अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- خَيْرًا – भलाई, नेकी, ईमान की सलाहियत
- لَأَسْمَعَهُمْ – उन्हें सुनाता (इस तरह सुनाना कि वे समझें और क़बूल करें)
- لَتَوَلَّوْا – वे मुँह मोड़ लेते
- مُعْرِضُونَ – किनारा करने वाले, ईमान से विमुख
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में मुनाफ़िक़ीन और काफ़िरों की उस हालत का ज़िक्र कर रहे हैं जो हक़ को सुनकर भी उससे मुँह मोड़ लेते हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि अगर उनमें भलाई की कोई गुंजाइश होती, अगर उनके दिलों में ईमान की कोई सलाहियत होती, तो अल्लाह उन्हें क़ुरआन की आयतों को समझने और क़बूल करने की तौफ़ीक़ देता। लेकिन अल्लाह ने उनके दिलों की हालत जान ली कि उनमें कोई ख़ैर नहीं, वे ईमान लाने वाले ही नहीं हैं।
और अगर फ़र्ज़न अल्लाह उन्हें सुना भी देता — यानी वे आयतें सुन लेते और समझ भी लेते — तो भी वे ईमान नहीं लाते। वे जानबूझकर, हठधर्मी और अकड़ से हक़ से मुँह मोड़ लेते। उनका अंदाज़ यह है कि वे सुनकर भी अनसुना कर देते हैं, समझकर भी नहीं मानते। उनके चेहरे ईमान से इस कदर विमुख हैं कि किसी भी तरह की दलील और निशानी उन्हें रास्ते पर नहीं ला सकती।
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है कि हिदायत अल्लाह के हाथ में है। नबी करीम ﷺ का काम सिर्फ पहुँचाना है। जिसके दिल में अल्लाह ने ख़ैर रखी है, वह ज़रा सी बात से हिदायत पा जाता है, और जिसके दिल में ख़ैर नहीं, उसे चाहे कितनी ही निशानियाँ दिखा दी जाएँ, वह हक़ से दूर ही रहता है।
इससे हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपने दिलों को अल्लाह की तरफ़ झुकाए रखें, अपने अंदर नेकी और भलाई की सलाहियत पैदा करें, ताकि अल्लाह हमें समझने और क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे। और यह भी याद रखें कि हिदायत अल्लाह ही देता है — इसलिए हमें उससे दुआ करनी चाहिए कि वह हमें सीधे रास्ते पर चलाए और हमारे दिलों को ईमान की मिठास से भर दे।
📜 आयत 21-25 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 23
सूरा अल-अनफाल आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर ख़ुदा उनमें नेकी (की बू भी) देखता तो…सूरा आयत 23/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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