Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- हुलिय्यिहिम: उनके गहने (सोने-चाँदी के आभूषण)
- अजलन जसदन: एक बछड़े का शरीर (जिसमें जान नहीं थी)
- खुवार: बैल की आवाज़ (रंभाना)
- ला युकल्लिमुहुम: वह उनसे बात नहीं करता
- ला यह्दीहिम सबीलन: वह उन्हें कोई रास्ता नहीं दिखाता
तफसीर:
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम से अलग होकर तूर पहाड़ पर अपने रब से मुनाजात (प्रार्थना) के लिए गए थे। उनके जाने के बाद उनकी क़ौम ने एक बहुत बड़ी भूल की — उन्होंने अपने पास मौजूद सोने-चाँदी के गहनों को पिघलाकर एक बछड़े की मूर्ति बना ली। यह मूर्ति एक ठोस शरीर थी जिसमें जान नहीं थी, लेकिन उसमें से बैल की आवाज़ जैसी आवाज़ निकलती थी। यह आवाज़ हवा के गुज़रने से पैदा होती थी, फिर भी उन्होंने उसे अपना माबूद (पूज्य) बना लिया।
अल्लाह तआला इस आयत में उन पर फ़रमान (तिरस्कार) करते हुए कहते हैं: क्या उन्होंने इतना भी नहीं देखा कि यह बछड़ा न तो उनसे बात कर सकता है, न ही उन्हें किसी भलाई का रास्ता दिखा सकता है? वह न तो उनके किसी काम आ सकता है और न ही किसी मुसीबत को दूर कर सकता है। यह सब कुछ साफ़ और ज़ाहिर होते हुए भी उन्होंने उसे पूजा के लिए अपना लिया और इस तरह उन्होंने अपने ऊपर ज़ुल्म किया — क्योंकि उन्होंने अल्लाह की इबादत को छोड़कर एक बेजान मूर्ति की पूजा शुरू कर दी, जो नुक़्सान भी नहीं पहुँचा सकती और न फ़ायदा ही दे सकती है।
यह क़िस्सा हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है। इंसान जब अल्लाह से दूर होता है, तो वह ऐसी चीज़ों के पीछे भटक जाता है जो उसे न तो कोई फ़ायदा दे सकती हैं और न ही नुक़्सान से बचा सकती हैं। आज भी कई लोग दुनिया की चीज़ों को, धन-दौलत को, शोहरत को या अपनी इच्छाओं को अपना माबूद बना लेते हैं और उन्हीं के पीछे भागते रहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि केवल अल्लाह ही है जो सुनता है, देखता है, बात करता है और सही रास्ता दिखाता है। जो कोई अल्लाह को छोड़कर किसी और चीज़ का सहारा लेता है, वह अपने ऊपर ज़ुल्म करता है और नुक़्सान में रहता है।
हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह की इबादत करें, उसी से मदद माँगें और उसी के बताए हुए रास्ते पर चलें। यही सच्ची कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में भलाई तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 146-150 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 148
सूरा अल-आराफ आयत 148 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मूसा की क़ौम ने (कोहेतूर पर) उनके जाने के…सूरा आयत 148/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 146–150. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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