Wa maa ja`alahul laahu illaa bushraa wa litatma`inna bihee quloobukum; wa man nasru illaa min `indil laah; innal laaha Azeezun Hakeem
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और (ये इमदाद ग़ैबी) ख़ुदा ने सिर्फ तुम्हारी ख़ातिर (खुशी) के लिए की थी और तुम्हारे दिल मुतमइन हो जाएं और (याद रखो) मदद ख़ुदा के सिवा और कहीं से (कभी) नहीं होती बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
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اور اس مدد کو خدا نے محض بشارت بنایا تھا کہ تمہارے دل سے اطمینان حاصل کریں۔ اور مدد تو الله ہی کی طرف سے ہے۔ بےشک خدا غالب حکمت والا ہے
और (ये इमदाद ग़ैबी) ख़ुदा ने सिर्फ तुम्हारी ख़ातिर (खुशी) के लिए की थी और तुम्हारे दिल मुतमइन हो जाएं और (याद रखो) मदद ख़ुदा के सिवा और कहीं से (कभी) नहीं होती बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
بُشْرَىٰ: शुभ सूचना, खुशखबरी
لِتَطْمَئِنَّ: ताकि चैन और सुकून हासिल हो
عَزِيزٌ: वह शक्तिशाली है, जिसे कोई हरा न सके
حَكِيمٌ: वह अपने हर काम और फैसले में पूर्ण ज्ञान और समझदारी रखता है
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने बद्र के मैदान में मुसलमानों की मदद के लिए फ़रिश्तों को भेजा था। यह आयत बताती है कि अल्लाह ने यह मदद केवल इसलिए भेजी ताकि यह तुम्हारे लिए एक शुभ सूचना हो और तुम्हारे दिलों को सुकून और इत्मिनान हासिल हो। इससे तुम्हारे दिलों का डर और घबराहट दूर हो जाए और तुम्हें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह तुम्हारी मदद करेगा।
अल्लाह तआला स्पष्ट कर रहे हैं कि असली फ़तह और कामयाबी सिर्फ़ अल्लाह ही की तरफ़ से आती है। यह न तो तुम्हारी तादाद की ज़्यादती से है और न ही तुम्हारे हथियारों की ताक़त से। भले ही तुम कम तादाद में हो और साधन भी कम हों, लेकिन अगर अल्लाह की मदद तुम्हारे साथ हो तो तुम ज़रूर कामयाब होगे। अल्लाह तआला अपनी ताक़त में बेहद शक्तिशाली है, उसे कोई मात नहीं दे सकता, और वह अपने हर फैसले और हुक्म में पूर्ण ज्ञान और समझदारी रखता है। वह जो करता है, उसी में भलाई होती है।
फ़ायदे (सबक):
अल्लाह पर भरोसा: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि किसी भी काम में कामयाबी के लिए सिर्फ़ ज़रिया और तादाद पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अल्लाह पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ही असली मददगार है।
दिल का सुकून: जब इंसान को यक़ीन हो जाए कि अल्लाह उसके साथ है, तो उसके दिल से डर और घबराहट खत्म हो जाती है। यही सुकून कामयाबी की पहली सीढ़ी है।
अल्लाह की ताक़त और हिकमत: अल्लाह की ताक़त पर कोई ग़ालिब नहीं आ सकता, और उसका हर फैसला हिकमत पर आधारित होता है। इसलिए हमें उसके फैसलों पर राज़ी रहना चाहिए और उसकी मदद का इंतज़ार करना चाहिए।
मुश्किलों में उम्मीद: यह आयत हमें सिखाती है कि मुश्किल से मुश्किल हालात में भी अल्लाह की मदद की उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है, चाहे ज़रिया कितने ही कम क्यों न हों।
और (ये इमदाद ग़ैबी) ख़ुदा ने सिर्फ तुम्हारी ख़ातिर (खुशी) के लिए की थी और तुम्हारे दिल मुतमइन हो जाएं और (याद रखो) मदद ख़ुदा के सिवा और कहीं से (कभी) नहीं होती बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
ये वह वक्त था जब अपनी तरफ से इत्मिनान देने के लिए तुम पर नींद को ग़ालिब कर रहा था और तुम पर आसमान से पानी बरस रहा था ताकि उससे तुम्हें पाक (पाकीज़ा कर दे और तुम से शैतान की गन्दगी दूर कर दे और तुम्हारे दिल मज़बूत कर दे और पानी से (बालू जम जाए) और तुम्हारे क़दम ब क़दम (अच्छी तरह) जमाए रहे
(ऐ रसूल ये वह वक्त था) जब तुम्हारा परवरदिगार फ़रिश्तों से फरमा रहा था कि मै यकीनन तुम्हारे साथ हूँ तुम ईमानदारों को साबित क़दम रखो मै बहुत जल्द काफिरों के दिलों में (तुम्हारा रौब) डाल दूँगा (पस फिर क्या है अब) तो उन कुफ्फार की गर्दनों पर मारो और उनकी पोर पोर को चटिया कर दो
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