अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَالْفَارِقَاتِ: अर्थात वे (फ़रिश्ते) जो अलग करते हैं।
- فَرْقًا: अलग करना, जुदा करना (हक़ और बातिल के बीच फर्क करना)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में उन फ़रिश्तों की क़सम खाई है जो हक़ (सत्य) और बातिल (असत्य) के बीच फर्क करने वाले हैं। ये फ़रिश्ते अल्लाह के हुक्म से वह चीज़ें लेकर आते हैं जो सच और झूठ, हलाल और हराम, और नेकी व बुराई के बीच स्पष्ट अंतर पैदा करती हैं। यानी ये फ़रिश्ते अल्लाह की वही (प्रकाशना) लेकर आते हैं जो लोगों के लिए मार्गदर्शन का ज़रिया बनती है, और उन्हें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।
यह क़सम दर्शाती है कि अल्लाह ने अपने बंदों पर यह एहसान किया है कि उन्होंने फ़रिश्तों के माध्यम से वह ज्ञान और मार्गदर्शन भेजा जो उन्हें सही रास्ता दिखाता है। यह फर्क करने की क्रिया केवल दुनिया में ही नहीं, बल्कि आख़िरत में भी होगी, जब अच्छे और बुरे लोगों को अलग-अलग कर दिया जाएगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने हमें अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उसने अपने फ़रिश्तों और अपनी किताबों के माध्यम से हमें सही और गलत की पहचान दी है। यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी का सबूत है कि उसने हमारे लिए हिदायत का रास्ता साफ़ कर दिया। हमें चाहिए कि हम इस फर्क को समझें और अपनी ज़िंदगी में हक़ को अपनाएं और बातिल से दूर रहें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में सुकून और आख़िरत में कामयाबी दिलाएगा। अल्लाह की इन नेमतों पर हमें शुक्र अदा करना चाहिए और अपने जीवन को उसके बताए हुए नियमों के अनुसार ढालना चाहिए।
📜 आयत 2-6 — अल-मुरसलात
अनुवाद — अल-मुरसलात 4
सूरा अल-मुरसलात आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैंसूरा आयत 4/50 — अल-मुरसलात المرسلات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुरसलात सुनें, अल-मुरसलात अनुवाद, अल-मुरसलात mp3, अल-मुरसलात pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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