Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَيَبْلُوَنَّكُمُ: वह अवश्य तुम्हें परीक्षण में डालेगा।
- الصَّيْدِ: शिकार (स्थलीय जानवर)।
- تَنَالُهُ أَيْدِيكُمْ: जिसे तुम्हारे हाथ पकड़ सकें (छोटे जानवर, अंडे, बच्चे)।
- وَرِمَاحُكُمْ: और तुम्हारे भाले (बड़े जानवर)।
- لِيَعْلَمَ اللَّهُ: ताकि अल्लाह जान ले (अर्थात तुम्हारी परीक्षा लेकर तुम्हारा इरादा प्रकट करे)।
- بِالْغَيْبِ: बिना देखे, छिपे हुए (अल्लाह से डरना)।
- اعْتَدَى: हद से आगे बढ़ा (अर्थात हराम किया)।
- عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक अज़ाब।
तफ़सीर:
ऐ ईमान वालो! अल्लाह तआला तुम्हें एक ऐसी चीज़ से ज़रूर आज़माएगा जो शिकार के रूप में तुम्हारे पास आएगी, और वह इस तरह कि जब तुम इहराम की हालत में हो (हज या उमरा के दौरान), तो जंगली जानवर तुम्हारे इतने करीब आ जाएंगे कि उनके छोटे बच्चों और अंडों को तुम अपने हाथों से पकड़ सको, और बड़े जानवरों को अपने भालों से मार सको। यह सब कुछ इसलिए होगा ताकि अल्लाह तआला तुम्हारी परीक्षा ले और यह प्रकट हो जाए कि कौन उससे छिपकर (बिना देखे) डरता है—यानी जिसका ईमान पूर्ण है, वह अल्लाह के हुक्म की पाबंदी करते हुए शिकार से रुक जाएगा, भले ही शिकार उसके हाथ में हो। यह डर उसके दिल में अल्लाह के पूर्ण ज्ञान और उसकी निगरानी के यकीन से पैदा होता है।
इसके बाद जो कोई हद से आगे बढ़े और इहराम की हालत में शिकार करे, तो उसके लिए क़यामत के दिन दर्दनाक अज़ाब है, क्योंकि उसने अल्लाह के स्पष्ट आदेश की अवहेलना की।
दावती पहलू:
यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि अल्लाह की परीक्षा कभी-कभी उन चीज़ों से होती है जो बिल्कुल सामने होती हैं और आसानी से मिल सकती हैं। असली इम्तिहान यही है कि इंसान अल्लाह के हुक्म की खातिर उस चीज़ को छोड़ दे जो उसके सामने मौजूद हो। यही तक़वा (परहेज़गारी) है। अल्लाह उन लोगों से बेहद मुहब्बत करता है जो उससे छिपकर डरते हैं—यानी जब कोई उन्हें देखता नहीं, तब भी वे अल्लाह की नाराज़गी से बचते हैं। यही वह डर है जो इंसान को जन्नत तक पहुंचाता है। अल्लाह ने इस आयत में शिकार के ज़रिए हमें सिखाया कि दुनिया की चीज़ें चाहे कितनी ही आसान और करीब क्यों न हों, अगर अल्लाह ने रोका है, तो उन्हें छोड़ देना ही ईमान की निशानी है। यही वह लोग हैं जिनके लिए अल्लाह के पास बड़ा इनाम और बेहतरीन जज़ा है।
📜 आयत 92-96 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 94
सूरा अल-माइदा आयत 94 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों कुछ शिकार से जिन तक तुम्हारे हाथ और…सूरा आयत 94/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 92–96. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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