अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अयमान (أَيْمَان): क़समें, सौगंधें।
- जुन्ना (جُنَّة): ढाल, कवच, बचाव का साधन।
- सद्दू (صَدُّوا): रोका, बाधा डाली।
- सबीलिल्लाह (سَبِيلِ اللَّهِ): अल्लाह का रास्ता, यानी इस्लाम।
- मुहीन (مُهِين): अपमानित करने वाला, ज़लील करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के हाल का वर्णन कर रही है, जिन्होंने अपनी झूठी क़समों को ढाल बना लिया था। वे जब भी मुसलमानों के सामने आते, तो कसमें खाते कि हम तुम्हारे साथ हैं, हम तुम्हारे दुश्मनों के ख़िलाफ़ हैं — लेकिन यह सब सिर्फ़ जान बचाने और अपने माल-दौलत को महफ़ूज़ रखने की चाल थी। उन्होंने इस्लाम का ज़ाहिरी इज़हार किया ताकि उनके ख़िलाफ़ तलवार न उठाई जाए, और उनके ख़ून और माल को पवित्र ठहराया जाए।
इन क़समों के ज़रिए उन्होंने दो काम किए: एक तो यह कि वे खुद अल्लाह के रास्ते से रुके रहे, और दूसरे यह कि दूसरे लोगों को भी इस्लाम की राह से रोकते रहे। वे मुसलमानों के ख़िलाफ़ साज़िशें करते, उनके जज़्बे को कमज़ोर करते, और उन्हें जिहाद और अच्छे कामों से बाज़ रखते थे। उनकी यह हरकतें सिर्फ़ धोखा नहीं थीं, बल्कि अल्लाह की राह में रुकावट डालने की कोशिश थीं।
अल्लाह तआला ने उनके लिए दो चीज़ों का ऐलान किया: एक यह कि उनकी यह चालें उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकतीं, और दूसरे यह कि उनके लिए "अज़ाबुन मुहीन" है — यानी ऐसा अपमानजनक अज़ाब जो उन्हें रुसवा कर देगा और ज़लील कर देगा। यह अज़ाब उनके उस अहंकार और इनकार की सज़ा होगी, जो उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के साथ किया।
दावती पहलू (नसीहत):
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह के सामने कोई भी चाल, कोई भी बहाना, कोई भी झूठी क़सम काम नहीं आएगी। इंसान चाहे कितनी ही चतुराई से अपने कुकर्मों को छिपाए, अल्लाह तो हर दिल का राज़ जानता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने ईमान में सच्चे हों, अपने अमल में खरे हों, और कभी भी धोखे और मक्कारी का रास्ता न अपनाएँ। याद रखें, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसका अज़ाब उन लोगों के लिए है जो उसकी राह से रोकते हैं। सच्चा मुसलमान वही है जो अपनी ज़ुबान और दिल को सच्चाई पर क़ायम रखे, और दूसरों को भी अल्लाह की राह की तरफ़ बुलाए, न कि उससे रोके।
📜 आयत 14-18 — अल-मुजादिला
अनुवाद — अल-मुजादिला 16
सूरा अल-मुजादिला आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उन लोगों ने अपनी क़समों को सिपर बना लिया है…सूरा आयत 16/22 — अल-मुजादिला المجادلة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुजादिला सुनें, अल-मुजादिला अनुवाद, अल-मुजादिला mp3, अल-मुजादिला pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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