अल-अनफाल · 23/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
وَلَوْ عَلِمَ اللَّهُ فِيهِمْ خَيْرًا لَّأَسْمَعَهُمْ ۖ وَلَوْ أَسْمَعَهُمْ لَتَوَلَّوا وَّهُم مُّعْرِضُونَ ۝٢٣
Wa law `alimal laahu feehim khairal la asma`ahum; wa law asma`ahum latawallaw wa hum mu`ridoon
📖 हिंदी अर्थ
और अगर ख़ुदा उनमें नेकी (की बू भी) देखता तो ज़रूर उनमें सुनने की क़ाबलियत अता करता मगर ये ऐसे हैं कि अगर उनमें सुनने की क़ाबिलयत भी देता तो मुँह फेर कर भागते।

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • خَيْرًا – भलाई, नेकी, ईमान की सलाहियत
  • لَأَسْمَعَهُمْ – उन्हें सुनाता (इस तरह सुनाना कि वे समझें और क़बूल करें)
  • لَتَوَلَّوْا – वे मुँह मोड़ लेते
  • مُعْرِضُونَ – किनारा करने वाले, ईमान से विमुख

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में मुनाफ़िक़ीन और काफ़िरों की उस हालत का ज़िक्र कर रहे हैं जो हक़ को सुनकर भी उससे मुँह मोड़ लेते हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि अगर उनमें भलाई की कोई गुंजाइश होती, अगर उनके दिलों में ईमान की कोई सलाहियत होती, तो अल्लाह उन्हें क़ुरआन की आयतों को समझने और क़बूल करने की तौफ़ीक़ देता। लेकिन अल्लाह ने उनके दिलों की हालत जान ली कि उनमें कोई ख़ैर नहीं, वे ईमान लाने वाले ही नहीं हैं।

और अगर फ़र्ज़न अल्लाह उन्हें सुना भी देता — यानी वे आयतें सुन लेते और समझ भी लेते — तो भी वे ईमान नहीं लाते। वे जानबूझकर, हठधर्मी और अकड़ से हक़ से मुँह मोड़ लेते। उनका अंदाज़ यह है कि वे सुनकर भी अनसुना कर देते हैं, समझकर भी नहीं मानते। उनके चेहरे ईमान से इस कदर विमुख हैं कि किसी भी तरह की दलील और निशानी उन्हें रास्ते पर नहीं ला सकती।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है कि हिदायत अल्लाह के हाथ में है। नबी करीम ﷺ का काम सिर्फ पहुँचाना है। जिसके दिल में अल्लाह ने ख़ैर रखी है, वह ज़रा सी बात से हिदायत पा जाता है, और जिसके दिल में ख़ैर नहीं, उसे चाहे कितनी ही निशानियाँ दिखा दी जाएँ, वह हक़ से दूर ही रहता है।

इससे हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपने दिलों को अल्लाह की तरफ़ झुकाए रखें, अपने अंदर नेकी और भलाई की सलाहियत पैदा करें, ताकि अल्लाह हमें समझने और क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे। और यह भी याद रखें कि हिदायत अल्लाह ही देता है — इसलिए हमें उससे दुआ करनी चाहिए कि वह हमें सीधे रास्ते पर चलाए और हमारे दिलों को ईमान की मिठास से भर दे।



📜 आयत 21-25 — सूरा अल-अनफाल

21وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ قَالُوا سَمِعْنَا وَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ
और उन लोगों के ऐसे न हो जाओं जो (मुँह से तो) कहते थे कि हम सुन रहे हैं हालाकि वह सुनते (सुनाते ख़ाक) न थे
22۞ إِنَّ شَرَّ الدَّوَابِّ عِندَ اللَّهِ الصُّمُّ الْبُكْمُ الَّذِينَ لَا يَعْقِلُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ज़मीन पर चलने वाले तमाम हैवानात से बदतर ख़ुदा के नज़दीक वह बहरे गूँगे (कुफ्फार) हैं जो कुछ नहीं समझते
23وَلَوْ عَلِمَ اللَّهُ فِيهِمْ خَيْرًا لَّأَسْمَعَهُمْ ۖ وَلَوْ أَسْمَعَهُمْ لَتَوَلَّوا وَّهُم مُّعْرِضُونَ
और अगर ख़ुदा उनमें नेकी (की बू भी) देखता तो ज़रूर उनमें सुनने की क़ाबलियत अता करता मगर ये ऐसे हैं कि अगर उनमें सुनने की क़ाबिलयत भी देता तो मुँह फेर कर भागते।
24يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اسْتَجِيبُوا لِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ إِذَا دَعَاكُمْ لِمَا يُحْيِيكُمْ ۖ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَحُولُ بَيْنَ الْمَرْءِ وَقَلْبِهِ وَأَنَّهُ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
ऐ ईमानदार जब तुम को हमारा रसूल (मोहम्मद) ऐसे काम के लिए बुलाए जो तुम्हारी रूहानी ज़िन्दगी का बाइस हो तो तुम ख़ुदा और रसूल के हुक्म दिल से कुबूल कर लो और जान लो कि ख़ुदा वह क़ादिर मुतलिक़ है कि आदमी और उसके दिल (इरादे) के दरमियान इस तरह आ जाता है और ये भी समझ लो कि तुम सबके सब उसके सामने हाज़िर किये जाओगे
25وَاتَّقُوا فِتْنَةً لَّا تُصِيبَنَّ الَّذِينَ ظَلَمُوا مِنكُمْ خَاصَّةً ۖ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
और उस फितने से डरते रहो जो ख़ास उन्हीं लोगों पर नही पड़ेगा जिन्होने तुम में से ज़ुल्म किया (बल्कि तुम सबके सब उसमें पड़ जाओगे) और यक़ीन मानों कि ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब करने वाला है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
23आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 23

सूरा अल-अनफाल आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर ख़ुदा उनमें नेकी (की बू भी) देखता तो…

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Wednesday, September 30, 2026

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