अल-अनफाल · 24/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اسْتَجِيبُوا لِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ إِذَا دَعَاكُمْ لِمَا يُحْيِيكُمْ ۖ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَحُولُ بَيْنَ الْمَرْءِ وَقَلْبِهِ وَأَنَّهُ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ ۝٢٤
Yaaa aiyuhal lazeena aamanus tajeeboo lillaahi wa lir Rasooli izaa da`aakum limaa yuhyeekum wa`lamooo annal laaha yahoolu bainal mar`i wa qalbihee wa anahooo ilaihi tuhsharoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदार जब तुम को हमारा रसूल (मोहम्मद) ऐसे काम के लिए बुलाए जो तुम्हारी रूहानी ज़िन्दगी का बाइस हो तो तुम ख़ुदा और रसूल के हुक्म दिल से कुबूल कर लो और जान लो कि ख़ुदा वह क़ादिर मुतलिक़ है कि आदमी और उसके दिल (इरादे) के दरमियान इस तरह आ जाता है और ये भी समझ लो कि तुम सबके सब उसके सामने हाज़िर किये जाओगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَجِيبُوا – स्वीकार करो, आज्ञा मानो, पुकार पर लब्बैक कहो।
  • لِمَا يُحْيِيكُمْ – उस चीज़ के लिए जो तुम्हें (सच्ची) ज़िंदगी देती है, यानी ईमान, इल्म और दीन।
  • يَحُولُ بَيْنَ الْمَرْءِ وَقَلْبِهِ – इंसान और उसके दिल के बीच आड़ बन जाता है, यानी वह दिल को बदलने और उस पर पूरा नियंत्रण रखने की शक्ति रखता है।
  • تُحْشَرُونَ – एकत्र किए जाओगे, जमा किए जाओगे।

तफसीर:

ऐ ईमान लाने वालों! अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पुकार पर तुरंत लब्बैक कहो, जब वह तुम्हें उस चीज़ की ओर बुलाएं जो तुम्हें सच्ची ज़िंदगी देती है। यह ज़िंदगी सिर्फ़ खाने-पीने और दुनिया की चंद रातों की ज़िंदगी नहीं है, बल्कि यह ईमान, इल्म, अमल और दीन की वह रूह है जो इंसान के दिल को ज़िंदा करती है, उसके अंदर अल्लाह की मोहब्बत, सच्चाई की तलब और अच्छाई की तरफ रग़बत पैदा करती है। जो इंसान अल्लाह और उसके रसूल की बुलाहट पर अमल करता है, उसकी ज़िंदगी में बरकत आती है, उसका दिल सुकून पाता है, और उसे दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई नसीब होती है।

और जान लो कि अल्लाह तआला इंसान और उसके दिल के बीच हस्तक्षेप करने की पूरी शक्ति रखता है। वही दिलों को बदलने वाला है, वही किसी के दिल को हिदायत की तरफ मोड़ सकता है और वही किसी को गुमराही में छोड़ सकता है। जब अल्लाह के पास यह सब कुछ है, तो उसकी बुलाहट को ठुकराना कैसी नादानी है? वही तो है जो तुम्हारे दिलों के राज़ जानता है, तुम्हारी नीयतों को पढ़ता है, और तुम्हारे इरादों को बदलने पर क़ादिर है। इसलिए उसकी तरफ दौड़ो, उसकी आज्ञा को अपने दिल की बात मानो, क्योंकि असली मालिक वही है।

और यह भी यक़ीन रखो कि तुम सबको एक दिन उसी की तरफ लौटकर जाना है। क़यामत के दिन तुम सब उसके सामने हाज़िर किए जाओगे, और तुम्हारे अच्छे और बुरे हर अमल का हिसाब लिया जाएगा। जिसने दुनिया में अल्लाह की बुलाहट पर कान रखा, उसका अंजाम जन्नत होगा, और जिसने उसकी पुकार को अनसुना कर दिया, उसका ठिकाना जहन्नम होगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी कामयाबी उसी में है कि हम अल्लाह और उसके रसूल की बात को अपनी ज़िंदगी का नुस्खा बनाएं। जब हम उनकी बुलाहट पर चलेंगे, तो हमारे दिल ज़िंदा होंगे, हमारे हालात बेहतर होंगे और हमारी आख़िरत संवर जाएगी। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की बेहतरी और आख़िरत की नजात दोनों तक पहुंचाता है।



📜 आयत 22-26 — अल-अनफाल

22۞ إِنَّ شَرَّ الدَّوَابِّ عِندَ اللَّهِ الصُّمُّ الْبُكْمُ الَّذِينَ لَا يَعْقِلُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ज़मीन पर चलने वाले तमाम हैवानात से बदतर ख़ुदा के नज़दीक वह बहरे गूँगे (कुफ्फार) हैं जो कुछ नहीं समझते
23وَلَوْ عَلِمَ اللَّهُ فِيهِمْ خَيْرًا لَّأَسْمَعَهُمْ ۖ وَلَوْ أَسْمَعَهُمْ لَتَوَلَّوا وَّهُم مُّعْرِضُونَ
और अगर ख़ुदा उनमें नेकी (की बू भी) देखता तो ज़रूर उनमें सुनने की क़ाबलियत अता करता मगर ये ऐसे हैं कि अगर उनमें सुनने की क़ाबिलयत भी देता तो मुँह फेर कर भागते।
24يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اسْتَجِيبُوا لِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ إِذَا دَعَاكُمْ لِمَا يُحْيِيكُمْ ۖ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَحُولُ بَيْنَ الْمَرْءِ وَقَلْبِهِ وَأَنَّهُ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
ऐ ईमानदार जब तुम को हमारा रसूल (मोहम्मद) ऐसे काम के लिए बुलाए जो तुम्हारी रूहानी ज़िन्दगी का बाइस हो तो तुम ख़ुदा और रसूल के हुक्म दिल से कुबूल कर लो और जान लो कि ख़ुदा वह क़ादिर मुतलिक़ है कि आदमी और उसके दिल (इरादे) के दरमियान इस तरह आ जाता है और ये भी समझ लो कि तुम सबके सब उसके सामने हाज़िर किये जाओगे
25وَاتَّقُوا فِتْنَةً لَّا تُصِيبَنَّ الَّذِينَ ظَلَمُوا مِنكُمْ خَاصَّةً ۖ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
और उस फितने से डरते रहो जो ख़ास उन्हीं लोगों पर नही पड़ेगा जिन्होने तुम में से ज़ुल्म किया (बल्कि तुम सबके सब उसमें पड़ जाओगे) और यक़ीन मानों कि ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब करने वाला है
26وَاذْكُرُوا إِذْ أَنتُمْ قَلِيلٌ مُّسْتَضْعَفُونَ فِي الْأَرْضِ تَخَافُونَ أَن يَتَخَطَّفَكُمُ النَّاسُ فَآوَاكُمْ وَأَيَّدَكُم بِنَصْرِهِ وَرَزَقَكُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
(मुसलमानों वह वक्त याद करो) जब तुम सर ज़मीन (मक्के) में बहुत कम और बिल्कुल बेबस थे उससे सहमे जाते थे कि कहीं लोग तुमको उचक न ले जाए तो ख़ुदा ने तुमको (मदीने में) पनाह दी और ख़ास अपनी मदद से तुम्हारी ताईद की और तुम्हे पाक व पाकीज़ा चीज़े खाने को दी ताकि तुम शुक्र गुज़ारी करो
अल-अनफालकुरान सूची
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मदनीRevelation
24आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 24

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Tuesday, August 18, 2026

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