अल-आराफ · 149/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَلَمَّا سُقِطَ فِي أَيْدِيهِمْ وَرَأَوْا أَنَّهُمْ قَدْ ضَلُّوا قَالُوا لَئِن لَّمْ يَرْحَمْنَا رَبُّنَا وَيَغْفِرْ لَنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ ۝١٤٩
Wa lammaa suqita feee aideehim wa ra aw annahum qad dalloo qaaloo la`il lam yarhamnaa Rabbunaa wa yaghfir lanaa lanakoonanna minal khaasireen
📖 हिंदी अर्थ
और आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते थे और जब वह पछताए और उन्होने अपने को यक़ीनी गुमराह देख लिया तब कहने लगे कि अगर हमारा परदिगार हम पर रहम नहीं करेगा और हमारा कुसूर न माफ़ करेगा तो हम यक़ीनी घाटा उठाने वालों में हो जाएगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُقِطَ فِي أَيْدِيهِمْ: अर्थात उन्हें अपनी गलती का पछतावा हुआ, वे शर्मिंदा और लज्जित हुए।
  • ضَلُّوا: वे सत्य मार्ग से भटक गए।
  • الْخَاسِرِينَ: वे लोग जिन्होंने अपना नुकसान कर लिया, दुनिया और आख़िरत दोनों में घाटे में रहे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम के पास लौटे और उन्होंने देखा कि उनकी क़ौम ने बछड़े की पूजा करके बहुत बड़ा गुनाह किया है, तो वे लोग जिन्होंने सजदा किया था, उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उनके दिल टूट गए, वे शर्मिंदा हुए और उन्हें यक़ीन हो गया कि वे सचमुच सीधे रास्ते से भटक गए हैं और अल्लाह की इबादत छोड़कर एक बेजान बछड़े की पूजा करके अपने आप को बहुत बड़े नुकसान में डाल दिया है।

इस पछतावे और नदामत की हालत में उन्होंने अल्लाह की तरफ रुजू किया और अपनी कमज़ोरी और गुनाह का इक़रार करते हुए कहा: "ऐ हमारे रब! अगर तूने हम पर रहम नहीं किया और हमें माफ़ नहीं किया, तो हम यक़ीनन उन लोगों में से होंगे जो बिल्कुल घाटे में रहे, जिनकी सारी मेहनत बेकार चली गई और जिन्होंने दुनिया और आख़िरत दोनों को खो दिया।"

यह एहसास और यह दुआ दिखाती है कि गुनाह के बाद सच्चा पछतावा और अल्लाह से माफ़ी मांगना कितना बड़ा गुण है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, जब बंदा अपनी गलती पर शर्मिंदा होकर उसकी तरफ लौटता है, तो अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उसके गुनाहों को धो देता है। यह हमारे लिए सबक है कि हमसे भी अगर कोई गलती हो जाए, तो हमें निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि तौबा और इस्तिग़फ़ार के ज़रिए अल्लाह की रहमत का दामन थामना चाहिए। अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से कहीं बड़ी है, और वह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 147-151 — अल-आराफ

147وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَلِقَاءِ الْآخِرَةِ حَبِطَتْ أَعْمَالُهُمْ ۚ هَلْ يُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को और आख़िरत की हुज़ूरी को झूठलाया उनका सब किया कराया अकारत हो गया, उनको बस उन्हीं आमाल की जज़ा या सज़ा दी जाएगी जो वह करते थे
148وَاتَّخَذَ قَوْمُ مُوسَىٰ مِن بَعْدِهِ مِنْ حُلِيِّهِمْ عِجْلًا جَسَدًا لَّهُ خُوَارٌ ۚ أَلَمْ يَرَوْا أَنَّهُ لَا يُكَلِّمُهُمْ وَلَا يَهْدِيهِمْ سَبِيلًا ۘ اتَّخَذُوهُ وَكَانُوا ظَالِمِينَ
और मूसा की क़ौम ने (कोहेतूर पर) उनके जाने के बाद अपने जेवरों को (गलाकर) एक बछड़े की मूरत बनाई (यानि) एक जिस्म जिसमें गाए की सी आवाज़ थी (अफसोस) क्या उन लोगों ने इतना भी न देखा कि वह न तो उनसे बात ही कर सकता और न किसी तरह की हिदायत ही कर सकता है (खुलासा) उन लोगों ने उसे (अपनी माबूद बना लिया)
149وَلَمَّا سُقِطَ فِي أَيْدِيهِمْ وَرَأَوْا أَنَّهُمْ قَدْ ضَلُّوا قَالُوا لَئِن لَّمْ يَرْحَمْنَا رَبُّنَا وَيَغْفِرْ لَنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
और आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते थे और जब वह पछताए और उन्होने अपने को यक़ीनी गुमराह देख लिया तब कहने लगे कि अगर हमारा परदिगार हम पर रहम नहीं करेगा और हमारा कुसूर न माफ़ करेगा तो हम यक़ीनी घाटा उठाने वालों में हो जाएगें
150وَلَمَّا رَجَعَ مُوسَىٰ إِلَىٰ قَوْمِهِ غَضْبَانَ أَسِفًا قَالَ بِئْسَمَا خَلَفْتُمُونِي مِن بَعْدِي ۖ أَعَجِلْتُمْ أَمْرَ رَبِّكُمْ ۖ وَأَلْقَى الْأَلْوَاحَ وَأَخَذَ بِرَأْسِ أَخِيهِ يَجُرُّهُ إِلَيْهِ ۚ قَالَ ابْنَ أُمَّ إِنَّ الْقَوْمَ اسْتَضْعَفُونِي وَكَادُوا يَقْتُلُونَنِي فَلَا تُشْمِتْ بِيَ الْأَعْدَاءَ وَلَا تَجْعَلْنِي مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
और जब मूसा पलट कर अपनी क़ौम की तरफ आए तो (ये हालत देखकर) रंज व गुस्से में (अपनी क़ौम से) कहने लगे कि तुम लोगों ने मेरे बाद बहुत बुरी हरकत की-तुम लोग अपने परवरदिगार के हुक्म (मेरे आने में) किस कदर जल्दी कर बैठे और (तौरैत की) तख्तियों को फेंक दिया और अपने भाई (हारून) के सर (के बालों को पकड़ कर अपनी तर फ खींचने लगे) उस पर हारून ने कहा ऐ मेरे मांजाए (भाई) मै क्या करता क़ौम ने मुझे हक़ीर समझा और (मेरा कहना न माना) बल्कि क़रीब था कि मुझे मार डाले तो मुझ पर दुश्मनों को न हॅसवाइए और मुझे उन ज़ालिम लोगों के साथ न करार दीजिए
151قَالَ رَبِّ اغْفِرْ لِي وَلِأَخِي وَأَدْخِلْنَا فِي رَحْمَتِكَ ۖ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ
तब) मूसा ने कहा ऐ मेरे परवरदिगार मुझे और मेरे भाई को बख्श दे और हमें अपनी रहमत में दाख़िल कर और तू सबसे बढ़के रहम करने वाला है
अल-आराफकुरान सूची
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अनुवाद — अल-आराफ 149

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Tuesday, August 18, 2026

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