अल-आराफ · 12/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قَالَ مَا مَنَعَكَ أَلَّا تَسْجُدَ إِذْ أَمَرْتُكَ ۖ قَالَ أَنَا خَيْرٌ مِّنْهُ خَلَقْتَنِي مِن نَّارٍ وَخَلَقْتَهُ مِن طِينٍ ۝١٢
Qaala maa mana`aka allaa tasjuda iz amartuka qaala ana khairum minhu khalaqtanee min naarinw wa khalaqtahoo min teen
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ने (शैतान से) फरमाया जब मैनें तुझे हुक्म दिया कि तू फिर तुझे सजदा करने से किसी ने रोका कहने लगा मैं उससे अफ़ज़ल हूँ (क्योंकि) तूने मुझे आग (ऐसे लतीफ अनसर) से पैदा किया
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا مَنَعَكَ: किस चीज़ ने तुम्हें रोका?
  • أَلَّا تَسْجُدَ: इस बात से कि तुम सजदा करो (यहाँ "لا" ज़ाइदा है, यानी सिर्फ़ सजदा करने से रोका)।
  • إِذْ أَمَرْتُكَ: जबकि मैंने तुम्हें आदेश दिया।
  • خَيْرٌ مِنْهُ: उससे बेहतर हूँ।
  • خَلَقْتَنِي مِن نَّارٍ: तूने मुझे आग से पैदा किया।
  • خَلَقْتَهُ مِن طِينٍ: और उसे (आदम को) मिट्टी से पैदा किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला ने आदम अलैहिस्सलाम को पैदा करके सभी फ़रिश्तों को उन्हें सजदा करने का आदेश दिया, तो सभी फ़रिश्तों ने आज्ञा का पालन किया, लेकिन इब्लीस ने घमंड और अहंकार के कारण सजदा करने से इनकार कर दिया। तब अल्लाह तआला ने उससे पूछा: "ऐ इब्लीस! किस चीज़ ने तुम्हें रोका कि तुम सजदा नहीं करते, जबकि मैंने तुम्हें स्पष्ट आदेश दिया था?" यह प्रश्न डांट और फटकार के रूप में था, ताकि वह अपनी गलती समझे और तौबा कर ले।

लेकिन इब्लीस ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय घमंड और अहंकार से जवाब दिया: "मैं उससे बेहतर हूँ। तूने मुझे आग से पैदा किया है और उसे मिट्टी से पैदा किया है।" उसने सोचा कि आग मिट्टी से बेहतर और उत्तम है, क्योंकि आग रोशन, ऊपर उठने वाली और जलाने वाली होती है, जबकि मिट्टी नीची और भारी होती है। इस प्रकार उसने अपनी निजी राय को अल्लाह के आदेश पर प्राथमिकता दी और अपने अहंकार की वजह से अल्लाह के स्पष्ट हुक्म की अवहेलना की।

यह इब्लीस की सबसे बड़ी भूल थी कि उसने अल्लाह के फैसले को अपनी सोच से बदलने की कोशिश की। असल में, अल्लाह तआला ने आदम को मिट्टी से पैदा करके उसे सम्मान दिया, क्योंकि मिट्टी से वनस्पति उगती है, जीवन का आधार है, और उसमें नम्रता और स्थिरता है। जबकि आग का स्वभाव विनाश और जलन है। अल्लाह तआला ने आदम को अपनी रूह फूंकी, उसे ज्ञान सिखाया और फ़रिश्तों से सजदा करवाया — यह आदम की श्रेष्ठता का प्रमाण है, न कि उसके पैदा होने के तत्व का।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह के आदेश के सामने अपनी राय, अपनी सोच या अपनी श्रेष्ठता का दावा करना कितना बड़ा पाप है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाए, चाहे उसे समझ आए या न आए। क्योंकि अल्लाह ही सबसे बुद्धिमान और जानने वाला है, और उसका हर फैसला हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित होता है। यही विनम्रता और आज्ञाकारिता ही तो इंसान को फ़रिश्तों से भी ऊँचा बनाती है, और यही अहंकार और घमंड इंसान को इब्लीस जैसा बना सकता है।

आइए हम अपने जीवन में अल्लाह के आदेशों को सबसे ऊपर रखें, अपनी सोच और राय को उसके हुक्म के आगे झुकाएँ, और घमंड से बचें। याद रखें, अल्लाह के करीब होने का रास्ता विनम्रता और आज्ञाकारिता से होकर जाता है, न कि अहंकार और दंभ से।

🎧 सुनें

📜 आयत 10-14 — अल-आराफ

10وَلَقَدْ مَكَّنَّاكُمْ فِي الْأَرْضِ وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَايِشَ ۗ قَلِيلًا مَّا تَشْكُرُونَ
और (ऐ बनीआदम) हमने तो यक़ीनन तुमको ज़मीन में क़ुदरत व इख़तेदार दिया और उसमें तुम्हारे लिए असबाब ज़िन्दगी मुहय्या किए (मगर) तुम बहुत ही कम शुक्र करते हो
11وَلَقَدْ خَلَقْنَاكُمْ ثُمَّ صَوَّرْنَاكُمْ ثُمَّ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ لَمْ يَكُن مِّنَ السَّاجِدِينَ
हालाकि इसमें तो शक ही नहीं कि हमने तुम्हारे बाप आदम को पैदा किया फिर तुम्हारी सूरते बनायीं फिर हमनें फ़रिश्तों से कहा कि तुम सब के सब आदम को सजदा करो तो सब के सब झुक पड़े मगर शैतान कि वह सजदा करने वालों में शामिल न हुआ।
12قَالَ مَا مَنَعَكَ أَلَّا تَسْجُدَ إِذْ أَمَرْتُكَ ۖ قَالَ أَنَا خَيْرٌ مِّنْهُ خَلَقْتَنِي مِن نَّارٍ وَخَلَقْتَهُ مِن طِينٍ
ख़ुदा ने (शैतान से) फरमाया जब मैनें तुझे हुक्म दिया कि तू फिर तुझे सजदा करने से किसी ने रोका कहने लगा मैं उससे अफ़ज़ल हूँ (क्योंकि) तूने मुझे आग (ऐसे लतीफ अनसर) से पैदा किया
13قَالَ فَاهْبِطْ مِنْهَا فَمَا يَكُونُ لَكَ أَن تَتَكَبَّرَ فِيهَا فَاخْرُجْ إِنَّكَ مِنَ الصَّاغِرِينَ
और उसको मिट्टी (ऐसी कशीफ़ अनसर) से पैदा किया ख़ुदा ने फरमाया (तुझको ये ग़ुरूर है) तो बेहश्त से नीचे उतर जाओ क्योंकि तेरी ये मजाल नहीं कि तू यहाँ रहकर ग़ुरूर करे तो यहाँ से (बाहर) निकल बेशक तू ज़लील लोगों से है
14قَالَ أَنظِرْنِي إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
कहने लगा तो (ख़ैर) हमें उस दिन तक की (मौत से) मोहलत दे
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अनुवाद — अल-आराफ 12

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Tuesday, August 18, 2026

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