अल-अनआम · 42/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا إِلَىٰ أُمَمٍ مِّن قَبْلِكَ فَأَخَذْنَاهُم بِالْبَأْسَاءِ وَالضَّرَّاءِ لَعَلَّهُمْ يَتَضَرَّعُونَ ۝٤٢
Wa laqad arsalnaaa ilaaa umamim min qablika fa akhaznaahum bilbaasaaa`i waddarraaa`i la`allahum yata darra`oon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) जो उम्मतें तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं हम उनके पास भी बहुतेरे रसूल भेज चुके हैं फिर (जब नाफ़रमानी की) तो हमने उनको सख्ती
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِالْبَأْسَاءِ: कठिनाई, तंगी और भूख-प्यास जैसी आर्थिक मुसीबतें।
  • وَالضَّرَّاءِ: शारीरिक कष्ट, बीमारी और दुर्बलता।
  • يَتَضَرَّعُونَ: झुककर, विनम्रता और लाचारी के साथ अल्लाह से दुआ करें और उसकी ओर रुजू करें।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! हमने आपसे पहले भी कई उम्मतों (समुदायों) की ओर अपने रसूल भेजे। उन रसूलों ने उन्हें अल्लाह की इबादत और एकता की दावत दी, लेकिन उन लोगों ने उन्हें झुठलाया और उनकी बात मानने से इनकार कर दिया। जब उन्होंने सच्चाई को नकारा और अपनी सरकशी पर अड़े रहे, तो अल्लाह ने उन्हें सज़ा के तौर पर मुसीबतों में डाला। उनकी माली हालत खराब कर दी, उन्हें भूख, गरीबी और तंगी का सामना करना पड़ा। साथ ही उनके जिस्मों को बीमारियों, दर्द और कमज़ोरी में मुब्तला किया गया। इसका मक़सद यह था कि वे अपने गुनाहों से तौबा करें, अपने रब के सामने झुकें, उसकी रहमत की तरफ रुजू करें और उससे दुआ करें। अल्लाह चाहता था कि ये सख्तियाँ उनके दिलों को नरम कर दें और वे अपनी ग़लती पर पछताकर सीधे रास्ते पर आ जाएँ।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह अपने बंदों पर मुसीबतें इसलिए भेजता है ताकि वे उसकी तरफ लौटें, उसकी क़ुदरत को पहचानें और अपनी कमज़ोरी का एहसास करें। यह अल्लाह की रहमत है कि वह सज़ा के ज़रिए बंदे को सुधारने का मौक़ा देता है।
  2. मुसीबतें इंसान के लिए अज़ाब नहीं, बल्कि एक तरबियती (प्रशिक्षण) का ज़रिया होती हैं, जो उसे दुनिया की चमक-दमक से हटाकर आख़िरत की याद दिलाती हैं।
  3. इंसान को चाहिए कि जब भी कोई कठिनाई आए, वह तुरंत अल्लाह की तरफ रुजू करे, उससे दुआ करे और अपने गुनाहों से तौबा करे। यही सबसे अच्छा रास्ता है मुसीबतों से निकलने का।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के रसूलों की दावत को नकारना बहुत बड़ी ग़लती है, और इसका अंजाम बुरा होता है। इसलिए हमें अपने नबी ﷺ की सुन्नत को अपनाना चाहिए और उनकी शिक्षाओं पर अमल करना चाहिए।
  5. अल्लाह की रहमत बहुत वसी (व्यापक) है — वह बंदे को सज़ा देकर भी उसे अपनी तरफ बुला रहा है, ताकि वह सीधे रास्ते पर आए और जहन्नुम से बच जाए। यह अल्लाह के प्यार की निशानी है।
🎧 सुनें

📜 आयत 40-44 — अल-अनआम

40قُلْ أَرَأَيْتَكُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُ اللَّهِ أَوْ أَتَتْكُمُ السَّاعَةُ أَغَيْرَ اللَّهِ تَدْعُونَ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि क्या तुम यह समझते हो कि अगर तुम्हारे सामने ख़ुदा का अज़ाब आ जाए या तुम्हारे सामने क़यामत ही आ खड़ी मौजूद हो तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (बताओ कि मदद के वास्ते) क्या ख़ुदा को छोड़कर दूसरे को पुकारोगे
41بَلْ إِيَّاهُ تَدْعُونَ فَيَكْشِفُ مَا تَدْعُونَ إِلَيْهِ إِن شَاءَ وَتَنسَوْنَ مَا تُشْرِكُونَ
(दूसरों को तो क्या) बल्कि उसी को पुकारोगे फिर अगर वह चाहेगा तो जिस के वास्ते तुमने उसको पुकारा है उसे दफा कर देगा और (उस वक्त) तुम दूसरे माबूदों को जिन्हे तुम (ख़ुदा का) शरीक समझते थे भूल जाओगे
42وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا إِلَىٰ أُمَمٍ مِّن قَبْلِكَ فَأَخَذْنَاهُم بِالْبَأْسَاءِ وَالضَّرَّاءِ لَعَلَّهُمْ يَتَضَرَّعُونَ
और (ऐ रसूल) जो उम्मतें तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं हम उनके पास भी बहुतेरे रसूल भेज चुके हैं फिर (जब नाफ़रमानी की) तो हमने उनको सख्ती
43فَلَوْلَا إِذْ جَاءَهُم بَأْسُنَا تَضَرَّعُوا وَلَٰكِن قَسَتْ قُلُوبُهُمْ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और तकलीफ़ में गिरफ्तार किया ताकि वह लोग (हमारी बारगाह में) गिड़गिड़ाए तो जब उन (के सर) पर हमारा अज़ाब आ खड़ा हुआ तो वह लोग क्यों नहीं गिड़गिड़ाए (कि हम अज़ाब दफा कर देते) मगर उनके दिल तो सख्त हो गए थे ओर उनकी कारस्तानियों को शैतान ने आरास्ता कर दिखाया था (फिर क्योंकर गिड़गिड़ाते)
44فَلَمَّا نَسُوا مَا ذُكِّرُوا بِهِ فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ أَبْوَابَ كُلِّ شَيْءٍ حَتَّىٰ إِذَا فَرِحُوا بِمَا أُوتُوا أَخَذْنَاهُم بَغْتَةً فَإِذَا هُم مُّبْلِسُونَ
फिर जिसकी उन्हें नसीहत की गयी थी जब उसको भूल गए तो हमने उन पर (ढील देने के लिए) हर तरह की (दुनियावी) नेअमतों के दरवाज़े खोल दिए यहाँ तक कि जो नेअमतें उनको दी गयी थी जब उनको पाकर ख़ुश हुए तो हमने उन्हें नागाहाँ (एक दम) ले डाला तो उस वक्त वह नाउम्मीद होकर रह गए
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
42आयत

अनुवाद — अल-अनआम 42

सूरा अल-अनआम आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) जो उम्मतें तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं…

सूरा आयत 42/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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