अल-अनफाल · 11/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
إِذْ يُغَشِّيكُمُ النُّعَاسَ أَمَنَةً مِّنْهُ وَيُنَزِّلُ عَلَيْكُم مِّنَ السَّمَاءِ مَاءً لِّيُطَهِّرَكُم بِهِ وَيُذْهِبَ عَنكُمْ رِجْزَ الشَّيْطَانِ وَلِيَرْبِطَ عَلَىٰ قُلُوبِكُمْ وَيُثَبِّتَ بِهِ الْأَقْدَامَ ۝١١
Iz yughashsheekumun nu`assa amanatam minhu wa yunazzilu `alaikum minas samaaa`i maaa`al liyutah hirakum bihee wa yuzhiba `ankum rijzash Shaitaani wa liyarbita `ala quloobikum wa yusabbita bihil aqdaam
📖 हिंदी अर्थ
ये वह वक्त था जब अपनी तरफ से इत्मिनान देने के लिए तुम पर नींद को ग़ालिब कर रहा था और तुम पर आसमान से पानी बरस रहा था ताकि उससे तुम्हें पाक (पाकीज़ा कर दे और तुम से शैतान की गन्दगी दूर कर दे और तुम्हारे दिल मज़बूत कर दे और पानी से (बालू जम जाए) और तुम्हारे क़दम ब क़दम (अच्छी तरह) जमाए रहे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُغَشِّيكُمُ النُّعَاسَ: तुम्हें ऊँघ/नींद से ढक देता है।
  • أَمَنَةً: भय से सुरक्षा और शांति के लिए।
  • رِجْزَ الشَّيْطَانِ: शैतान की ओर से होने वाली गंदगी, अर्थात उसका वस्वसा (बुरा ख्याल) और भय।
  • لِيَرْبِطَ عَلَىٰ قُلُوبِكُمْ: तुम्हारे दिलों को मज़बूत करे (सब्र और यक़ीन से)।
  • يُثَبِّتَ بِهِ الْأَقْدَامَ: उस (पानी) के ज़रिए तुम्हारे क़दमों को जमा दे (रेतीली ज़मीन को सख्त करके)।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने मोमिन बंदों पर यह बड़ा एहसान फ़रमाया कि जंग (बद्र) के मैदान में जब दुश्मन का ख़ौफ़ और घबराहट तुम पर हावी हो रही थी, उस वक़्त उसने तुम पर नींद का ग़लबा कर दिया। यह नींद उसकी तरफ़ से अमन और सुकून का ज़रिया बनी, ताकि तुम्हारे दिलों से ख़ौफ़ ख़त्म हो जाए और तुम्हें तसल्ली हासिल हो। यह उसकी रहमत थी कि उसने तुम्हें नींद के ज़रिए ताज़गी और इत्मीनान अता किया।

फिर अल्लाह ने आसमान से बारिश उतारी। इस बारिश के कई फ़ायदे थे: एक तो यह कि उससे तुम्हारा शरीर पाक हुआ — छोटी-बड़ी नापाकी (हदस और जनाबत) दूर हुई, ताकि तुम पाकीज़गी के साथ इबादत और जिहाद के लिए तैयार हो सको। दूसरे, इस बारिश ने शैतान के वस्वसों और बुरे ख़्यालों को दूर किया, क्योंकि शैतान गंदगी और नापाकी में वस्वसा डालता है। तीसरे, अल्लाह ने इस बारिश के ज़रिए तुम्हारे दिलों को सब्र और यक़ीन पर मज़बूत किया, ताकि तुम्हारे दिल जंग के हौल से कमज़ोर न हों। चौथे, उसने उसी पानी से रेतीली ज़मीन को सख्त कर दिया, ताकि तुम्हारे क़दम उसमें धँसें नहीं और तुम दुश्मन के मुक़ाबले में जमे रहो। यह सब अल्लाह की तरफ़ से मोमिनीन की मदद और उनके हौसले को बुलंद करने का ज़रिया था।


फ़ायदे:

  1. अल्लाह अपने बंदों पर मुसीबत के वक़्त में भी रहमत और मदद के दरवाज़े खोलता है, और उन्हें सुकून व इत्मीनान अता करता है।
  2. पाकीज़गी (तहारत) सिर्फ़ जिस्मानी नहीं, बल्कि रूहानी तौर पर भी अहम है — यह शैतान के वस्वसों से बचाती है और दिल को अल्लाह की तरफ़ मोड़ती है।
  3. मुश्किल घड़ी में अल्लाह पर भरोसा और सब्र ही कामयाबी की कुंजी है; अल्लाह अपने बंदों के दिलों को मज़बूत करता है जब वे उसकी राह में जिहाद करते हैं।
  4. यह आयत मोमिनीन को सिखाती है कि अल्लाह की मदद ग़ैब से आती है — चाहे वह नींद की शक्ल में हो, बारिश की शक्ल में, या दिल के सुकून की शक्ल में। इसलिए हर हाल में उसी पर तवक्कुल रखना चाहिए।


📜 आयत 9-13 — अल-अनफाल

9إِذْ تَسْتَغِيثُونَ رَبَّكُمْ فَاسْتَجَابَ لَكُمْ أَنِّي مُمِدُّكُم بِأَلْفٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُرْدِفِينَ
(ये वह वक्त था) जब तुम अपने परवदिगार से फरियाद कर रहे थे उसने तुम्हारी सुन ली और जवाब दे दिया कि मैं तुम्हारी लगातार हज़ार फ़रिश्तों से मदद करूँगा
10وَمَا جَعَلَهُ اللَّهُ إِلَّا بُشْرَىٰ وَلِتَطْمَئِنَّ بِهِ قُلُوبُكُمْ ۚ وَمَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِندِ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और (ये इमदाद ग़ैबी) ख़ुदा ने सिर्फ तुम्हारी ख़ातिर (खुशी) के लिए की थी और तुम्हारे दिल मुतमइन हो जाएं और (याद रखो) मदद ख़ुदा के सिवा और कहीं से (कभी) नहीं होती बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
11إِذْ يُغَشِّيكُمُ النُّعَاسَ أَمَنَةً مِّنْهُ وَيُنَزِّلُ عَلَيْكُم مِّنَ السَّمَاءِ مَاءً لِّيُطَهِّرَكُم بِهِ وَيُذْهِبَ عَنكُمْ رِجْزَ الشَّيْطَانِ وَلِيَرْبِطَ عَلَىٰ قُلُوبِكُمْ وَيُثَبِّتَ بِهِ الْأَقْدَامَ
ये वह वक्त था जब अपनी तरफ से इत्मिनान देने के लिए तुम पर नींद को ग़ालिब कर रहा था और तुम पर आसमान से पानी बरस रहा था ताकि उससे तुम्हें पाक (पाकीज़ा कर दे और तुम से शैतान की गन्दगी दूर कर दे और तुम्हारे दिल मज़बूत कर दे और पानी से (बालू जम जाए) और तुम्हारे क़दम ब क़दम (अच्छी तरह) जमाए रहे
12إِذْ يُوحِي رَبُّكَ إِلَى الْمَلَائِكَةِ أَنِّي مَعَكُمْ فَثَبِّتُوا الَّذِينَ آمَنُوا ۚ سَأُلْقِي فِي قُلُوبِ الَّذِينَ كَفَرُوا الرُّعْبَ فَاضْرِبُوا فَوْقَ الْأَعْنَاقِ وَاضْرِبُوا مِنْهُمْ كُلَّ بَنَانٍ
(ऐ रसूल ये वह वक्त था) जब तुम्हारा परवरदिगार फ़रिश्तों से फरमा रहा था कि मै यकीनन तुम्हारे साथ हूँ तुम ईमानदारों को साबित क़दम रखो मै बहुत जल्द काफिरों के दिलों में (तुम्हारा रौब) डाल दूँगा (पस फिर क्या है अब) तो उन कुफ्फार की गर्दनों पर मारो और उनकी पोर पोर को चटिया कर दो
13ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ شَاقُّوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ وَمَن يُشَاقِقِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَإِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
ये (सज़ा) इसलिए है कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालिफ की और जो शख़्स (भी) ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालफ़त करेगा तो (याद रहें कि) ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब करने वाला है
अल-अनफालकुरान सूची
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मदनीRevelation
11आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 11

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Tuesday, August 18, 2026

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