अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तस्क़फ़न्नहुम: उन्हें पा लो, उन पर क़ाबू पा लो (युद्ध में उनसे मुठभेड़ हो जाए)
- फ़शर्रिद: उनके साथ ऐसा व्यवहार करो जिससे वे तितर-बितर हो जाएँ, उन्हें इस तरह सज़ा दो कि वे भाग खड़े हों
- मन ख़ल्फ़हुम: उनके पीछे वाले (अन्य शत्रु जो उनके पीछे हैं)
- यज़्ज़क्करून: वे सीख लें, नसीहत पकड़ लें, विचार कर लें
विस्तृत तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ से किए गए अपने वादों और संधियों को तोड़ दिया। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हिदायत दे रहा है कि यदि युद्ध के मैदान में तुम्हें इन संधि-भंग करने वालों पर क़ाबू मिल जाए और वे तुम्हारे हाथ लग जाएँ, तो उन्हें ऐसी सख्त सज़ा दो, ऐसी कड़ी कार्रवाई करो जो उनके लिए सबक बन जाए। उन्हें इस तरह दंडित करो कि उनके पीछे बैठे हुए अन्य दुश्मन भी डर जाएँ, उनके दिलों में खौफ पैदा हो जाए और वे तितर-बितर हो जाएँ। यह कार्रवाई इसलिए है ताकि वे सबक सीखें, अल्लाह और उसके रसूल के खिलाफ साजिश करने से पहले सौ बार सोचें, और यह समझ लें कि अल्लाह के दीन का मुकाबला करना उनके लिए कितना भारी और विनाशकारी साबित हो सकता है।
इस आयत में एक बहुत बड़ी सैन्य और रणनीतिक शिक्षा भी है। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को सिखा रहे हैं कि दुश्मन के साथ जो व्यवहार किया जाए, वह सिर्फ उसी समूह तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर उन सभी पर पड़े जो उनके पीछे हैं और जो इस्लाम के दुश्मन हैं। जब एक समूह को कड़ी सज़ा दी जाती है, तो दूसरे समूहों के दिलों में रूबाब पैदा होता है और वे आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं करते। यह एक ऐसा उसूल है जो आज भी सैन्य रणनीति में अपनाया जाता है।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि इस्लाम कमज़ोरी और बुज़दिली का दीन नहीं है। जहाँ सख्ती की ज़रूरत हो, वहाँ सख्ती करना ही बेहतर है। लेकिन यह सख्ती भी इंसाफ के दायरे में रहकर होनी चाहिए। अल्लाह तआला ने यहाँ यह भी बताया कि दुश्मनों के साथ सख्ती का मक़सद सिर्फ उन्हें सबक सिखाना और दूसरों को डराना है, ताकि वे अपनी शरारतों से बाज़ आएँ और इस्लाम के खिलाफ कोई कदम न उठाएँ।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों के साथ बड़ा मेहरबान है। वह नहीं चाहता कि लोग हमेशा जंग और लड़ाई में ही रहें। इसलिए उसने यह हिदायत दी कि सज़ा का मक़सद सिर्फ इबरत (सबक) है, ताकि लोग सीख जाएँ और फिर अमन और सुकून से रहें। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने मोमिनों को यह रणनीति सिखाई जो उनके लिए बड़ी हिफाज़त का ज़रिया बनी।
📜 आयत 55-59 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 57
सूरा अल-अनफाल आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो अगर वह लड़ाई में तुम्हारे हाथे चढ़ जाएँ तो…सूरा आयत 57/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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