भी न चले।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान लाने वालों! जो अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) पर ईमान लाए और उनके बताए हुए कानूनों पर अमल करते हो! तुम्हें अपने नबी (ﷺ) के साथ पूरे आदाब (शिष्टाचार) से पेश आना चाहिए। जब तुम उनसे बात करो तो अपनी आवाज़ें उनकी आवाज़ से ऊँची न करो, और न ही उन्हें उस तरह पुकारो जिस तरह तुम आपस में एक-दूसरे को ऊँची आवाज़ से पुकारते हो। उनके साथ हमेशा नर्मी, अदब और इज़्ज़त से बात करो। उन्हें उनके नाम से न पुकारो (जैसे "या मुहम्मद" या "या अहमद"), बल्कि उन्हें "या रसूलल्लाह" (ऐ अल्लाह के रसूल!) और "या नबिय्यल्लाह" (ऐ अल्लाह के नबी!) कहकर पुकारो, और उनकी बात को पूरे तसल्ली (ध्यान) से सुनो।
यह आदाब इसलिए ज़रूरी है कि कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे नेक कामों का सवाब (अज्र) इस बेअदबी की वजह से बेकार हो जाए और तुम्हें इसका एहसास भी न हो। यह बहुत बड़ा नुक़सान है कि इंसान नेकियाँ करता रहे, लेकिन एक बेअदबी की वजह से उसकी सारी मेहनत अकारथ चली जाए और उसे पता भी न चले।
यह आदाब सिर्फ़ उस वक़्त के लिए नहीं था, बल्कि हर ज़माने के मुसलमानों के लिए यह सबक़ है कि वे अपने नबी (ﷺ) की शान में पूरा अदब रखें, उनके तरीक़े (सुन्नत) को अपनाएँ, उनके हुक्मों को सिर झुकाकर क़बूल करें, और उनके साथ अपनी मुहब्बत और इज़्ज़त का इज़हार करें। यही ईमान की निशानी है कि इंसान अपने नबी (ﷺ) को अपनी जान से भी ज़्यादा प्यारा समझे।
याद रखिए! नबी (ﷺ) की मुहब्बत और उनके आदाब का ख़याल रखना ईमान की बुनियाद है। जिसने उनके साथ अदब किया, अल्लाह ने उसे इज़्ज़त दी, और जिसने उनके साथ बेअदबी की, उसके आमाल (कर्म) बेकार हो गए। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने नबी (ﷺ) के तरीक़े पर चलें, उनकी सुन्नत को अपनाएँ, और उनके बताए हुए रास्ते पर साबित-क़दम रहें, ताकि हमारी नेकियाँ क़बूल हों और हमें पूरा अज्र मिले। यही हमारी कामयाबी है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 1-4 — सूरा अल-हुजुरात
अनुवाद — अल-हुजुरात 2
सूरा अल-हुजुरात आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों (बोलने में) अपनी आवाज़े पैग़म्बर की आवाज़ से…सूरा आयत 2/18 — सूरा अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हुजुरात सुनें, सूरा अल-हुजुरात अनुवाद, सूरा अल-हुजुरात mp3, सूरा अल-हुजुरात pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 7, 2026
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