Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُنَادُونَكَ (तुम्हें पुकारते हैं) — ऊँची आवाज़ से पुकारना।
- مِن وَرَاءِ الْحُجُرَاتِ (कक्षों के पीछे से) — यहाँ से मुराद नबी ﷺ की पवित्र पत्नियों के कक्ष हैं, जो मस्जिद-ए-नबवी के साथ जुड़े हुए थे।
- الْحُجُرَاتِ — "حُجْرَة" की जमा (बहुवचन), जिसका अर्थ है कमरा या कक्ष।
- لَا يَعْقِلُونَ (वे समझ नहीं रखते) — अर्थात उनमें अक्ल और समझ की कमी है, जो अदब (शिष्टाचार) का तक़ाज़ा करती।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ के अदब (शिष्टाचार) की तालीम देते हुए उन लोगों की मज़म्मत (निंदा) कर रहा है जो नबी ﷺ को उनके कक्षों के पीछे से ऊँची आवाज़ से पुकारते थे। ये लोग आम तौर पर देहाती (बद्दू) थे, जो शहरी तहज़ीब और नबी ﷺ की शान-ओ-मर्तबा के अदब से वाक़िफ़ नहीं थे। वे बे-तकल्लुफ़ी से नबी ﷺ को उनके घर के बाहर से पुकार लेते थे, जबकि अल्लाह के रसूल ﷺ की शान यह है कि उनके साथ पूरे अदब और एहतिराम से पेश आया जाए।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इनमें से अक्सर लोग अक्ल नहीं रखते, क्योंकि अक्लमंद इंसान अपने रसूल ﷺ के साथ इस तरह की बे-अदबी नहीं कर सकता। अक्ल का तक़ाज़ा है कि इंसान अल्लाह के नबी ﷺ की ताज़ीम करे, उनके सामने आवाज़ पस्त रखे, और उनके आराम और इज़्ज़त का ख़याल रखे। यह आयत उसूल-ए-अदब (शिष्टाचार के सिद्धांत) सिखाती है जो हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है — चाहे वह नबी ﷺ के ज़माने में हो या उनकी उम्मत में से हो।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि अख़लाक़ और अदब का भी नाम है। जिस तरह हमारे प्यारे नबी ﷺ का अदब करना हमारी ईमान की निशानी है, उसी तरह आज हमें उनकी सुन्नत और उनके तरीक़े का एहतिराम करना चाहिए। अल्लाह तआला हमें अक्ल और समझ दे, ताकि हम अपने नबी ﷺ की मुहब्बत और अदब को अपने दिलों में बसा सकें, और उनके बताए हुए रास्ते पर चलकर दुनिया और आख़िरत की कामयाबी हासिल करें। याद रखिए, जो शख्स नबी ﷺ के अदब का पाबंद होता है, अल्लाह उसे दुनिया में इज़्ज़त देता है और आख़िरत में उसके दर्जे बुलंद करता है।
📜 आयत 2-6 — सूरा अल-हुजुरात
अनुवाद — अल-हुजुरात 4
सूरा अल-हुजुरात आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) जो लोग तुमको हुजरों के बाहर से आवाज़…सूरा आयत 4/18 — सूरा अल-हुजुरात الحجرات (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हुजुरात सुनें, सूरा अल-हुजुरात अनुवाद, सूरा अल-हुजुरात mp3, सूरा अल-हुजुरात pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हुजुरात
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


