अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا مَنَعَكَ: किस चीज़ ने तुम्हें रोका?
- أَلَّا تَسْجُدَ: इस बात से कि तुम सजदा करो (यहाँ "لا" ज़ाइदा है, यानी सिर्फ़ सजदा करने से रोका)।
- إِذْ أَمَرْتُكَ: जबकि मैंने तुम्हें आदेश दिया।
- خَيْرٌ مِنْهُ: उससे बेहतर हूँ।
- خَلَقْتَنِي مِن نَّارٍ: तूने मुझे आग से पैदा किया।
- خَلَقْتَهُ مِن طِينٍ: और उसे (आदम को) मिट्टी से पैदा किया।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह तआला ने आदम अलैहिस्सलाम को पैदा करके सभी फ़रिश्तों को उन्हें सजदा करने का आदेश दिया, तो सभी फ़रिश्तों ने आज्ञा का पालन किया, लेकिन इब्लीस ने घमंड और अहंकार के कारण सजदा करने से इनकार कर दिया। तब अल्लाह तआला ने उससे पूछा: "ऐ इब्लीस! किस चीज़ ने तुम्हें रोका कि तुम सजदा नहीं करते, जबकि मैंने तुम्हें स्पष्ट आदेश दिया था?" यह प्रश्न डांट और फटकार के रूप में था, ताकि वह अपनी गलती समझे और तौबा कर ले।
लेकिन इब्लीस ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय घमंड और अहंकार से जवाब दिया: "मैं उससे बेहतर हूँ। तूने मुझे आग से पैदा किया है और उसे मिट्टी से पैदा किया है।" उसने सोचा कि आग मिट्टी से बेहतर और उत्तम है, क्योंकि आग रोशन, ऊपर उठने वाली और जलाने वाली होती है, जबकि मिट्टी नीची और भारी होती है। इस प्रकार उसने अपनी निजी राय को अल्लाह के आदेश पर प्राथमिकता दी और अपने अहंकार की वजह से अल्लाह के स्पष्ट हुक्म की अवहेलना की।
यह इब्लीस की सबसे बड़ी भूल थी कि उसने अल्लाह के फैसले को अपनी सोच से बदलने की कोशिश की। असल में, अल्लाह तआला ने आदम को मिट्टी से पैदा करके उसे सम्मान दिया, क्योंकि मिट्टी से वनस्पति उगती है, जीवन का आधार है, और उसमें नम्रता और स्थिरता है। जबकि आग का स्वभाव विनाश और जलन है। अल्लाह तआला ने आदम को अपनी रूह फूंकी, उसे ज्ञान सिखाया और फ़रिश्तों से सजदा करवाया — यह आदम की श्रेष्ठता का प्रमाण है, न कि उसके पैदा होने के तत्व का।
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह के आदेश के सामने अपनी राय, अपनी सोच या अपनी श्रेष्ठता का दावा करना कितना बड़ा पाप है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाए, चाहे उसे समझ आए या न आए। क्योंकि अल्लाह ही सबसे बुद्धिमान और जानने वाला है, और उसका हर फैसला हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित होता है। यही विनम्रता और आज्ञाकारिता ही तो इंसान को फ़रिश्तों से भी ऊँचा बनाती है, और यही अहंकार और घमंड इंसान को इब्लीस जैसा बना सकता है।
आइए हम अपने जीवन में अल्लाह के आदेशों को सबसे ऊपर रखें, अपनी सोच और राय को उसके हुक्म के आगे झुकाएँ, और घमंड से बचें। याद रखें, अल्लाह के करीब होने का रास्ता विनम्रता और आज्ञाकारिता से होकर जाता है, न कि अहंकार और दंभ से।
📜 आयत 10-14 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 12
सूरा अल-आराफ आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ने (शैतान से) फरमाया जब मैनें तुझे हुक्म दिया…सूरा आयत 12/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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